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Dharam Karam

30 अक्तूबर शुक्रवार को करवा चौथ पर पूजा, कथा तथा चंद्रोदय का शुभ समय

October 28, 2015 11:33 AM

चंडीगढ़: कार्तिक कृष्ण पक्ष में करक चतुर्थी अर्थात करवा चैथ का लोकप्रिय व्रत सुहागिन और अविवाहित स्त्रियां पति की मंगल कामना एवं दीर्घायु के लिए निर्जल रखती हैं। इस दिन न केवल चंद्र देवता की पूजा होती है अपितु शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है। इस दिन विवाहित महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए गौरी पूजन का भी विषेश महात्म्य है। आधुनिक युग में चांद से जुड़ा यह पौराणिक पर्व महिला दिवस से कम नहीं है जिसे पति व मंगेतर अपनी अपनी आस्थानुसार मनाते हैं।
क्या है विशेष है इस साल के करवा चौथ में ? क्या नवविवाहितों को करना चाहिए उद्यापन ?
इस वर्ष ,यह व्रत विशेष रुप से फलदायी होगा क्योंकि रोहिणी नक्षत्र, शुक्रवार एवं गणेश चतुर्थी का संयोग इसी दिन है जो ज्योतिशीय दृष्टि से बहुत अच्छा माना जाता है। गणेश जी की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। यही नहीं, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी शुक्र प्रेम का परिचायक है। इस दिन शुक्र ग्रह, मंगल एवं गुरु के साथ हैं जिससे संबंधों में उश्णता रहेगी।

30 अक्तूबर शुक्रवार को करवा चौथ पर पूजा, कथा तथा चंद्रोदय का शुभ समय
शुक्रवार को प्रातः 8.25 तक तृतीया तिथिरहेगी और इसके बाद से चतुर्थी तिथि आरंभ होकर शनिवार की प्रातः 6.26 तक रहेगी।

कथा एवं पूजा का समय-17.32 से 18.50 तक
चंद्र दर्शन ट्राईसिटी चंडीगढ़,पंचकूला व मोहाली- 20.22, अंबाला- 20.25 ,दिल्ली-20.25,
व्रत खोलने का मुहूर्त सायंकाल चांद दिखने पर – 20.30 के बाद होगा।

कैसे करें पारंपरिक व्रत?
प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके पति,पुत्र,पौत्र,पत्नी तथा सुख सौभाग्य की कामना की इच्छा का संकल्प लेकर निर्जल व्रत रखें। शिव,पार्वती, गणेश व कार्तिकेय की प्रतिमा या चित्र का पूजन करें। बाजार में मिलने वाला करवा चौथ का चित्र या कैलेंडर पूजा स्थान पर लगा लें। चंद्रोदय पर अर्घ्य दें। पूजा के बाद तांबे या मिटटी के करवे में चावल, उड़द की दाल भरें। सुहाग की सामग्री,- कंघी,सिंदूर, चूडि़यां, रिबन, रुपए आदि रखकर दान करें। सास के चरण छूकर आशीर्वाद लें और फल, फूल, मेवा, बायन, मिष्ठान, बायना, सुहाग सामग्री,14पूरियां, खीर आदि उन्हें भेंट करें। विवाह के प्रथम वर्श तो यह परंपरा सास के लिए अवश्य निभाई जाती है। इससे सास- बहू के रिश्ते और मजबूत होते हैं।

क्या है सरगी का वैज्ञानिक आधार ?
व्रत रखने वाली महिलाओं को उनकी सास सूर्योदय से पूर्व सरगी ‘ सदा सुहागन रहो ’ के आशीर्वाद सहित खाने के लिए देती हैं जिसमें फल, मिठाई, मेवे, मटिठ्यां , सेवियां, आलू से बनी कोई सामग्री, पूरी आदि होती है। यह खाद्य सामग्री शरीर को पूरा दिन निर्जल रहने और शारीरिक आवश्यकता को पर्याप्त उर्जा प्रदान करने में सक्षम होती है। फल में छिपा विटामिन युक्त तरल दिन में प्यास से बचाता है। फीकी मट्ठी उर्जा प्रदान करती है और रक्त्चाप बढ़ने नहीं देती। मेवे आने वाली सर्दी को सहने के लिए शारीरिक क्षमता बढ़ाते हैं। मिठाई सास बहू के संबंधों में मधुरता लाने का जहां प्रतीक है, वहीं यह व्रत के कारण शुगर का स्तर घटने नहीं देती जिससे शरीर पूरी क्षमता से कार्य करता है और व्रत बिना जल पिए सफल हो जाता है। यह व्रत शारीरिक व मानसिक परीक्षा है ताकि वैवाहिक जीवन में विशम व विपरीत परिस्थितियों में एक अर्धांगनी, पति का साथ निभा सके। भूखे प्यासे और शांत रहने की कला सीखने का यह भारतीय सभ्यता व संस्कृति में पर्वोंं के माध्यम से अनूठा प्रशिक्षण है। चंद्र सौंदर्य एवं मन का कारक ग्रह है। अतः चंद्रोदय पर व्रत खोलने से मन में शीतलता का संचार होता है और सोलह श्रृंगार किए पत्नी देख कर कुरुपता में भी सौंदर्य बोध होता है।

