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Haryana

HARYANA-जबरन रिटायर करने के विरोध में उतरी कर्मचारी यूनियन

October 15, 2019 06:00 AM

COURTESY NBT OCT 15

विशेष संवाददाता, चंडीगढ़: हरियाणा के कर्मचारी और सरकार एक बार फिर एक दूसरे के सामने आ गए हैं। प्रदेश के कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग की अगुवाई कर रहे सर्वकर्मचारी संघ का आरोप है कि सरकार ने एक आदेश जारी कर 50-55 साल की उम्र या 25 साल की नौकरी वाले कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने के आदेश जारी कर दिए हैं। संघ ने इस फैसले की निंदा की है और इसका तीखा विरोध करने का ऐलान किया है। विरोध का क्या स्वरूप होगा, इसका निर्णय जल्द होने वाली राज्य कार्यकारिणी की मीटिंग में किया जाएगा।

संघ ने बीजेपी पर 2014 में जारी धोषणा पत्र में कर्मचारियों से किए पंजाब के समान वेतनमान देने, 15 हजार रुपये न्यूनतम वेतन देने, सफाई कर्मचारियों और गेस्ट टीचरों सहित कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, छठे वेतन आयोग की सिफारिशों की विसंगतियों को दूर करने के वादों पर अमल न करने का भी आरोप लगाया है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष लाम्बा और महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि प्रदेश में 21 अक्टूबर को होने जा रहे विधानसभा चुनावों के बीच ही सत्ता के नशे में चूर प्रदेश की बीजेपी सरकार ने सभी बिजली निगमों सहित, सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने के बारे में आदेश जारी किया है। सरकार ने ऐसा करके प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के मान सम्मान को ललकारा है। जिससे कर्मचारियों और उनके परिजनों में सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा हो गया है। जिसका कर्मचारी एकजुटता के साथ उचित समय पर माकूल जवाब देंगे। सरकार ने पहले तो कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने के वायदे पर विधानसभा में रेगुलराइजेशन बिल पास करने का संघ से वायदा किया। बिल के ड्राफ्ट की कॉपी संघ को देकर सुझाव भी मांगे गए। लेकिन, विधानसभा का सत्र चलने से एक दिन पहले ही रात को नाटकीय अंदाज में सरकार बिल पास करने से ही मुकर गई। इसी प्रकार पंजाब के समान वेतनमान के वायदे पर जहां पहले समीक्षा की बात कही गई और बाद में मुख्यमंत्री ने मांग का चैप्टर ही क्लोज करने का ऐलान कर दिया। यही नहीं, सरकार जनवरी, 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम में शामिल करने से भी साफ मुकर गई।

‘कर्मचारी विरोधी रहा कार्यकाल’

लाम्बा ने बताया कि बीजेपी सरकार का अब तक का कार्यकाल कर्मचारी विरोधी ही रहा है। मांग को पूरी करना तो दूर की बात, कर्मचारियों को सरकार से लाठी, आंसू गैस, झूठे मुकदमे और जेल ही मिली है। प्रदेश में बीजेपी ने 2014 में सरकार बनाते ही सबसे पहले रिटायरमेंट की उम्र यह कह कर कम कर दी थी कि इससे बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। लेकिन, सरकार के ही आंकड़ों के अनुसार 5 साल में केवल 75 हजार को नौकरी मिली है, जबकि वायदे के मुताबिक हर साल 2 लाख नौकरी देने की बात थी।

 
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