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Haryana

PANCHKULA - एमआर ओपीडी में डॉक्टरों के साथ बैठकर कार्ड पर लिख रहे वो दवाई जो बनती ही नहीं

February 19, 2020 05:37 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR FEB 19

एमआर ओपीडी में डॉक्टरों के साथ बैठकर कार्ड पर लिख रहे वो दवाई जो बनती ही नहींमार्केट से ब्रांडेड दवाइयां खरीदवाने के लिए मरीजों से वापस करवा रहे जेनरिक दवाइयां

एक तरफ हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज मरीजों को दवाइयां अस्पताल से ही दिलवाने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में छापे मार रहे है। दूसरी ओर पंचकूला के जनरल अस्पताल के हालात ऐसे है कि यहां पर डॉक्टरों की ओपीडी में खुद मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) बैठ कर मरीजों को ब्रांडेड दवाइयां खरीदने के लिए कार्ड दे रहे है।
हैरानी की बात ये है कि मरीज अपना इलाज करवाने के लिए सुबह 6 बजे से ही अस्पताल में पहुंचने के लिए घर से चलते हैं। ये मरीज कार्ड बनवाकर घंटों ओपीडी की लाइनों में लगे रहते हैं, लेकिन सुबह 9.30 बजे ही डॉक्टरों की ओपीडी के बाहर मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव मंडराने लगते हैं और मौका देखते ही ओपीडी के अंदर डॉक्टर के साथ बैठ जाते हैं। इसके बाद तो मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ही कई मरीजों को अपनी कंपनी की दवाइयां लेने के लिए बोल देते हैं। वहीं, अब पीएमओ डॉ. सरिता यादव ने भी इस मामले में संज्ञान लेने की बात कही है।
नियमों की धज्जियां उड़ा रहे मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव, अनिल विज को कंप्लेंट: सुबह 9.30 बजे के करीब 5-6 एमआर अस्पताल में आते है। इनमें एक महिला मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव है। सभी अपनी-अपनी कंपनी की बुक लेकर मरीजों के बीच ही डॉक्टर के रूम में घुस जाते हैं। डॉक्टरों को बुक दिखाते हैं और उन्हें अपना कार्ड देते हैं।
मेडिसन के साल्ट के बारे में बताते हैं और जो नई मेडिसन कंपनी की ओर से मार्केट में आती है उस मेडिसिन को मरीजों को प्रेफर करने के लिए कहते हैं। कुछ मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव ने डॉक्टरों के साथ इतनी अच्छी सेटिंग बना रखी है कि ओपीडी में ही बैठ कर वो मरीजों को दवाइयां लिख देते हैं। इस पूरे मामले को लेकर सिटीजन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसके नैय्यर ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को लेटर लिखा है। उन्हें बताया कि अस्पताल में किस तरह डॉक्टरों की ओपीडी में एमआर मरीजों को दवाइयां लिख रहे हैं।
फार्मेसी में 625 एमजी की दवाई, डॉक्टर ने लिख दी 6000 एमजी
32 साल की सरोज कुछ दिन पहले अपने इलाज के लिए सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल गई। ओपीडी में चेकअप के बाद डॉक्टर ने उन्हें कुछ दवाइयां लिखी है, जिसमें एंटी बायोटिक मेडिसन कैप्सूल अमोक्सिसिल्लिन 6000 एमजी, डाइक्लोपैरा, ओमीप्राजोल भी लिखी। जब फार्मेसी में सरोज मेडिसिन लेने गई तो उन्हें बताया गया कि उनके पास अमोक्सिसिल्लिन 625 एमजी है। इसके बाद वह मार्केट में केमिस्ट के पास गए तो वहां बताया कि अमोक्सिसिल्लिन 6 हजार आती ही नहीं। बाद में परेशान होकर मरीज इस मामले की शिकायत के लिए पीएमओ ऑफिस भी गई, लेकिन वहां कंप्लेंट ही नहीं ली गई।
डेली 4-5 मरीज डॉक्टर के कहने पर मेडिसन कर रहे वापस
हमारे पास डेली 4 से 5 मरीज ऐसे आ रहे है जो डॉक्टर के कहने पर जेनरिक मेडिसिन वापिस कर रहे है। मरीज पहले हमारे यहां से जेनरिक मेडिसन लेकर तो जाते है, लेकिन डॉक्टर को दिखाने के बाद वो मरीज सभी दवाइयां वापिस कर गए और बोलने लगे कि डॉक्टर ने ये दवाइयां लेने से मना कर दिया। इसके अलावा जबकि, जन औषधी को खोलने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ही काम किया जा रहा है और अस्पताल में कुछ डॉक्टर जेनरिक दवाइयों को लेने से मरीजों को मना कर रहे है।
- अनिल, जन औषधी संचालक।
जेनरिक दवाई नहीं चलेगी, वापस करके इस ब्रांड की लो: डॉक्टर
27 साल की सन्नो मंगलवार को सेक्टर 6 के जनरल अस्पताल में अपना इलाज करवाने आई थी। यहां पर डॉक्टर ने जो दवाइयां कार्ड पर लिखी थी उनमें से कुछ दवाइयां फार्मेसी में नहीं मिली। मार्केट में जन औषधी से दवाइयां लेकर जब डॉक्टर को दिखाई तो उन्होंने इन दवाइयों को लेने से मना कर दिया और एक ब्रांड का नाम बताया और उस ब्रांड की दवाई लेकर आने के लिए कहा। सन्नाे अंबाला की रहने वाली है।
डॉक्टर के साथ बैठे युवक ने अन्य ब्रांड की दवाई लेने को कहा
सेक्टर-12 के जसबीर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले उनकी तबियत खराब हो गई थी। पहले उन्होंने इमरजेंसी में चेकअप करवाया और उसके बाद उन्हें आेपीडी में भेज दिया। यहां पर पहले डॉक्टर ने कार्ड पर दवाइयां लिखी और उसके बाद उनके साथ एक लड़का बैठा था, जिसने एक कार्ड दिया और उस कंपनी की दवाई लेने के लिए कहा। उसके बाद मैने बाहर से नहीं फार्मेसी से ही वो दवाई ली।
ओपीडी में एमआर बर्दाश्त से बाहर है, कड़ा एक्शन होगा
अस्पताल में जो ओपीडी है, उसमें अगर एमआर आकर बैठ रहे हैं तो ये काफी गंभीर मुद्दा है। अस्पताल में तो कोई एमआर आ भी नहीं सकता। मैं खुद मंगलवार को ओपीडी में चेकिंग करने गई थी, तो उस वक्त मुझे कोई नहीं मिला। डॉक्टर किसी एमआर को ओपीडी में नहीं बैठा सकता और न कि मरीजों को किसी ब्रांड की दवाई लेने के लिए बोल सकता। इस मामले में मैं स्ट्रिक्ट एक्शन लूंगी और अगर किसी ओपीडी या ओपीडी के बाहर चेकिंग में एमआर मिलेगा तो उस पर जरूर कार्रवाई होगी।
- डॉ. सरिता यादव, पीएमओ, जनरल अस्पताल।

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