राज-काज

प्रजातंत्र में अपना वजूद तलाशती प्रजा

प्रजातंत्र, लोकतंत्र- लोगों के लिए, लोगों के द्वारा, लोगों की शासन प्रणाली।

सब मुद्दों पर हावी रोजगार की चाहत

आरक्षण का मुद्दा हो या अल्पसंख्यकों की असुरक्षा की भावना का या हिंदू-मुस्लिम विवाद, आज सबसे बड़ी व गम्भीर समस्या रोजगार की है।

मानसिक अस्वस्थता - भारत में फैलती महामारी

हम आए दिन मीडिया में आत्महत्याओं के बारे में पढ़ते हैं, किसान खुदकुशी कर रहे हैं या छात्र फंदा लगा रहे हैं, पब्लिक में जानी-मानी हस्तियों द्वारा आत्मघात का समाचार भी सुर्खियां बटोरता है।

चुनावी वैतरणी पार करने के लिए भाजपा एक बार फिर ‘‘रामजी’’ की शरण में !

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हाल ही में डॉ० भीमराव अम्बेदकर के नाम में संशोधन कर उसमें ‘‘रामजी’’ जोड़ने तथा ‘‘आम्बेदकर’’ करने का आदेश दिया है।

स्वायत्तता- क्या उच्च शिक्षा के उद्धार का द्वार

देश के 60 बड़े विश्वविद्यालयों तथा कई बड़े महाविद्यालयों को स्वायत्तता(ऑटोनॉमी) प्रदान की गई है।

केजरीवाल की माफी- कितना पश्चाताप, कितना संताप?

केजरीवाल ने मानहानि मामलों में माफी मांगने का नया सिलसिला शुरू किया है। यह उनका राजनीति में नया पैंतरा है, जो उनको अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए खेलना पड़ रहा है।

हरियाणा के राजनैतिक दलों को है पिछड़े वर्ग के प्रभावी नेता की तलाश

ईश्वर धामु(भिवानी):हरियाणा की राजनैतिक नगरी जींद में 15 फरवरी को हुई भाजपा की युवा हुंकार रैली के बाद हरियाणा की भाजपा चुनाव मोड में आ गई और सत्ता से जुड़े नेताओं ने चुनाव के लिए अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी। मुख्यमंत्री और मंत्रियों की जनसभाओं के एजेंडे बदल गए हैं।

हैप्पीनैस इंडैक्स में पिछड़ता भारत, आखिर क्यों?

वर्ल्ड हैप्पीनैस रिपोर्ट 2018 में भारत 156 देशों की सूची में 133वें स्थान पर है और पिछली बार के 122वें स्थान से 11 देशों से पीछे हो गया है।

महान वैज्ञानिक और गणिजज्ञ हॉकिंग- जिजीविषा का उत्कृष्ट उदाहरण

स्टीफन हॉकिंग का जीवन तथा उनकी उपलब्ध्यिं आने वाले समय में भी हम सबके लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।

कुछ करने का जज्बा बनाम अनुभव

अनुभव का जीवन में महत्व ज्यादा है या उत्साह का। इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयान ने इस शाश्वत मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। संसद के सैंटरल हॉल में ‘विकास के लिए हम’ कार्यक्रम में उन्होंने जिलों में फै्रश और कुछ कर गुजरने वाले- 27, 28 या 30 के युवा अफसरों को डीएम लगाने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि 40-45 वर्ष के अफसरों को और भी टैंशन होती है, जैसे परिवार, बच्चों की पढ़ाई और बड़े शहरों में पोस्टिंग इत्यादि।

मूर्तियों को तोड़ना- अव्यवस्था का बुलावा

मूर्तियों की तोड़-फोड़ को नई क्रांति, नई विचारधारा, नये शासन से जोड़कर देखा जाता रहा है।

रिटायरमैंट- 60 वर्ष से 70 वर्ष की उम्र का पड़ाव- नयी आकर्षक उम्र

सेवानिवृत्ति की उम्र 58 वर्ष हो या 60 वर्ष। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि रिटायर होने के बाद, सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला प्रश्न कि अब क्या करोगे? जैसे कि छोटे बच्चे से ये पूछा जाना कि ‘बच्चे, बड़े होकर क्या बनोगे?’

विज्ञापनों में छाया सरकारी विकास

निःसंदेह आज का युग विज्ञापन का युग है। विज्ञापन का ही नहीं, स्व-विज्ञापन का युग है।

वित्त मंत्री जी देर से बोले पर ध्यान दीजिए क्या बोले?

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 11,400 करोड़ रुपये के पीएनबी बैंक धोखाधड़ी पर पहले तो चुप्पी बनाए रखी। जब मुंह खोला तो रेग्यूलेटरों और ऑडिटरों को कोसा तथा हर घोटाले के लिए नेताओं को जिम्मेदार ठहराने को गलत बताकर उद्यमियों तथा व्यावसायिक संस्थानों के शीर्षस्थ अधिकारियों को नैतिकता बरतने का उपदेश दे डाला। अपनी जवाबदेही से कन्नी काटते हुए एक वकील वाला केवल तार्किक प्रश्न खड़ा किया है कि नेता ही क्यूं, नियामक इस घोटाले के लिए जिम्मेवार हैं। 

भारत-करप्शन में 81वीं पायदान पर

एक बार फिर करप्शन सूचकांक में भारत का स्थान लुढक़ कर 81वें स्थान पर पहुँच गया हैं। ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल, जोकि विश्वभर में व्याप्त करप्शन पर निगाह रखती हैं

बैंकिंग व्यवस्था का लूटा जाना बेहद संगीन

स्कैम, घोटाला, फ्रॉड्स- ये सब जीवन का ऐसा अनचाहा पहलू बन गए हैं कि आए दिन इनके बारे में पढ़ने व सुनने को मिलता है।

‘प्रधानमंत्री की परीक्षा पर चर्चा’ क्या 2019 की चुनावी परीक्षा की तैयारी ? 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दो घण्टे छात्रों से बातचीत की, जिसका प्रारूप ‘मन की बात’ सा ही था। डिजिटल ताकत के बलबूते पर पूरे देश के स्कूलों तथा कालेज के छात्रों को इंटरनेट, टेलीविजन, नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप्प और माई.गोव प्लेटफार्म के जरिये वीडियो कान्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री जी 

नयी पीढ़ी की नई प्रवृत्तियां

बदलते दौर में उपभोग प्रवृत्तियों में तो बदलाव देखा ही जा रहा है, बचत करने के तरीकों तथा बचत के उद्देश्यों में भी परिवर्तन देखा जा सकता है।

आधार में सुधार

अपने पास आधार कार्ड का होना उतना ही जरूरी हो गया है, जितना शरीर में श्वास का चलना।

जमीन में सकूनों की तलाश है, मालिक तेरा बंदा क्यूं उदास है?

एकाकीपन और खुशी दोनों शब्दों पर आज इतनी चर्चा हो रही है कि जहां सरकारें ‘मिनिस्टरी ऑफ हैपिनैस’ बना रही हैं, वहीं यू.के. में डिप्रेशन से लड़ने के लिए मंत्रालय खोला जा रहा है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘खुशी’ से सम्बन्धित कोर्स में पढ़ाई करने के इच्छुक लोगों की कतार लग गई। दिल्ली सरकार ने भी स्कूलों में

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