चंद्र राषि एवं सामथ्र्य अनुसार क्या दें उपहार और किस रंग की पहनें ड्रैस इस पर्व पर ?
1.मेष : उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें । ड्रैस : लाल गोल्डन साड़ी या सूट या लंहगा ।
2.वृष : उपहार: डायमंड या चांदी का अलंकरण । ड्रैस : लाल व सिल्वर साड़ी या सूट।
3.मिथुनः उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें । ड्रैस : हरी बंधेज साड़ी या सूट, हरी – लाल चूडि़यां।
4.कर्कः उपहार:चांदी का गहना दें । ड्रैस : लाल सफेद साड़ी या सूट, मल्टी कलर चूडि़यां।
5.सिंहः उपहार:गोल्डन वाच दें । ड्रैस : लाल , संतरी, गुलाबी ,गोल्डन साड़ी या सूट।
6.कन्याः उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें । ड्रैस : लाल हरी गोल्डन साड़ी या सूट।
7.तुलाः उपहार:कास्मैटिक्स दें । ड्रैस : लाल सिल्वर गोल्डन साड़ी,लहंगा या सूट।
8.वृशिचक: उपहार:विद्युत या इलेक्ट्र्निक उपकरण दें । ड्रैस : लाल ,मैरुन ,गोल्डन साड़ी या सूट।
9.धनुः उपहार:पिन्नी या पीला पतीसा ,लडडू दें । ड्रैस : लाल गोल्डन साड़ी या सूट व 9 रंग की चूडि़यां।
10.मकरः उपहार:विवाह की ग्रुप फोटो ग्रे फ्रेम में गीफट करें । ड्रैस : इलैक्ट्र्कि ब्लू साड़ी या सूट।
11. कुंभः उपहार:हैंड बैग, ड्राई फ्रूट,चाकलेट दें । ड्रैस : नेवी ब्लू व सिल्वर कलर की मिक्स साड़ी या सूट।
12.मीनः उपहार:राजस्थानी थाली में कोई गोल्ड आयटम और ड्राई फ्रूट । ड्रैस: लाल गोल्डन साड़ी या सूट।

करवा चौथ एक राष्ट्रीय पर्व के तौर पर वेलेंटाईन डे के रुप में मनाया जाना चाहिए?
बदलते परिवेष में पति भी व्रत रखते हैं। आज इस व्रत को सफल व खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना की विचार धारा को सम्मुख रख कर किया जा रहा है। अब यह व्रत न केवल पत्नी की समर्पण भावना को इंगित करता है अपितु आपसी संबंधों में सामंजस्य, तारातम्य स्थापित करने तथा आपसी रिश्तों की गर्माहट को बरकरार रखने के लिए किया जा रहा है। यही नहीं , जब बहू, सास के चरण स्पर्श करती है और माता स्वरुप सास उसे आशीर्वाद देती है तो आपसी खटास पिघलने लगती है। सास बहू के रिश्ते और स्नेह और मजबूत हो जाते हैं। यही नहीं, दो परिवार जब आपस में उपहारों का आदान प्रदान बायने के रुप में करते है तो कई गलतफहमियां दूर हो जाती है। रिश्ते सुरक्षित हो जाते है। कई परिवार दहेज के झूठे केसों से बच जाते हैं। आपसी झगड़े कोर्ट या मीडिया में उछलने से बच जाते हैं। अतः आज के समाज में करवा चौथ एक राष्ट्रीय पर्व के तौर पर वेलेंटाईन डे के रुप में मनाया जाना चाहिए।
आज नए जमाने में कुछ उक्तियां पुरानी पड़ रही हैं। पहले कहा जाता था कि पत्नियां ,पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं परंतु आज विषेशतः युवा वर्ग भावी या वर्तमान पत्नियों के कल्याण एवं सुरक्षित जीवन के लिए करवा चैथ का व्रत रख रहे हंै। इस नए बदलाव से और एकल परिवार के कांसेप्ट से युवा पीढ़ी में दांपत्य जीवन की डोर और सुदृढ़ हुई है। वैसे कई प्रौढ़ आज भी मौजूद हैं जो अपने युवा जीवन से पत्नी के प्रति समर्पित थे और आज भी व्रत की परंपरा निभा रहे हैं। करवा चैथ का व्रत अब धार्मिक आस्था का आयोजन ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर का त्योहार बन गया है जिसमें होटल, माॅल, सिनेमा, उपहार, ग्रीटिंग कार्ड, मेंहदी ,साड़ी, ज्यूलरी , पार्लर ,कासमेटिक्स, जैसा कार्पोरेट वर्ग भी इसका हिस्सा बन गया है।

