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आईसीजे का फैसला भारत की आधी जीत, जाधव की रिहाई के लिए अभिनंदन जैसी ठोस कार्रवाई की जरूरत

July 18, 2019 02:07 PM

इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने बुधवार को भारतीय नौसेना के रिटायर्ड अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की मिलिट्री कोर्ट की तरफ से सुनाई गई फांसी की सजा पर रोक लगा दी। आईसीजे ने पाकिस्तान को जाधव की सजा पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया है। इस फैसले को जहां दुनियाभर में भारत की जीत के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं पाक सरकार ने भी इसे अपनी कामयाबी बताया। जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीयराजनीति के लिहाज से यह भारत की बड़ी जीत है लेकिन जाधव की रिहाई और उनके सकुशल वापसी होने तक इसे आधी जीत ही माना जाएगा।


एक्सपर्ट: जाधव की रिहाई के लिए अभिनंदन जैसी ठोस कार्रवाई हो

  • सुप्रीम कोर्ट के वकील और संविधान मामलों के जानकार विराग गुप्ता ने बताया कि पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को नकली पासपोर्ट के आधार पर उन्हें भारतीय जासूस साबित करने की कोशिश की, लेकिन भारत की मजबूत पैरवी से उनका दांव उल्टा पड़ गया। आईसीजे ने भारत से सहमति जताते हुए यह माना कि पाक को गिरफ्तारी के वक्त ही यह पता था कि जाधव भारतीय नागरिक हैं। वियना संधि के अनुसार पाक की जिम्मेदारी थी कि उसे भारत को इस बारे में तुरंत सूचित करना था। लेकिन, 3 हफ्ते बाद प्रेस रिलीज से भारत को जाधव की गिरफ्तारी की सूचना मिली। इस आधार पर आईसीजे ने पाक की कार्रवाई को गलत बताया। 
  • विराग बताते हैं कि आईसीजे के फैसले के बाद अब जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस मिलेगा। इसका मतलब है कि भारतीय उच्चायोग के माध्य से जाधव से भारतीय अधिकारी और जाधव के परिजन मुलाकात कर सकते हैं। इससे जाधव के मानवाधिकारों के संरक्षण के साथ उन्हें बेहतर कानूनी सुविधा भी मुहैया कराई जा सकेगी। हालांकि कॉन्सुलर एक्सेस मिलने का यह मतलब कतई नहीं है कि जाधव सकुशल भारत लौट सकेंगे। क्योंकि, उनको वापस लाने के लिए भारत को अभिनंदन की तरह ठोस राजनियक और सामरिक प्रयास करने की जरूरत है।


आईसीजे का फैसला मानने के लिए पाक बाध्य नहीं, लेकिनफांसी भी नहीं दे सकता

  • विराग बताते हैं कि आईसीजे के फैसले के खिलाफ अपील का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देश फैसले के कुछ अंशों की व्याख्या के लिए अर्जी लगा सकते हैं। अगर कोई नया तथ्य हो, तो फैसले के रिव्यू के लिए भी अर्जी लगाई जा सकती है। खबरों के अनुसार, ईरानी सरकार के दस्तावेज भारत के पक्ष को पुख्ता करते हैं। अगर उन दस्तावेजों के आधार पर भारत आईसीजे में रिव्यू फाइल करे तो जाधव की रिहाई के लिए आदेश देने की अपील की जा सकती है।
  • ‘‘आईसीजे का फैसला मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के लिहाज के भारत की बड़ी जीत है और इसका दक्षिण एशिया की राजनीति पर बड़ा असर होगा। हालांकि, पाकिस्तान चाहे तो 'ऑपरेशन सक्सेसफुल, पेशेंट डाइड' वाली कहावत को साबित कर सकता है। इसलिए जाधव की रिहाई और सकुशल वापसी होने तक इस मामले में भारत की जीत अधूरी ही मानी जाएगी। आईसीजे का फैसला पाकिस्तान के लिए बाध्य नहीं है लेकिन इसके बावजूद वहां की सरकार जाधव को फांसी देने का दुस्साहस नहीं कर सकती। हालांकि, पाक इस मामले को अपनी अदालतों में लंबा खींचकर भारत को परेशान कर सकता है।’’


