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Haryana

GURGAON-8 गांवों में 242 एकड़ में उजाड़ डाली अरावली

February 21, 2020 06:01 AM

COURTESY NBT FEB 21

मामले सामने आए पर कार्रवाई नहीं हुई
टीसीपी व वन विभाग की जांच रिपोर्ट में खुलासा

8 गांवों में 242 एकड़ में उजाड़ डाली अरावली

 

जंगल में डाल रहे थे तेजाब, रोका तो हुई हाथापाई

• वस, फरीदाबाद : गुरूवार को पाली गांव इलाके में अरावली के अंदर सेप्टिक टैंक की सहायता से तेजाब का पानी डाला जा रहा था। एनवायरनमेंट एक्टिविस्ट जितेंद्र भड़ाना ने जब इसका विरोध किया तो टैंक चालक ने अपने कुछ साथियों को बुला कर एक्टिविस्ट के साथ हाथापाई की। आरोप है कि ये टैंक चालक कई साल से तेजाब का पानी यहां डाल रहे हैं।
अरावली
इन गांवों में हुआ वन क्षेत्र को नुकसान


गांव कुल वन क्षेत्र कितना उजड़ा

एकड़ में एकड़ में

मानेसर 322.7 6.25

शिकोहपुर 133.6 6.375

रिठौज 172.06 33.475

कासन 275.30 26.925

सकतपुर 169.02 4.5

भौंडसी 1189.25 149.9

खेड़ला 260.12 2.5

अभयपुर 506.07 15.25


पीएलपीए जमीन पर बिना परमिशन कितने निर्माण हुए हैं/ यह निर्माण किस तरह के हैं/ इसे लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी। इसे मुख्यालय में भेज दिया गया है।

-अमरीक सिंह, एसटीपी, टीसीपी डिपार्टमेंट• मानेसर में अरावली उजाड़ने को लेकर गत 13 फरवरी को एनजीटी में सुनवाई थी। इसमें चीफ सेक्रेटरी ने माना कि 1834 वर्ग मीटर एरिया में अरावली को पुलिस लाइन निर्माण के लिए उजाड़ा है। एनजीटी को बताया कि पुलिस ने यह जानबूझकर नहीं किया है। अब इस जमीन का प्रारूप बदलने की कार्रवाई की जा रही है।• भोंडसी में 59 एकड़ में अरावली उजाड़ने पर पुलिस विभाग पर 31.33 करोड़ रुपये का जुर्माना एनजीटी ने किया है। करीब 5000 पेड़ों की बलि पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण के लिए चढ़ाई गई है। जुर्माना राशि के साथ-साथ एनजीटी ने यह भी पूछा है कि किस अधिकारी के आदेश पर अरावली उजाड़ी गई। इस मामले की अगली सुनवाई अब 10 अप्रैल को है।• पिछले दि नों गांव घाटा में एक धार्मिक स्थल के विस्तार को लेकर सैकड़ों पेड़ों की बिना अनुमति कटाई होने का मामला सामने आया था। पर्यावरणविदों ने इस सिलसिले में वन विभाग को शिकायत दी थी, लेकिन अभी इस सिलसिले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। • रायसीना में अवैध रूप से बने करीब 200 फार्महाउस का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में विचाराधीन है। चीफ सेक्रेटरी की तरफ से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टीसीपी डिपार्टमेंट को आदेश दिए हैं कि अरावली पर्वत श्रृंखला में बने इन फार्महाउस के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने के लिए हारसेक की मदद ली जाए।• एनबीटी न्यूज, गुड़गांव

 

एक तरफ शहर प्रदूषण की समस्या से जूझता रहता है, दूसरी ओर वन के लिए आरक्षित जमीन को धीरे-धीरे समतल बनाया जा रहा है। यहां कॉलेज, कैंप, गॉल्फ कोर्स, बिल्डिंग्स, फार्महाउस वगैरह बनाए जा रहे हैं। हाल ही में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट और वन विभाग की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शहर के 8 गांवों में बिना अनुमति 242 एकड़ में वन क्षेत्र को उजाड़ा जा चुका है। पंजाब भू परीक्षण विधेयक (पीएलपीए एक्ट) के तहत यह जमीन वन के लिए आरक्षित है, लेकिन यहां अब भी व्यवसायिक और धार्मिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हरियाणा सरकार की तरफ से यह रिपोर्ट तैयार करवाई गई है, जिसे सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित सेंट्रल एंपावर्ड कमिटी के समक्ष रखा जाएगा। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मानेसर, शिकोहपुर, रिठौज, कासन, सकतपुर, भौंडसी, खेड़ला और अभयपुर में वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। इसमें मौजूदा समय में इंडियन ऑयल कैंपस, कॉलेज निर्माण के लिए चारदीवारी, झुग्गियां, गॉल्फ कोर्स, हाउस एंड फार्मिंग, सीआरपीएफ कैंप, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, जेल, आश्रम, प्राइवेट बिल्डिंग्स, फार्महाउस, एडवेंचर कैंप, टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स बने हैं।

सुप्रीम कोर्ट में साल 1995 में दायर हुई थी याचिका : सुप्रीम कोर्ट में साल 1995 में वन क्षेत्र के बचाव को लेकर याचिका दायर हुई थी। अब इस याचिका में पिछले साल अक्टूबर में बंधुआ मुक्ति मोर्चा की तरफ से अपील फाइल की है। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एंपावर्ड कमिटी ने हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

3.6 प्रतिशत जमीन ही आती है PLPA के अंतर्गत : हरियाणा में वन क्षेत्र मात्र 3.6 प्रतिशत है। पीएलपीए एक्ट के तहत यह क्षेत्र वन के लिए आरक्षित है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण नहीं किया जा सकता है।

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