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Haryana

HARYANA-बैंकों में गलत एंट्री, बीमा कंपनियों की लापरवाही से प्रदेश में 3 साल से 5631 किसानों का क्लेम अटका

June 24, 2019 06:03 AM


COURTESY DAINIK BHASKAR JUNE 24

बैंकों में गलत एंट्री, बीमा कंपनियों की लापरवाही से प्रदेश में 3 साल से 5631 किसानों का क्लेम अटका
फसल बीमा से किसानों का मोहभंग : धान-गेहूं का बीमा कराने से पीछे हट रहे लोग
हरियाणा में धान फसल बीमा का एरिया दो साल में 3.42 फीसदी घटा

सुशील भार्गव | राजधनी हरियाणा
हरियाणा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रति किसानों का मोह कम हो रहा है, क्योंकि वर्ष 2016 से अब तक किसानों के करीब 5631 केस पेंडिंग हैं। विभाग के पास कुल 8434 शिकायतें फसल बीमा से संबंधित आई हैं। इनमें से 2777 केस ऐसे पेंडिंग हैं, जिनमें बैंकों द्वारा गलत एंट्री की गई हैं, जबकि 2854 केस ऐसे हैं जो बीमा कंपनियों के स्तर पर पेंडिंग हैं। किसानों के लिए अच्छी बात यही है कि 2803 केसों का निपटारा करा दिया गया है। शेष केसों का निपटारा करने के लिए जिला स्तर की मॉनीटरिंग कमेटियों को एक माह का समय दिया गया है।
प्रदेश में करीब 30 लाख हेक्टेयर में फसल होती है। वर्ष 2018 में धान में किसानों ने महज 38 फीसदी एरिया में खड़ी फसल का ही बीमा कराया, जो वर्ष 2017 के मुकाबले 3.42 फीसदी कम रहा। अब कृषि विभाग कबड्डी, कुश्ती व खो-खो जैसे खेलों को अपनाकर किसानों को फसल बीमा के प्रति जागरूक करने का प्रयास भी कर रहा है। सभी डीसी को कहा गया कि उनके यहां जो भी केस पेंडिंग हैं, उनका जल्द से जल्द निपटारा कराया जाए। ताकि किसानों को फसल बीमा का लाभ मिल सके।
गेहूं का बीमा कराने में भी कतरा रहे प्रदेश के 16.17 लाख किसान परिवार
खरीफ सीजन में घटा फसल बीमा एरिया
वर्ष 2017 में हरियाणा में 14.22 लाख हेक्टेयर में धान फसल की रोपाई की गई, इसमें से 5.89 लाख हेक्टेयर यानी 41.42 फीसदी एरिया ही फसल बीमा के तहत आया, जबकि वर्ष 2018 में प्रदेश में 14.47 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई हुई। इसमें से 5.50 लाख हेक्टेयर में ही किसानों ने फसल बीमा कराया, जो कुल एरिया का 38 फीसदी रह गया। यानी एक साल में धान सीजन में किसानों ने 3.42 फीसदी कम एरिया का बीमा कराया।
प्रदेश में बाजरे का एरिया बढ़ा, गेहूं और जौ की फसल पर भी कम ध्यान
वर्ष 2017 में प्रदेश में 4.27 लाख हेक्टेयर में बाजरे की बिजाई की गई, इसमें से 0.67 लाख हेक्टेयर एरिया का बीमा हुआ, जो कुल एरिया का 14.05 फीसदी था, जबकि वर्ष 2018 में 4.24 लाख हेक्टेयर फसल में से 0.68 लाख हेक्टेयर फसल का बीमा हुआ। यह कुल फसल का 16.03 फीसदी था। यानी करीब दो फीसदी फसल अधिक बीमा के तहत कवर हुई। किसानों का गेहूं और जौ फसल के बीमा पर भी कम ध्यान है। वर्ष 2017-18 में प्रदेश में 25.65 लाख हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की गई, इसमें से महज 8.66 लाख हेक्टेयर फसल बीमा के तहत कवर हुई, जो कुल एरिया का 33.76 फीसदी रहा, जबकि जौ के तहत 0.21 लाख हेक्टेयर में महज 3.33 फीसदी फसल बीमा के तहत कवर हुई।
पंचकूला में बनाया जॉइंट कॉल सेंटर
कृषि विभाग ने अब पंचकूला में जॉइंट कॉल सेंटर बनाया है। इसमें बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि हर रोज बैठते हैं। हर जिले का अलग से डेस्क बनाया गया है, जहां किसानों की समस्याएं सुनी जाती हैं। इसके बाद इनका समाधान किया जाता है। अभी भी काफी संख्या में किसानों की शिकायतें पेंडिंग हैं।
तीन साल में किसानों को मिले 1820.87 करोड़ रुपए
वर्ष 2016 से 2018 तक प्रदेश के 33.95 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया, इनमें से 6.33 लाख किसानों को फसल बीमा का लाभ 1820.87 करोड़ रुपए के रूप में दिया गया। खरीफ 2016 में 7.38 लाख किसानों में से 1.50 लाख किसानों को 234.23 लाख का क्लेम दिया गया। रबी 2016-17 में 5.97 लाख किसानों ने बीमा कराया, 0.62 लाख किसानों को 57.02 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। खरीफ 2017 में 6.41 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया, इनमें से 2.40 लाख किसानों को 797.04 करोड़ रुपए का क्लेम मिला। रबी 2017-18 में 6.97 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया। इनमें से 0.77 लाख किसानों को 85.30 करोड़ रुपए क्लेम मिला। खरीफ 2018 में 7.22 लाख किसानों ने फसल बीमा कराया। इनमें से 1.04 लाख किसानों को फसल बीमा का 647.28 करोड़ रुपए क्लेम के रूप में मिले हैं।
कृषि विभाग की नाकामी: मान
किसान संगठन अब कृषि विभाग पर सवाल खड़े करने लगे हैं। भाकियू प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने कहा कि किसानों के हजारों केस पेंडिंग हैं। सरकार को चाहिए कि कंपनियाें या बैंकों द्वारा की जा रही लापरवाही पर कड़ा शिकंजा कसा जाए, ताकि पीड़ितों को इसका लाभ मिले।
1 माह में होगा सभी केसों का निपटारा
फिलहाल करीब 5600 केस पेंडिंग हैं। इनका निपटारा एक माह में करने के लिए जिलों में बनी मॉनीटरिंग कमेटियों को आदेश दिए हैं। बैंक हो या फिर बीमा कंपनी, जिसकी गलती होगी, उसे ही राशि का वहन करना होगा। किसानों को जागरूक करने को प्रयास किए जा रहे हैं। -अजीत बाला जोशी, निदेशक, कृषि विभाग।

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