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यूपी के हिस्से से हरियाणा को मिल सकती है 5643 एकड़ जमीन

December 07, 2019 06:06 AM

COURTESY DAINIKBHASKAR DEC 7
44 साल पुराने दो प्रदेशों के सबसे बड़े भूमि विवाद का दो दर्जन हत्याओं और 6723 मीटिंग के बाद अब होगा समाधान, यूपी के हिस्से से हरियाणा को मिल सकती है 5643 एकड़ जमीन
यमुना की धारा से उपजा विवाद . पानीपत, करनाल, सोनीपत, यमुनानगर, फरीदाबाद व पलवल के किसान वर्षों से लड़ रहे हैं यूपी के किसानों से हक की लड़ाई

यमुना किनारे हरियाणा के छह और यूपी के चार जिलों के बीच चल रहा सबसे बड़ा 9265 एकड़ का जमीन विवाद 44 साल बाद समाधान की ओर है। 246 किमी. में फैले हरियाणा के यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, फरीदाबाद व पलवल और यूपी के बागपत, शामली, सहारनपुर व गाजियाबाद जिले की सीमा के करीब 146 गांव इससे प्रभावित हैं। अब तक इस विवाद में हुईं दर्जनों हिंसक झड़पों में 1395 लोग घायल हो चुके हैं और 24 जानें जा चुकी हैं। 267 लोगों पर एफआईआर दर्ज हैं। कोर्ट में दो हजार से अधिक केस चल रहे हैं। इनसे करीब 40 हजार लोग प्रभावित हैं। विवाद सुलझाने के लिए हुईं 6723 मीटिंगें के बाद जमीन पर पैमाइश की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। 25 फरवरी तक पिलर लगा कर सीमा नए सिरे से सीमा तय कर ली जाएगी। जून 2020 तक विवाद सुलझाया जाना है। उम्मीद है कि यूपी के कब्जे से हरियाणा के सोनीपत को करीब 1500 एकड़, पानीपत को 1253, करनाल को 950, यमुनानगर को 350 एकड़, फरीदाबाद को 820 एकड़ और पलवल को 770 एकड़ जमीन मिल सकती है। ऐसे ही यूपी के जिलों को करीब 3622 एकड़ जमीन मिलने की उम्मीद है। दरअसल, 1966 में राज्य बनने के साथ ही हरियाणा और यूपी में यमुना की सीमा को लेकर विवाद था। फरवरी 1974 में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज उमाशंकर दीक्षित की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई। सर्वे ऑफ इंडिया ने नवंबर 1974 और जनवरी 1975 के बीच यमुना की मुख्य धारा तय की। इसके आधार पर सीमा का निर्धारण हुआ, जिसे दीक्षित अवाॅर्ड नाम दिया गया। यमुना की मुख्य धारा की पहचान की गई, जो दोनों प्रदेश के बीच सीमा मानी गई। मुख्य धारा के दोनों ओर पिलर गाड़े गए, जिन्हें मेन या रेफरेंस पिलर कहा गया। सीमा तो तय हुई लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया गया। समय के साथ यमुना की धारा बदलती रही और जमीन का विवाद बढ़ने लगा। लोगों में झगड़े होने लगे। झड़पों के बाद फसल काटने के लिए हत्याएं होने लगी। अब 44 साल बाद उसी दीक्षित कमेटी की पैमाइश के मुताबिक यमुना के किनारे दोनों राज्यों की सीमा में फरवरी तक पिलर लगाए जाएंगे, ताकि नए सिरे से मालिकाना हक स्पष्ट हाे सके और विवादों का अंत हो।
1974 में हुए सर्वे के अनुसार फरवरी के अंत तक पिलर लगा कर तय होगी सीमा
विवाद 1974 से अब तक
विवाद तो 1966 का है, पर 1974 में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज उमाशंकर दीक्षित की कमेटी की सिफारिश पर यमुना के किनारे पत्थर लगा कर सीमा तय की गई थी।
