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हरियाणा में सीएम विंडो पर हुआ कमाल,मुख्यमन्त्री से की मुख्यमन्त्री की शिकायत

January 06, 2015 10:50 PM

हरियाणा के मौजूदा मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश की जनता को घर बैठे ही रोजमर्रा की समस्याओं से छुटकारा दिलाने के लिएपिछले दिनों ही सीएम विंडो की शुरुआत की।परन्तु हरियाणा की जनता का भी कोई जवाब नहीं। झज्जर निवासी राम कुमार ने मुख्यमन्त्री की इस स्कीम का भरपूर फायदा उठाते हुए बड़े सलीके से मुख्यमन्त्री मनोहर लाल खट्टर की कार्यशैली की सराहना करते हुए अपनी शिकायत में पूर्व हुड्डा सरकार के निजी स्वार्थ में लिए गए गलत फैसलों को वर्तमान सरकार द्वारा न बदलने पर अपना रोष व्यक्त किया लगता है।सीएम विंडो पर दी गई शिकायत की कॉपी ......

 

 

सेवा में,

 

                                             मुख्यमंत्री महोदय,

 

हरियाणा सरकार,

 

चण्डीगढ।

 

 

 

विषयः- एक नागरिक की जनप्रिय मुख्यमंत्री को जनहित की शिकायत।

 

श्रीमान जी,

 

                                 मैं आपकी (श्री मनोहर लाल खट्टर की) शिकायत आपसे (मुख्यमंत्री महोदय) से करने की गुस्ताखी कर रहा हूॅं कि आपने पूर्ववर्ती हुड़डा सरकार द्वारा लिये फैसलों की समीक्षा कर गैर जरूरी फैसलों को पलटने की धोषणा की थी। परन्तु अब तक आपने केवल तीन फैसलों, कर्मचारियों की रिटायरमैन्ट 58 साल से 60 साल, कर्मचारियों को पंजाब वेतनमान व बुढापा पेशंन को ही पलटा जिससे लगभग 10-12 लाख परिवार प्रभावित हुये हैं। परन्तु हुड़डा सरकार के उन फैसलों पर जिनका अनुचित लाभ कुछ ही चुनिदा लोगों और वर्गो को जनता के खजाने से एसों आराम करने का इतंजाम किया उन फैसलों को पलटना तो दूर, उन पर विचार ही नही किया। जिनके बारे में हरियाणा की जनता की तरफ से आपको शिकायत दर्ज करवा रहा हूॅं।

 

1.            श्री भूपेंद्र सिंह हुड़डा को अपने निजी स्वार्थ के लिए भूतपूर्व मुख्यमंत्री के लिए ताउम्र के लिए मंत्री का दर्जा व मंत्री के तौर पर मिलने वाली सभी सुविधाओं समेत देने फैसला स्वयं भूतपूर्व होने से पहले मंत्री मण्डल से पास करवा लिया। इस फैसले का मतलब है कि जो व्यक्ति एक बार मुख्यमंत्री की शपथ ले लेगा वह जनता के खर्चे पर कुर्सी समेत स्वर्ग को जायेगा। एक मंत्री के तौर पर 20-25 कर्मचारियों के अमले के साथ चण्डीगढ़ में कोठी व गाड़ी की सुविधाएँ बगैर किसी काम के गंगा जी में उसके फूल डालने तक मिलती रहेगी। एक भूतपूर्व मुख्यमंत्री 22 साल तक आपने घर पर आराम कर रहे थे। उन्हें किसी तरह की सुविधा व सुरक्षा की जरूरत महसुस नहीं हुई लेकिन यह फैसला होते ही वह भी सुरक्षा के घेरे में बुढापे में परिवार से अलग चण्ढीगढ़ पहुँचा दिये। अब लगता है इस फैसले को कोई भी आने वाला मुख्यमंत्री नही बदलेगा क्योकि इसमें उनका भी जनता के खर्चाे पर स्वर्ग का टिकट बुक है। आप जैसे जनभावनाओं की कदर करने वाले सादगी पसन्द व्यक्ति से जनता को आशा थी कि आप इस गलत निर्लज फैसले को पलटने का साहस दिखाएगे, परन्तु लगता है कि आप भी लालच में आ गये।

 

2.            पूर्ववर्ती सरकार ने मंत्रियों की पत्नियों के लिए सरकारी गाडी देने का प्रावधान कर रखा हैं। नियमानुसार सरकारी वाहन का प्रयोग केवल सरकारी काम के लिए ही किया जा सकता हैं। जबकि मंत्रियों की पत्नियों के पास सरकारी काम तो हैं नही। व्यक्तिगत कार्यो के लिए सरकारी वाहन का प्रयोग भ्रष्टाचार की परिभाषा में आता हैं। जनहित में इस फैसले को तुरन्त पलटा जाना चहिए।

