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हरियाणा कर्मचारी महासंघ की सरकार के साथ बैठक सम्पन्, महासंघ करेगा सभी जिला मुख्यालयों पर जोरदार विरोध प्रदर्शन

July 20, 2019 05:06 PM
हरियाणा कर्मचारी महासंघ की मुख्यमंत्री के साथ लंबी वार्ता हुई। जिसमें मुख्य मांगों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। महासंघ का प्रदेश स्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा की अध्यक्षता में आज मुख्यमंत्री से हरियाणा निवास पर मिला। प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ शर्मा, प्रांतीय महासचिव वीरेन्द्र सिंह धनखड़, वरिष्ठ उपप्रधान बालकुमार शर्मा, मुख्य संगठन सचिव कुलभूषण शर्मा, वित्त सचिव दिलबाग अहलावत, अशोक शर्मा, पहल सिंह तंवर व नरेन्द्र धीमान ने बताया कि बैठक में कर्मचारियों की कुछ मांगों पर सहमति बनी तथा कुछ को बाकी छोड़ दिया गया। जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अब प्रदेश स्तर पर कर्मचारी हर जिले में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला उपायुक्तों के माध्यम से भेजेंगे और अगर सरकार फिर भी नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन किया जायेगा।
कर्मचारी नेताओं ने बताया कि प्रदेश के कर्मचारियों की ज्वलंत व लंबित मांगों में मुख्यत: पुरानी पैंशन नीति बहाल करने, सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को नियुक्ति तिथि से पक्का करने, रिस्की कार्य करने वाले कर्मचारियों को शीघ्र रिस्क भत्ता लागू करने, जनवरी-2016 से देय सातवें पे कमीशन का मकान किराया भत्ता लागू करने, बिना शर्त मैडिकल कैशलेस की सुविधा देने, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पंजाब के समान ओल्ड ऐज अलाऊंस देने, उच्च न्यायालय से प्रभावित कर्मचारियों को आगामी विधानसभा के मॉनसून सत्र में अध्यादेश लाकर पक्का करने, आऊटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत की जाने वाली भर्ती बंद करके नियमानुसार स्थायी व पक्की भर्ती की जाये, राज्य परिवहन की अक्तूबर-2018 में हड़ताल अवधि के दौरान सभी विभागों के कर्मचारियों पर उत्पीडऩ की कार्यवाही समाप्त करते हुए पहले जैसी स्थिति बहाल करना, जनस्वास्थ्य विभाग में जल व मल व्यवस्था को निगमों को सौंपने के फैसले को निरस्त करना, सभी विभागों में रिक्त पड़े पदों पर पदोन्नति करना, परिवहन विभाग में किलोमीटर स्कीम को रद्द करते हुए रोड़वेज बेड़े में प्रतिवर्ष 2000 सरकारी गाडिय़ां बढ़ाना। चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी में पदोन्नति होने उपरान्त टाईप टेस्ट की शर्त हटाने तथा राज्य में जन आवश्यकताओं अनुसार नए पद सभी विभागों में सृजित करना, पुरानी एक्स ग्रेशिया नीति बहाल करना आदि मांगों को पूरा करने बारे सरकार के समक्ष मजबूती के साथ पक्ष रखा गया तथा यह भी स्पष्ट किया गया कि अब की बार भी राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के कर्मचारियों की मांगों को लागू करने में आना-कानी की गई या सरकार द्वारा अब की बार भी औपचारिकता निभाने का ही प्रयास किया गया तो हरियाणा कर्मचारी महासंघ आंदोलन को और तेज करते हुए विधानसभा के मानसून सत्र के अन्दर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विशाल विरोध प्रदर्शन करते हुए उपायुक्तों के माध्यम से मांगो बारे मुख्यमंत्री हरियाणा को मांग पत्र प्रेषित करेंगे। फिर भी सरकार यदि हठधर्मिता का रूख अपनाती है तो केंद्रीय परिषद् की बैठक करके निर्णायक आन्दोलन करने का निर्णय लिया जायेगा। जिसमें प्रदेश की जनता का भी पूर्ण रूप से सहयोग व समर्थन लिया जायेगा।
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