सीमा की दोनों राज्यों ने निगरानी नहीं की। पत्थरों को लोगों व खनन माफियाओं ने उखाड़ दिया। नदी की धारा बदली और विवाद गहरा गया।
कुछ ही सालों में बिजाई और फसल काटने को लेकर मारपीट, फायरिंग का दौर शुरू हो गया।
दोनों राज्यों की अदालतों में 2 हजार से ज्यादा केस चल रहे हैं।
अब ये प्रक्रिया व डेड लाइन
25 फरवरी तक दीक्षित अवाॅर्ड के तहत खंबे लगाकर सीमा तय होगी।
15 मार्च तक अफसर सजरा प्लान तैयार कर राजस्व रिकॉर्ड ठीक करेंगे।
15 मार्च से 15 अप्रैल तक किसानों से आपत्ति व दावे लिए जाएंगे।
25 अप्रैल तक कमेटी निर्णय करेगी कि कौन-सी जमीन किसकी है।
30 जून तक अफसर सरकारों को समाधान की रिपोर्ट सौंपेंगे।
रिपोर्ट पर सरकार निर्णय लेगी कि विभागीय स्तर पर समाधान हो या कोर्ट में याचिका लगा कर अंतिम हल किया जाए।
ये है विवादों की जमीन पर फसल
अवैध खनन से बढ़ा विवाद, 5 हजार करोड़ का नुकसान
हरियाणा की 246 किमी लंबी यमुना की सीमा पर बसे 146 गांवों से रिपोर्ट में सामने आया है कि विवाद का बड़ा कारण अवैध खनन है। कैग ने भी माना है कि खनन ने नदी की धारा बदल दी है। इससे 5 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है।
सोनीपत-बागापत के बीच केएमपी से ली गई तस्वीर।
एक्सपर्ट उठा रहे सवाल, बता रहे कैसे हो समाधान
1. पिलर लगाना समाधन नहीं, लगातार निगरानी होनी चाहिए।
2. अवैध खनन पर रोक लगे।
3. दोनों राज्य नई सीमा के अनुसार लैंड रिकाॅर्ड सुधारें।
4. गलत रजिस्ट्री की त्रुटियां दूर हों।
5. नए लैंड रिकाॅर्ड के अनुसार कोर्ट से दोनों सरकारें मिलकर मुकदमे खत्म कराएं।
6. बिल लाए केंद्र : केंद्र सरकार नए सिरे से बिल लाकर दोनों राज्यों के बीच चल रहे जमीनी विवाद को समाप्त कर सकती है।
- वीएस बठला, पूर्व डीआरओ पानीपत
जानिए, ग्राउंड की दर्द बतातीं दो राज्यों की दो कहानियां
पानीपत: जमीन के लिए गांव छोड़ा, नदी के पार बसना पड़ा
मिर्जापुर के किसान हरिसिंह बताते हैं कि जमीन विवाद के कारण गांव छोड़ना पड़ा। फसल की बिजाई हम करते और उधर के किसान उसे काट लेते। कई बार मारपीट हो चुकी थी। ऐसे में करीब 20 परिवारों को गांव छोड़ यमुना के दूसरी तरफ रहीमपुर खेड़ी गांव बनाकर बसना पड़ा। बच्चाें को स्कूल जाने व हमें राशन लाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है।
पेज 2 पर पढ़िए छह जिलों की ग्राउंड रिपोर्ट
कैग ने रिपोर्ट में माना...
विवादों के लिए अवैध खनन बड़ा कारण, क्योंकि इसने बदली नदी की धारा और बढ़े विवाद
शामली: हिंसा में पिता खोया तो बेचनी पड़ी 16 बीघा जमीन
शामली के मवी गांव के रमेश के पिता भंवर सिंह की 5 मई 2017 को रिशपुर में जमीनी हिंसा में मौत हो गई थी। पुलिस ने जमीन विवाद के चलते हत्या का केस भी दर्ज नहीं किया। पिता की हत्या के बाद यमुना पार पानीपत की ओर स्थित 16 बीघा विवादित जमीन औने-पौने दाम में बेचनी पड़ी, जबकि मेरी 13 बीघा जमीन पर अब भी रिशपुर वालों का कब्जा है।

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