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कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 78 लाख करोड़ का नुकसान संभव

February 21, 2020 05:30 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR FEB 21

कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था को 78 लाख करोड़ का नुकसान संभव
दुनिया की बड़ी कंपनियां भी प्रभावित
चीन में फैला कोरोनावायरस अगर नियंत्रित नहीं होता है तो इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को 78 लाख करोड़ रुपए (1.1 ट्रिलियन डॉलर) का नुकसान हो सकता है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने आशंका जताई है कि इसके महामारी का रूप लेने की स्थिति में इस साल वैश्विक विकास दर 1.3% कम रह सकती है। हालांकि चीन में इसके फैलने की रफ्तार धीमी हुई है लेकिन खतरा बरकरार है। डन एंड ब्रैडस्ट्रीट ने भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि, चीन से शुरू हुए कोरोनावायरस के संक्रमण का असर जून के बाद भी बना रहा, तो वैश्विक आर्थिक वृद्धि करीब एक फीसदी नीचे आ सकती है। चीन में करीब 2.2 करोड़ कंपनियां यानी चीन की आर्थिक गतिविधियों का 90 फीसदी उन क्षेत्रों में ही स्थित है, जहां वायरस के संक्रमण का अधिक असर है। रिपोर्ट के मुताबिक कोरोनावायरस के संक्रमण का चीन की अर्थव्यवस्था के साथ साथ बड़ी कंपनियों पर भी नकारात्मक असर दिखने लगा है।
चीन की जीडीपी ग्रोथ की रफ्तार 6 फीसदी से घटकर 5.4 फीसदी रह सकती है
{ जगुआर लैंड रोवर ने कहा, उसके ब्रिटिश फैक्ट्री में सिर्फ अगले सप्ताह तक का ऑटो पार्ट्स बचा है। जगुआर की बिक्री 23% चीन में होती है।
{फ्रांस के केएलएम एयरलाइंस को 1.55 हजार करोड़ रु. नुकसान की बात कही है। ऑस्ट्रेलिया के क्वांटस को 1 हजार करोड़ का नुकसान।
{एपल ने कहा, वह इस तिमाही के रेवेन्यू टारगेट को प्राप्त नहीं कर पाएगी। आपूर्ति बाधित होने और चीन में मांग में कमी से वह लक्ष्य से पीछे रह जाएगी।
फार्मास्युटिकल {साल 2018-19 में भारत का एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) और बल्क ड्रग आयात 25,552 करोड़ रुपए था, जिसमें 68% हिस्सा चीन का है। बीते तीन साल में फार्मा सेक्टर में भारत की चीन के ऊपर निर्भरता 23% बढ़ी है। एपीआई पर लो-प्रॉफिट मार्जिन के कारण भारतीय फार्मा इंडस्ट्री एपीआई का आयात कर यहां दवा बनाकर दूसरे देशों को निर्यात करती है। अमेरिकी बाजार को ड्रग्स आपूर्ति करने वाली 12% मैन्युफैक्चरिंग साइट्स भारत में हैं। भारतीय कंपनियों के पास सिर्फ फरवरी तक के लिए स्टॉक है।
स्मार्टफोन {भारत अपने इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का 6-8% चीन को निर्यात करता है जबकि अपनी जरूरतों का 50-60% चीन से आयात करता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि चीन में कंपोनेंट फैक्ट्रियों के बंद होने से जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान स्मार्टफोन की बिक्री में 10-15% की गिरावट आ सकती है।
ऑटो मैन्युफैक्चरिंग {भारत के ऑटो कंपोनेंट की जरूरत का 10 से 30% आयात चीन से होता है। इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में यह दो से तीन गुना अधिक हो जाता है। ऐसे में चीन में तैयार कल-पुर्जों की कमी से भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को प्रोडक्शन घटाना पड़ेगा। फिच ने 2020 में भारत में ऑटो मैन्युफैक्चरिंग में 8.3% गिरावट की आशंका जताई है।
स्टील-आयरन {भारत ने चीन से साल 2018-19 में 12,165 करोड़ रु. का आयात और 2,230 करोड़ का निर्यात किया था। बाहर माल न जा पाने से चीन में स्टील का स्टॉक और घरेलू कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। सेल और टाटा स्टील सहित भारत की चार बड़ी स्टील कंपनियां इससे प्रभावित हो रही हैं।
भारत कितना प्रभावित {फरवरी अंत तक स्थिति नहीं सुधरी तो हालात बिगड़ेंगे
कोरोनावायरस से वैश्विक अर्थव्यवस्था और चीन कैसे व कितना प्रभावित हो रहे इसे 2003 में चीन में फैले सार्स वायरस से तुलना करके समझ सकते हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक सार्स वायरस से लगभग 8000 लोग इन्फेक्टेड थे और 800 लोग पूरी दुनिया में मरे थे। चीन की विकास दर साल 2003 में 0.5% से 1% तक कम हो गई थी। वैश्विक अर्थव्यवस्था को 40 बिलियन डॉलर ( 2.8 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ था। सार्स के फैलने के समय चीन दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी और वैश्विक जीडीपी में उसका योगदान केवल 4.2 प्रतिशत था। अब चीन दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है। ग्लोबल जीडीपी में उसका योगदान 16.3%फीसदी है। कोरोनावायरस से अब तक 20 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 74 हजार से ज्यादा लोग इन्फेक्टेड हो चुके हैं। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमी के अनुसार चीन का विकास अनुमान 6% से कम होकर 5.4% या उससे कम हो सकता है।
सार्स से 8000 लोग संक्रमित हुए तो 2.8 लाख करोड़ का नुकसान
चीन में अगर कंपनियों का शटडाउन जल्दी खत्म हो गया तो भारत को ज्यादा नुकसान नहीं होगा। अगर शटडाउन लंबा चला तो भारत काफी प्रभावित होगा। अप्रैल से दिसंबर 2019 के बीच भारत ने चीन से 3.73 लाख करोड़ रुपए (52 बिलियन डॉलर) का आयात किया था। कच्चा माल और मेटेरियल के चलते स्टील, ऑयल एंड गैस, फार्मा, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, आईटी सर्विस और केमिकल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इसके अलावा भारत मोबाइल हैंडसेट, टीवी सेट और कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के मामले में चीन पर निर्भर है। भारत ने इस अवधि में चीन को 93 हजार करोड़ रुपए (13 बिलियन) का निर्यात किया था। लिहाजा निर्यात सेक्टर की कंपनियां दाम और सप्लाई चेन की वजह से संकट में फंस जाएगी।
भास्कर एनालििसस**
चीन की 90% आर्थिक गतिविधियां उन इलाकों में हैं जहां कोरोनावायरस का प्रकोप सबसे ज्यादा
ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने अनुमान व्यक्त किया है कि वैश्विक विकास दर 1.3% कम हो सकती है *

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