राज-काज

बैंकिंग व्यवस्था का लूटा जाना बेहद संगीन

स्कैम, घोटाला, फ्रॉड्स- ये सब जीवन का ऐसा अनचाहा पहलू बन गए हैं कि आए दिन इनके बारे में पढ़ने व सुनने को मिलता है।

‘प्रधानमंत्री की परीक्षा पर चर्चा’ क्या 2019 की चुनावी परीक्षा की तैयारी ? 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दो घण्टे छात्रों से बातचीत की, जिसका प्रारूप ‘मन की बात’ सा ही था। डिजिटल ताकत के बलबूते पर पूरे देश के स्कूलों तथा कालेज के छात्रों को इंटरनेट, टेलीविजन, नरेन्द्र मोदी मोबाइल एप्प और माई.गोव प्लेटफार्म के जरिये वीडियो कान्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की गई। प्रधानमंत्री जी 

नयी पीढ़ी की नई प्रवृत्तियां

बदलते दौर में उपभोग प्रवृत्तियों में तो बदलाव देखा ही जा रहा है, बचत करने के तरीकों तथा बचत के उद्देश्यों में भी परिवर्तन देखा जा सकता है।

आधार में सुधार

अपने पास आधार कार्ड का होना उतना ही जरूरी हो गया है, जितना शरीर में श्वास का चलना।

जमीन में सकूनों की तलाश है, मालिक तेरा बंदा क्यूं उदास है?

एकाकीपन और खुशी दोनों शब्दों पर आज इतनी चर्चा हो रही है कि जहां सरकारें ‘मिनिस्टरी ऑफ हैपिनैस’ बना रही हैं, वहीं यू.के. में डिप्रेशन से लड़ने के लिए मंत्रालय खोला जा रहा है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ‘खुशी’ से सम्बन्धित कोर्स में पढ़ाई करने के इच्छुक लोगों की कतार लग गई। दिल्ली सरकार ने भी स्कूलों में

मोदी और राहुलः दोनों सही

डॉ. वेदप्रताप वैदिक:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कांग्रेस के जैसे धुर्रे बिखेरे, वैसे संसद के इतिहास में किसी भी गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री ने नहीं बिखेरे। उसका एक कारण तो यह भी था कि अटलजी के अलावा सभी पूर्व कांग्रेसी थे- मोरारजी, चरणसिंह, विश्वनाथप्रताप सिंह, चंद्रशेखर, देवेगौड़ा, गुजराल आदि और अटलजी गैर-कांग्रेसी होते हुए भी नेहरु और इंदिरा गांधी के प्रशंसक थे और फिर अटलजी पर कांग्रेसी उतने कटु हमले नहीं करते थे, जैसे कि आजकल वे मोदी पर कर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री का जवाब या चुनावी अभियान का बिगुल !

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी उपलब्धियां गिनवाने की बजाय अपने डेढ़ घण्टे के भाषण में केवल गांधी परिवार से लेकर राहुल तक को कोसा तथा वर्तमान में जो भी समस्याएं हैं, उनके लिए कांग्रेस को दोषी ठहराया।

किसान के हितों की अनदेखी

किसान व ग्रामीण अर्थव्यवस्था वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती उभरकर सामने आ रही है। 

बजट किसके सरोकारों का आईना

सरकार का बजट आगामी वर्ष के लिए आय-व्यय के ब्यौरे का आकलन, सोमवार को आर्थिक सर्वेक्षण से शुरू हो कर पूरा सप्ताह छाया रहा। चुनावी साल तथा इस सरकार का अन्तिम बजट हमेशा की तरह नारों और जुमलों से भरपूर रहा। जैसे कि ‘स्वस्थ देश’, ‘सम्पन्न किसान’, ‘नये भारत का सपना’ इत्यादि।

काश विकास और रोजगार दोनों साथ-साथ हों

बाजार गुलजार है, नए बजट का इंतजार है। इससे पहले आर्थिक सर्वेक्षण का यह इजहार है।

सारे चुनाव एक साथ हों

डॉ. वेदप्रताप वैदिक:राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों ने आग्रह किया है कि लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों। यदि ऐसा हो जाए तो नरेंद्र मोदी का नाम भारत के इतिहास में जरुर दर्ज हो सकता है।

अम्मू के आगे बेबस हरियाणा सरकार

पवन कुमार बंसल

गुरुग्राम: तीन दिन से सूरजपाल अम्मू टीवी चैनलों पर भड़काऊ भाषण दे रहे थे, असर ये हुआ कि गुरुग्राम में मासूम स्कूली बच्चों को भी तथाकथित सामाजिक सैनिकों ने निशाना बना लिया। अब जब सुप्रीम कोर्ट तक बात पहुंची तो गुरुग्राम पुलिस ने हलकी धाराओं के तहत अम्मू को गिरफ्तार कर लिया जबकि कल तक उसे सुरक्षा प्रदान की गई थी। समझ से परे है प्रशासन और सरकार का एक्शन। कहीं सरकार अम्मू की उस....