 

3.            पूर्ववर्ती सरकारों ने मंत्रियो व विधायको की आय पर लगने वाला आयकर सरकारी खजाने से देने का प्रावधान कर रखा हैं। "नानी खसम करे दोहता दंड भरे’’ वाली कहावत को चरितार्थ करने वाला फैसला शायद ही किसी विधी विधान में मिले। हरियाणा जैसे समृद्द राज्य का मुख्यमंत्री, मंत्री व विधायक अगर अपनी आय पर आयकर अदा करने की सामर्थ नही रखते तो इस समृद्द राज्य की जनता की तौहीन है। आपसे हरियाणा की जनता आशा करती हैं कि आप इस फैसले को पलट कर ईमानदारी का उदाहरण पैश करेगें।

 

4.            आपकी व्यक्तिगत समारोहों में शरीक न होने की धोषणा का जनता में बहुत अच्छा संदेश गया हैं परन्तु यह फैसला आप अपने साथी मंत्रियों पर भी लागु करे तो यह हरियाणा की राजनीति में एक ‘मील का पत्थर’’ साबित होगा। आमतौर पर मंत्रियों का ज्यादा समय शादियों  व कुआ पुजन समारोहो की शोभा बढाने में व्यतीत होता है। व्यक्तिगत समारोहो में सरकारी गाडी और अमले का प्रयोग नियमानुसार नही किया जा सकता परन्तु हमारे मंत्रिगण कही भी जाये व कुछ भी करे उनको सरकारी कार्य समझा जाता है। यह गलत हैं। अगर व्यक्तिगत समारोहो में मंत्रिगण जायँ तो अपनी गाड़ी लेकर जायँ। सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल सरकारी कार्य के लिए ही हो।

 

5.            आपने अपनी सुरक्षा में कटौती कर स्वागत योग्य कदम उठाया हैं परन्तु मंत्रियों की गाडियों के आगे व पीछे कमाडों समेत पुलिस जिप्सी सड़क पर दौड़ती हैं तो जनता को असुविधा भी होती हैं और जनता पर अनावश्यक आर्थिक बौझ पड़ता हैं। इस ताम-जाम को जनहित मेें कम किया जाये।

 

6.            पूर्ववर्ती सरकार के दौरान चण्डीगढ़ सचिवालय में एक काहवत थी कि यह ‘सरकार हुडडों की और बुड्डों की सै’’। हुडडा जी तो चले गए परन्तु बुड्या ने जनता का लहु पीने के लिए छोड़ गए। श्री भूपेंद्र सिंह हुडडा जी कि अधोषित नीति थी कि कोई भी अधिकारी कर्मचारी जिनकी उन तक पहुँच है वह रिटायर होकर घर न बैठे सेवा विस्तार ले ले या सेवा निवृत होकर सभी लाभ लेकर पुनर्नियुक्ति पर अपनी पसन्द की जगह किसी कार्यालय, संस्था या आयोगों में ले ले। उनके चहते अधिकारी की रिटायरमैंट की कोई उमर नही थी। इस नीति के तहत बहुत सी सरकारी संस्थाओं का स्वरूप ही बदल गया। महामहीम राज्यपाल के ए0डी0सी0 जैसे महत्वपूर्ण पद जिस पर आई0पी0एस0 के एस0एस0पी0 रैंक के अधिकारी कि नियुक्ति होती है। उस पर पिछले कुछ साल से एक सेवा निवृत हरियाणा पुलिस के डी0एस0पी0 रैंक के अधिकारी को सेवा विस्तार पर बतौर ए0डी0सी0कार्यरत हैं। यह पद आई0पी0एस0 का कैडर पद है परन्तु पूर्व मुख्यमंत्री की नजदीकियों के कारण भारत सरकार के नियमों की उल्लंघना  कर हरियाणा पुलिस के अधिकारी को सेवा विस्तार पर नियुक्ति दे रखी हैं।

 

  हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा) गुड़गांव में संस्थान के महान निदेशक समेत 65 साल से 82साल तक की आयु के 21 अधिकारी जिनमे से कुछ को सुनाई देना भी बन्द हो गया हैं कार्यरत हैं। प्रदेश के अधिकारी प्रशिक्षण के लिए इस संस्थान में जाते हैं तो यह प्रशिक्षण संस्थान न लगकर वृदाआश्रम लगता हैं।

 

 

 

 

जनभावनाओं की कदर करते हुए उपरोक्त  जनहित की शिकायतों पर विचार करने की आशा करते हुए मैं भविष्य में भी जनहित के विषय आपके सम्मुख रखता रहुँगा।

 

                                                                                                                        आपकी भवदीय

 

राम कुमार पुत्र फकीर चन्द निवासी गांव दुलिना तह0व जिला झज्जर। फोन नं0 9991522270

 

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