दांपत्य जीवन में आई दरार को दूर करने या वैवाहिक जीवन को और आनंदमय बनाने के करवा चौथ पर विशेष उपाय
यदि आपके वैवाहिक जीवन में कुछ परेशानियां हैं या ‘पति -पत्नी के मध्य किसी वो ’ के आगमन से विस्फोटक स्थिति बन गई है तो इस करवा चौथ के अवसर पर हमारे ये प्रयोग करने से न चूकें। ये उपाय सरल ,सफल अहिंसक एवं सात्विक हैं जिससे किसी को षारीरिक नुक्सान नहीं पहुंचेगा और आपके दांपत्य जीवन में मधुरता भी लौट आएगी।

जीवन साथी का सानिध्य पाने के लिए, एक लाल कागज पर अपना व जीवन साथी का नाम सुनहरे पैन से लिखें । एक लाल रेशमी कपड़े में दो गोमती चक्र, 50 ग्राम पीली सरसों तथा यह कागज मोड़ कर एक पोटली की तरह बांध लें। इस पोटली को कपड़ों वाली अलमारी में कहीं छिपा कर करवा चैथ पर रख दें। अगले करवा पर इसे प्रवाहित कर दें।
यदि पति या पत्नी का ध्यान कहीं और आकर्शित हो गया हो तो आप जमुनिया नग ‘ परपल एमीथीस्ट’ 10 से 15 रत्ती के मध्य चांदी या सोने के लाॅकेट में बनवा कर, शुद्धि के बाद करवा चौथ पर धारण कर लें।
यदि आप अपने जीवन साथी से किसी अन्य के कारण उपेक्षित हैं तो करवा चैथ के दिन 5 बेसन के लडडू, आटे के चीनी में गूंधे 5 पेड़े, 5 केले, 250 ग्राम चने की भीगी दाल, किसी ऐसी एक से अधिक गायों को खिलाएं जिनका बछड़ा उनका दूध पीता हो। करवा चौथ पर इस समस्या को दूर करने के लिए अपने इष्ट से विनय भी करें।
यदि पति या पत्नी के विवाहेत्तर संबधों की आशंका हो तो एक पीपल के सूखे पत्ते या भोजपत्र पर ‘उसका’ नाम लिखें । किसी थाली में इस पत्र पर तीन टिक्कियां कपूर की रख कर जला दें और इस संबंध विच्छेद की प्रार्थना करें।

संचार व्यवस्था की सुविधा से पति -पत्नी की दूरियां केवल बहुत कम हो गई हैं। इंटरनेट, वीडियो कांफ्रेंसिंग, वीडियो फोन , मोबाइल आदि ने दूर रहते हुए भी करवा चौथ का व्रत करने और अपने चांद को देखने में विषेश भूमिका निभाई है। पौराणिकता और आधुनिकता का बहुत अनूठा संगम बन गया है करवा चौथ का पर्व जो वास्तविक रुप से वूमैन डे कहलाने लगा है।
आपकी क्या राय है क्या सरकार को इसे ‘भारतीय महिला दिवस ’ या वेलेंटाइन डे की तर्ज पर ‘प्रेम दिवस ’ का रुप देकर अवकाश घोषित करना चहिए?

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