68 साल बाद भी क्या हम मुकम्मल गणतंत्र की तरफ बढ़े हैं?

गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व, आज धूमधाम से मनाया जाएगा, राष्ट्रीय गौरव के इस महत्वपूर्ण दिवस पर उपलब्धियों तथा आने वाले समय की चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। कुछ प्रश्न हर भारतीय के ह्दय में होंगे कि ‘हम क्या थे, क्या हैं, क्या होंगे, अभी आओ विचारें बैठकर समस्याएं सभी’ एक तरफ इकबाल का प्रसिद्ध शेर ‘मिट गये मिस्र, रोम जहां से, कुछ बात ऐसी है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी’ गूंजता है, तो दूसरी तरफ क्या वास्तव

जरूरत है युवा शक्ति को दिशा देने की

जीवन का प्रवाह सतत बहना चाहिए। ‘चलना ही जिंदगी है, रूकना है मौत तेरी’। लेकिन आज चहुं ओर अवरोध, रूकावट, स्थगन देखने को मिलता है।

दिल्ली में चुनावी दंगल अब जरुरी

डॉ. वेदप्रताप वैदिक:आम आदमी पार्टी कितनी भी सफाई पेश करे, कितने भी तर्क प्रस्तुत करे, दुराशय के कितने भी आरोप लगाए, यह तो तय है कि बीसों विधायकों की सदस्यता समाप्त होकर ही रहेगी।

DEMOCRACY LEGISLATURES ELECTIONS & PUBLIC FAITH

How Unique and Matchless is Indian Polity. Though tremendous achievements making developments in all National spheres and International forums, by all its three Wings, are the witnesses, yet much more still needs to be done. Here, I am speaking about two Wings namely, the Legislature and the Executive, specifically about the latter.

सेवानिवृत्ति की उम्र- 58 वर्ष, सीनियर सिटीजन- 60 वर्ष - विसंगति पर मौन क्यूँ?

सेवानिवृत्ति की उम्र सरकारी सेवाआें में क्या हो, यह विवाद का विषय हो सकता है। पर उससे जो विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं, वह चिंतनीय है। केन्द्र सरकार में, सार्वजनिक संस्थानों में, विश्वविद्यालयों में, प्राइवेट संस्थाआें में सब जगह सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष है। केवल कुछ राज्य सरकारों के कर्मचारी 58 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त किए जा रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या, जो इस वर्ष 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो रहा है, कि उसे 30-35 वर्ष की सेवा देने के बाद जो ग्रेच्यूटी तथा अन्य लाभ नकदी में मिलते हैं, वह उसे कहां जमा कराए? क्योंकि बैंक हो या पोस्ट ऑफिस या इंश्योरैंस या वित्तीय संस्थाएं सीनियर सिटीजन की आयु 60 वर्ष के ऊपर को मानती है तथा सभी उसे सीनियर सिटीजन के लाभ ....

भारतीय प्रजातंत्र - चुनाव, चुनाव और चुनाव

प्रजातंत्र में चुनाव बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, पर प्रजातंत्र चुनाव का पर्याय नहीं है। 

आम आदमी के लिए जी.डी.पी. क्या गिरना? क्या बढ़ना?

लगातार गिरता जी.डी.पी. का आंकड़ा चिंता का विषय है पर यह अब इतनी समस्या नहीं दर्शाता जितनी राजनैतिक गलियारों में इसकी गूंज सुनी जाएगी। राहुल गांधी ने तो इसे ‘‘ग्रॉस डिविजन पॉलिटिक्स’’ कहा।

स्कूली शिक्षा में अंग्रेजी की अनिवार्यता

पंजाब तथा उत्तर प्रदेश में स्कूलों में अंग्रेजी को शिक्षा का माध्यम बनाए जाने पर फिर से अंग्रेजी के वर्चस्व तथा हिन्दी या पंजाबी या दूसरी क्षेत्रीय भाषा के गौण करने पर विवाद उत्पन्न हो रहा है।

12
लोकप्रिय ख़बरें
Visitor's Counter :   0039941732
Copyright © 2016 AAR ESS Media, All rights reserved. Website Designed by mozart Infotech