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FARIDABAD-5.67 करोड़ से 189 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे, कहीं कूड़ा भरा तो किसी में काला पानी बारिश में कैसे होगा वाटर रिचार्ज

July 18, 2019 06:22 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JULY 18

5.67 करोड़ से 189 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे, कहीं कूड़ा भरा तो किसी में काला पानी
बारिश में कैसे होगा वाटर रिचार्ज

शहर का जलस्तर बनाए रखने के लिए नगर निगम ने 5.67 करोड़ रुपए खर्च कर पूरे शहर में 189 वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए। लेकिन इनकी अनदेखी के कारण किसी में कूड़ा जमा है तो किसी में गाद। खास बात यह है कि नगर निगम न खुद के वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ठीक कर पा रहा है और न ही रेजीडेंशियल एरिया में लगने वाले सिस्टम की मॉनिटरिंग कर रहा है। निगम प्रशासन हरियाणा बिल्डिंग कोड को लागू करा पाने में भी पूरी तरह से नाकाम है। मकान बनने और कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने के बाद किसी भी मकान की जांच नहीं की गई कि वहां लगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम कर रहा है या नहीं। अधिकारी खुद मानते हैं कि निगम द्वारा लगाए गए हार्वेस्टिंग सिस्टम 50 फीसदी से अधिक खराब पड़े हैं। ऐसे में वाटर रिचार्ज कैसे होगा। प्रशासनिक अनदेखी के कारण ही हर साल भूजलस्तर गिर रहा है।
नगर निगम के सीनियर टाउन प्लानर बीएस ढिल्लो के अनुसार रेजीडेंशियल एरिया के लिए हरियाणा बिल्डिंग कोड 2016 के पहले टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, हाउसिंग बोर्ड, नगर परिषद, नगरपालिका, नगर निगम आदि विभागों के अपने अलग अलग बिल्डिंग बॉयलाज हुआ करते थे। लेकिन हरियाणा सरकार ने वर्ष 2017 में बिल्डिंग कोड में संशोधन कर पूरे प्रदेश में एक बिल्डिंग बॉयलॉज बना दिया। उन्होंने बताया कि हरियाणा बिल्डिंग कोड 2017 की धारा 8.1 के अनुसार किसी भी प्लाट में बनने वाले मकान की छत 100 स्क्वायर मीटर है तो वहां हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। खासकर फरीदाबाद, गुड़गांव, पंचकूला, सोनीपत, पानीपत, करनाल, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र में इस पर विशेष जोर है।
फिजिकल वेरिफिकेशन के बाद मिलता कंप्लीशन सर्टिफिकेट
सीनियर टाउन प्लानर का कहना है कि 200 वर्ग गज के मकान का नक्शा तभी पास होता है जब उसमें हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था होती है। उन्होंने बताया कि निगम के जेई और एसडीओ बनने वाले मकानों का भौतिक सत्यापन करते हैं। वह देखते हैं कि उक्त मकान नक्शे के अनुरूप बनाया गया है या नहीं। इसके बाद ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट दिया जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यही नियम सभी सरकारी भवनों पर भी लागू होता है।
नगर निगम खुद मानता है कि 50 फीसदी से अधिक वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम काम नहीं कर रहे, इनके लिए फंड की कोई व्यवस्था नहीं है। हरियाणा बिल्डिंग कोड के तहत रेजीडेंशियल एरिया में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू नहीं करा पा रहा है निगम प्रशासन
िनगम परिसर में लगे हार्वेस्टिंग सिस्टम में कचरा भरा है
कमिश्नर साहिबा...आपकी नाक के नीचे लगे हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई का हाल देख लीजिए, सोचिए उन 189 सिस्टम का क्या हाल होगा जो जल संरक्षण को शहर में लगे हैं
जानकर हैरानी होगी कि जिस निगम मुख्यालय में कमिश्नर, ज्वाइंट कमिश्नर, चीफ इंजीनियर, एसई और इंजीनियरिंग विभाग के एसईएस, एसडीओ और जेई खुद बैठते हैं। उसी परिसर में लगे हार्वेस्टिंग सिस्टम की हालत चिंताजनक है। यहां लगे हार्वेस्टिंग सिस्टम में काला पानी जमा है। कूड़े कचरे से भरा पड़ा है। आसपास साफ सफाई का बुरा हाल है। कागजों में तो हार्वेस्टिंग सिस्टम ओके हैं। लेकिन हकीकत कुछ और है। ऐसे में सवाल है कि जब निगम प्रशासन खुद अपने दफ्तर में लगे सिस्टम की देखभाल नहीं कर पा रहा है तो अन्य सिस्टम का हाल क्या होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
ढाई से तीन लाख में लगता है हार्वेस्टिंग सिस्टम | नगर निगम के पूर्व एसई अनिल मेहता का कहना है कि 200 वर्ग गज के मकान में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने में ढाई से तीन लाख रुपए खर्च आता है। केवल सिस्टम बनाकर छोड़ देने से कोई फायदा नहीं होता। हर साल बारिश शुरू होने से पहले मेंटिनेंस जरूरी है। एक बारिश के दौरान सिस्टम में जाने वाले पानी से फिल्टर चोक हो जाते हैं। फिल्टर की हर साल सफाई होना अनिवार्य है। हार्वेस्टिंग सिस्टम के काम न करने के कारण ही फरीदाबाद में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। यदि ये काम करते तो इतना जलस्तर नहीं गिरता। निगम के फाइनेंस अधिकारी विशाल कौशिक के अनुसार इसके लिए कोई अलग से बजट का प्रावधान नहीं है। निगम के वाटर सप्लाई के बजट से ही खर्च होता है।
लापरवाही: मानसून सिर पर है आैर आप कह रही हैं-
हम अभियान चलाएंगे
जल शक्ति अभियान के तहत सरकार की ओर से हार्वेस्टिंग सिस्टम फुलप्रूफ करने के कुछ निर्देश मिले हैं। निगम द्वारा लगाए गए हार्वेस्टिंग सिस्टमों की जांच की जाएगी और उनकी साफ सफाई कराई जाएगी। इसके अलावा रेजीडेंशियल एरिया में हार्वेस्टिंग को लेकर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। जहां कमियां मिलेंगी उन्हें ठीक कराया जाएगा। -अनीता यादव, निगम कमिश्नर
और ये हुआ 3 सालों में
2016 के बाद नहीं बनाया एक भी सिस्टम
नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार एनआईटी, बल्लभगढ़, फरीदाबाद, बड़खल और तिगांव विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर कुल 189 हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए गए। मार्च 2016 के पहले कुल 148 हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे थे। बाद में 41 हार्वेस्टिंग सिस्टम जून 2016 में लगाए गए। इसके बाद आज तक एक भी हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाया गया। जो 189 सिस्टम लगे हैं उनकी ही मेंटिनेंस नहीं हो पा रही है। निगम के पूर्व एसई डॉ. राम प्रकाश का कहना है कि अधिकांश सिस्टम की हालत ठीक नहीं

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