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Haryana

HARYANA-राइस मिलों में 10 साल में 500 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, रिकवरी हो नहीं रही, अब नया घोटाला आया सामने

November 21, 2019 06:17 AM


COURTESY DAINIK BHASKAR NOV 21

फर्जी जे फॉर्म व नमी के नाम पर धान खरीद में घोटाला, 835 मिलर्स पर संदेह, आज से फिजिकल वेरिफिकेशन
राइस मिलों में 10 साल में 500 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, रिकवरी हो नहीं रही, अब नया घोटाला आया सामने
सीएम-डिप्टी सीएम ने की बैठक, कई मिल पर लगाए ताले, कई पर पुलिस तैनात

प्रदेश में पिछले 10 सालों में धान के नाम पर राइस मिलर्स नई-नई फर्में बनाकर घोटाला कर रहे हैं। सिर्फ 4 जिलों में ही 50 से ज्यादा मिलर्स 500 करोड़ से ज्यादा का घोटाला कर चुके हैं। इसकी अब तक पूरी तरह रिकवरी भी नहीं हो पाई है। लेकिन अब नए तरीके का धान घोटाला सामने आया है। इसमें सिर्फ करनाल, कैथल, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर के 835 राइस मिलर्स संदेह के दायरे में हैं। जिन्होनें जे-फाॅर्म (खरीद बिल) व नमी के नाम पर बड़ा घोटाला किया हुआ है। इस भनक लगते ही सरकार एक्शन में आ गई है। बुधवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग संभाल रहे डिप्टी सीएम दुष्यंत ने सीएम मनोहर लाल के साथ बैठक की। इसके बाद सभी मिलों में फिजिकल वेरिफिकेशन के आदेश दिए गए हैं। अधिकारियों को गहनता से जांच कराने को कहा है। बुधवार को टीमों ने जाकर मिलर्स को जरूरी निर्देश दिए और कई जगह ताले भी लगा दिए। कई जगह पुलिस का पहरा भी लगा दिया है। अब गुरुवार से इन मिलों में टीमें वेरिफिकेशन शुरू करेंगी। इसके बाद पता चलेगा कि सीजन में कितने करोड़ का घोटाला हुआ है।
भास्कर रिपोर्ट: पढ़िए...धान खरीद में कैसे-कैसे किया जा रहा घोटाला
चावल पूरा नहीं देते, नए नाम से फर्म बना दूसरी जगह से काम करने लगते हैं
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, हैफेड, वेयर हाउस एजेंसियों के माध्यम से सरकार पीआर धान खरीदकर मिलिंग के लिए प्राइवेट राइस मिलर्स को अलॉट करती है। राइस मिलर्स को इसके बदले 10 रु. क्विंटल मिलिंग, 1 रुपए क्विंटल सुखाई, 5 रुपए प्रति कटटा बारदाने का किराया व 3 रु. क्विंटल अन्य खर्चा दिया जाता है। मिलर्स को धान के वजन का 67% चावल 31 मार्च तक वापस एफसीआई को देना होता है। लेकिन काफी मिलर्स धान तो ले लेते हैं, लेकिन चावल पूरा नहीं देते। जब जांच और रिकवरी आती है तो कोर्ट में केस चलता रहता है। इसके बाद मिलर्स नए नाम से फर्म बनाकर दूसरी जगह से काम शुरू कर देते हैं। इसमें विभाग के अधिकारियों से लेकर कई नेताओं तक के नाम सामने आ रहे हैं। इसलिए जांच सिर्फ नाम के लिए होती है।
करनाल
मिलों को सीसीटीवी चलते रहने के निर्देश
प्रदेश की राइस मिलों में धान का फिजिकल वेरिफिकेशन होगा। सबसे ज्यादा संदेह करनाल के 300, कुरुक्षेत्र के 238, यमुनानगर के 162 व कैथल के 135 मिलर्स पर हैं। वेरिफिकेशन के लिए टीमें बना दी हैं। बुधवार को टीमें मिलों में गईं व सीसीटीवी चलते रहने के निर्देश दिए। कई पर ताले लगाए गए। कई जगह पुलिस तैनात की है।
कुरुक्षेत्र
कई राइस मिल पर ताले लगा दिए गए हैं। जबकि कई मिलों के बाहर पुलिस भी तैनात कर दी है।
इस सीजन में घोटाले के 2 नए तरीके
1. नमी: पीआर धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1835 रुपए क्विंटल था। लेकिन आढ़तियों व खरीद एजेंसियों के अधिकारियों व राइस मिलर्स ने मिलकर किसानों को धान में नमी बताकर 1600 से 1700 रु. क्विंटल में खरीद लिया। जबकि इन्होंने जे-फाॅर्म में 1835 रु. क्विंटल का रेट भरकर दिया और सरकार से पूरा पैसा ले लिया। इससे किसानों काे बड़ा नुकसान हुआ।
प्रदेश की मंडियों में अब तक 70.63 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की आवक हो चुकी है। इसी से संदेह भी हो रहा है, क्योंकि इतना ज्यादा धान आने की उम्मीद नहीं थी। इस संदर्भ में सीएम व डिप्टी सीएम के पास शिकायत पहुंची थी।
फर्मों पर केस भी दर्ज हुए, कोर्ट में केस चल रहे
10 साल में अकेले 4 जिलों में ही 500 करोड़ से ज्यादा का घोटाला सामने आ चुका है। सबसे ज्यादा करनाल में 25 मिलर्स पर 4.56 लाख क्विंटल धान का 300 करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है। वहीं, कुरुक्षेत्र में 15 फर्मों पर करीब 100 करोड़, यमुनानगर में 3 फर्मों पर ही 76 करोड़ तो कैथल में 9 फर्मों पर 34 करोड़ की रिकवरी बाकी है। इन फर्मों पर केस दर्ज हैं, लेकिन कोर्ट में तारीख लगती रहती हैं और रिकवरी हो नहीं रही।
इन वजहों से हुआ संदेह
2. जे-फाॅर्म : धान की फर्जी खरीद दिखा राइस मिलर्स ने सरकार से पूरा पैसा ले लिया। इसके लिए फर्जी जे-फाॅर्म व गेट पास काटे जाते हैं। जिन राइस मिलर्स ने ऐसा किया, अब वे उस पैसे से यूपी, बिहार व प. बंगाल से घटिया स्तर का चावल कम रेट में मंगवाकर एफसीआई को सप्लाई कर रहे हैं। राशन डिपो के चावल का रेट 2 रु. किलो है। मिलीभगत के चलते अफसर चावल की क्वालिटी पर सवाल नहीं उठाते।
करनाल के मिलर्स ने असंध, इंद्री, तरावड़ी में जाकर भारी मात्रा में खरीद की हुई दिखाई है। जबकि पीआर धान स्थानीय मंडी से मिल जाता है। जिन मिलों को 7 हजार मीट्रिक टन धान आवंटित की जानी थी, उन्हें 11 से 12 हजार मीट्रिक टन तक आवंटित क

 
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