आईसीजे के फैसले के बाद भारत के पास क्या रास्ता है?
वरिष्ठ वकील विराग के मुताबिक, भारत ने इस मामले में पहला राउंड तो जीत लिया है, लेकिन दूसरे राउंड में कामयाबीके लिए उसे आईसीजे के आदेश का पालन करवाने के लिए ठोस पहल करनी होगी। भारतीय विदेश विभाग को इस फैसले के बाद जाधव की रिहाई के लिए पाकसरकार से गुहार लगाना चाहिए।साथ ही भारत को पाक पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की जरूरत है और इसके लिए भारत को वर्ल्ड बैंक, आईएमएफ और अन्य संस्थाओं से मांग करनी चाहिए कि अगर पाक अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन नहीं करता,तो उसकी वित्तीय सहायता रोकी जाए।


आईसीजे के फैसले के अनुसार पाक कैसे रिव्यू करेगा?
आईसीजे ने पाक को जाधव की सजा के फैसले पर रिव्यू करने का आदेश दिया है। इस पर विराग गुप्ता कहते हैं कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च के बाद पाकिस्तान में सैन्य अदालतों को खत्म कर दिया गया है, जिस वजह से जाधव जैसे सैकड़ों लोगों की फांसी पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। भारत, पाकिस्तान से इस मामले के जल्दी निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक ट्रायल के जरिए रिव्यू करने की मांग कर सकता है। इसके साथ ही जाधव के परिजन भी आईसीजे के फैसले के आधार पर पाक की हाईकोर्ट में भी अपील कर सकते हैं। लेकिन, जाधव की रिहाई के लिए पाक की सरकार को सहयोग देना ही होगा। उनका कहना है कि इमरान खान आईसीजे के फैसले पर अमल करके सही मामले में पाक को आधुनिक लोकतांत्रिक देश बनाने की ठोस पहल कर सकते हैं।


‘अब हमारी जिम्मेदारी कि हम कितनी मजबूती से पक्ष रखते हैं’

  • भोपाल स्थित बरकतउल्लाह यूनिवर्सिटी के कानून विभाग की अध्यक्ष डॉ. मोना पुरोहित कहती हैं कि पाक इस मामले को आईसीजे ले जाने को तैयार नहीं था क्योंकि वह जानता था कि सब भारत के पक्ष में हैं। इसके लिए पाक ने दलील दी थी कि वियना संधि का अनुच्छेद-36 एक जासूस के ऊपर लागू नहीं होता, लेकिन आईसीजे ने कहा है कि यह जासूसों पर भी लागू होगा। अनुच्छेद-36 के तहत कॉन्सुलर एक्सेस मिलता है। जाधव पर एफआईआर के बाद जब यह मामला पाक की हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने उनके जासूस होने का सबूत नहीं होने का हवाला देते हुए इसे मिलिट्री कोर्ट को रैफर कर दिया।
  • डॉ. मोना बतातीं हैं कि आईसीजे के फैसले के बाद जाधव को कॉन्सुलर एक्सेस मिलेगा और इससे उन्हें कानूनी सलाह मिलेगी। कॉन्सुलर जाधव की पैरवी करेंगे और उनकी तरफ से तथ्य रखने में मदद करेंगे। हालांकि, अब यह भारत की जिम्मेदारी है कि वह कितनी मजबूती से और अच्छे से अपना पक्ष रखता है क्योंकि जाधव का ट्रायल पाकिस्तान की कोर्ट में ही चलेगा। उनका यह भी कहना है कि इस मामले में अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बहुत बड़ी भूमिका है।
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