Thursday, November 21, 2019
Follow us on
 
National

संशोधित पोक्सो कानून 2019 पूरे देश में लागू ,अब बच्चों से गंभीर बलात्कार के मामलों में फांसी का भी प्रावधान

August 17, 2019 02:07 PM

चंडीगढ़ - मोदी सरकार द्वारा गत दिनों संसद द्वारा लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण कानून , 2012 , जिसे पोक्सो कानून, 2012 कहा जाता है, में संशोधन करके फांसी तक का भी प्रावधान कर दिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि इस माह 5 अगस्त को पोस्को संशोधन कानून, 2019 को भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हो गयी थी एवं कल शुक्रवार 16 अगस्त 2019 को केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक गजट अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में लागू कर दिया है।

ज्ञात रहे की पोक्सो कानून में बच्चे का अर्थ 18 वर्ष की आयु से नीचे का हर व्यक्ति अर्थात लड़की और लड़को दोनों ही शामिल हैं बहरहाल, हेमंत ने ताज़ा पोक्सो संशोधन कानून, 2019 के बारे में बताया कि अब इसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी अर्थात बच्चों सम्बन्धी अश्लील साहित्य को भी परिभाषित किया गया है। इसके अतिरिक्त पोक्सो कानून की धारा 4 में किसी बच्चे का बलात्कार, जिसे हालांकि इस कानून में प्रवेशन लैंगिक हमला कहा जाता है, उसके अंतर्गत न्यूमतम कारावास सात वर्ष से बढ़ाकर दस वर्ष कर दिया गया है। इसी प्रकार इस धारा में एक और उप-धारा 4 (2 ) जोड़कर यह प्रावधान किया गया है कि अगर पीड़ित बच्चे की आयु 16 वर्ष से कम होगी तो न्यूनतम कारावास बीस वर्ष का होगा जो आजीवन कारावास तक तक हो सकता है जिसका अर्थ उस दोषी व्यक्ति का समस्त प्राकृत जीवनकाल होगा अर्थात उसे अपनी मृत्यु तक कारावास में रहना होगा एवं इस धारा में अब दोषी व्यक्ति को मृत्युदंड (फांसी ) की सजा भी दी जा सकती है। इसके अलावा धारा 5 जो गंभीर बलात्कार के मामले से अर्थात गुरुतर प्रवेशन लैंगिक हमले से सम्बंधित है, में मौजूदा परिस्थितियों में दो संशोधन किये गए हैं - पहली अगर ऐसा करते पीड़ित बच्चे की मृत्यु हो जाती है और दूसरे अगर किसी हिंसा अथवा प्राकृतिक विपत्ति के दौरान बच्चो के साथ ऐसा किया जाता है। इसके अलावा धारा 6 में गंभीर बलात्कार के प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए अब न्यूनतम सजा मौजूदा दस वर्ष के कठोर कारवास से बढ़ाकर 20 वर्ष का कठोर कारावास कर दिया गया है जो आजीवन कारावास तक तक हो सकती है जिसका अर्थ उस दोषी व्यक्ति का समस्त प्राकृत जीवनकाल होगा अर्थात उसे अपनी मृत्यु तक कारावास में रहना होगा। इसके अलावा बच्चो के लैंगिक हमले बाबत धारा 9 में यह भी डाल दिया गया है कि अगर कोई किसी बच्चे को शीघ्र लैंगिक परिपक्व करने के लिए उसे किसी प्रकार का कोई मादक द्रव्य, हार्मोनल या रासायनिक पदार्थ देता है। इसके अतिरिक्त पोक्सो एक्ट की धारा 14 में पूर्णतया बदलाव कर प्रावधान किया गया है अगर कोई किसी बच्चे का पोर्नोग्राफी का लिए प्रयोग करेगा को उसे पहले बार पांच वर्ष और दूसरी बार और इसके बाद सात वर्ष और जुर्माने की सजा होगी
इसके अलावा अगर कोई बच्चे की पोर्नोग्राफी के साथ उसके बाद बलात्कार, गंभीर या अन्य रूप में, लैंगिक उत्पीड़न आदि करता है तो व्यक्ति को दोनों धाराओं में अलग अलग सजा मिलेगी। हेमंत ने बताया की इसके अलावा पोक्सो की धारा 15 को पूर्णतया बदलकर प्रावधान किया गया है अगर कोई व्यक्ति अपने मोबाइल, कंप्यूटर आदि में बच्चो की पोर्नोग्राफी सम्बन्धी कुछ भी सामग्री बिना कानूनी कारण के रखता है तो वह अधिकतम तीन वर्ष और जुर्माने और अगर व्यावसायिक अथवा इन्हे आगे साँझा करने के उद्देश्य से प्रयोग करता है वो यह पहली बार दोषी पाए जाने पर न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम पांच वर्ष और दूसरी बार और बाद में न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम सात वर्ष के कारवास से दण्डित किया जाएगा।

 
Have something to say? Post your comment