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Haryana

HARYANA- पानीपत का एक गांव ऐसा भी, जहां टीवी देखने की मनाही; सरपंच ने चुनावी वादा निभाने को पंचायत भवन में पहला टीवी लगवाया, पर चलवा नहीं पाए

November 21, 2019 06:18 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR NOV 21

पानीपत का एक गांव ऐसा भी, जहां टीवी देखने की मनाही; सरपंच ने चुनावी वादा निभाने को पंचायत भवन में पहला टीवी लगवाया, पर चलवा नहीं पाए
 : टेलीविजन दिवस पर विशेष: जलालपुर-2 गांव में कुल 4 टीवी, बच्चों पर गलत असर पड़ने की बात कहकर 3 बंद कराए

अाज विश्व टेलीविजन दिवस है। पहले ब्लैक एंड वाइट, फिर रंगीन टेलीविजन अाए अाैर अब लाेग एलसीडी से एलईडी व स्मार्ट टीवी के दाैर अा में अाए, लेकिन पानीपत का मुस्लिम बाहुल्य जलालपुर-2 एक एेसा गांव है, जहां अाज भी टीवी देखना गलत माना जाता है। गांव के 150 घराें में िसर्फ 4 टीवी हैं। माैजिज व्यक्तियाें ने 3 घराें में यह कहकर टीवी बंद करा दिए कि युवा बिगड़ते हैं अाैर हमारे इस्लाम में इसे इजाजत नहीं है। 2015 में सरपंच के चुनाव हुए ताे प्रत्याशी मजाहिर ने वादा कि वह चुनाव जीता ताे गांव में पहला टीवी लाएगा। वह चुनाव जीता अाैर पंचायत भवन में टीवी भी लगवाया, लेकिन कुछ दिन बाद बंद करा दिया गया। अब टीवी जिस बाॅक्स में अाया था, उसी में बंद कर सरपंच परिवार ने कमरे की रेक पर रख दिया। अब सिर्फ अांगनबाड़ी वर्कर अाबीदा के घर में टीवी चलता है। अाबीदा कहती है कि टीवी ताे सिर्फ मंनाेरंजन और सूचनाएं लेने का साधन है। इससे काेई बिगड़ता नहीं है। सिर्फ साेच का फर्क है।
ये गांव के लिए मिसाल है, लेकिन गांव में हाेता है विराेध : गांव की अांगनबाड़ी वर्कर अाबीदा गांव में अकेली एेसी महिला है, जाे 10वीं तक पढ़ी है। अाबीदा ने बताया कि उसकी शादी 2000 में हुई थी, तब वाे 9वीं कक्षा में थी, शादी हाेने के बाद वापस घर जाकर 10वीं की परीक्षा दी अाैर पास हुई। 2006 में अांगनबाड़ी में नाैकरी लगी थी। 2009 में सबसे पहले उसने ही गांव के बाहर स्कूल में अपने बच्चाें काे पढ़ने भेजा। 2014 के चुनाव से पहले टीवी भी ले अाए थे, लेकिन छुप-छुपकर देखते थे। अब भी कभी-कभार ही देखते हैं।
सबसे बड़ा कारण एजुकेशन नहीं : गांव में एक भी व्यक्ति सरकारी नाैकरी पर नहीं है अाैर न किसी ने काॅलेज की पढ़ाई की है। गांव में 5वीं तक स्कूल है। इसमें मात्र 70-80 बच्चे जाते हैं। इनमें लड़कियां सिर्फ 4 हैं। 5वीं के बाद बच्चे ज्यादा पढ़ते भी नहीं है। दूसरा बड़ा कारण है कि गांव के बुजुर्ग लाेग मानते हैं इस्लाम में टीवी, फाेटाे काे हराम माना जाता है। इसलिए वाे इसका प्रयाेग नहीं करते।
सिर्फ अांगनबाड़ी वर्कर के घर में चलता है टीवी, कहती है ये सिर्फ मनाेरंजन का साधन
बुजुर्ग बोले- युवा तो मोबाइल में ही सबकुछ देख लेते हैं
मुस्लिस बाहुल्य गांव में 150 घर हैं। 2015 में सरंपची के चुनाव में मजाहीर जीते। वादे के अनुसार गांव में पहला एलईडी टीवी पंचायत के लिए लाए। पंचायत भवन में इसे लगाया तो न्यूज देखी। सरपंच के पिता कहते हैं कि गांव के माैजिज लोगों ने यह कहकर टीवी बंद करा दिया कि इससे बच्चे बिगड़ते हैं अाैर यह इस्लाम धर्म के खिलाफ है। दबाव में टीवी बंद करना पड़ा। इससे पहले 2009 के पूर्व सरपंच का

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