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Haryana

HARYANA-भाजपा के मिशन-75 पर आईएएस अफसरों का विश्लेषण

June 17, 2019 06:25 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JUNE 17

नो मििनस्टर
भाजपा को लगातार चुनावों में जीत मिल रही है, लेकिन काका के मंत्री कुछ खफा-खफा जरूर है। उन्हें इतनी तवज्जो नहीं मिल रही है, जितनी मिलनी चाहिए। इसके पीछे कुछ मंत्री तर्क भी दे रहे हैं। कहते हैं-आजकल तो सीएम और अफसर ही सबकुछ हैं। मंत्रियों को कौन पूछता है। चाहे कोई योजना लांच करनी हो या अन्य किसी विभाग की जानकारी शेयर करने की बात हो। मंत्री तो पीछे ही रह रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण भी सामने आ गया। कैबिनेट मीटिंग की तारीख पहले ही मीडिया में आ चुकी थी। जबकि कुछ मंत्रियों को इसकी जानकारी तक नहीं थी।
अफसर से नेता बने लोगों पर चौटाला ने जताया भरोसा
बड़े चौटाला का भरोसा नेताओं से ज्यादा अफसर से नेता बने लोगों पर ज्यादा है। जो सरकार में उनके साथ भी रहे हैं। उनके हनुमान कहे जाने वाले अरोड़ा 15 साल प्रदेशाध्यक्ष रहे। जब उनका इस्तीफा मंजूर हुआ तो रिटायर्ड आईएएस बीडी ढालिया को प्रदेश की कमान सौंपी। रिटायर्ड डीजीपी एमएस मलिक को नीति बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है। उनकी प्रदेश और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में रिटायर्ड अफसरों की संख्या काफी है।
कांग्रेस में नहीं चुनावी हलचल, अपने इलाकों तक सिमटे नेता
लोकसभा चुनाव के बाद सभी पार्टियां सक्रिय हाे चुकी है, लेकिन कांग्रेस में अभी कहीं कोई हलचल नहीं है। हलचल सिर्फ एक-दूसरे की खिंचाई करने की है। संगठन और नेता सभी अपने-अपने इलाकों तक सिमट गए हैं। हालांकि छोटे हुड्‌डा ने अपने किले रोहतक में जरूर मीटिंग शुरू की है। जबकि दूसरे दलों ने विधानसभा चुनाव का खाका खींच लिया है और फिल्ड में उतर चुके हैं। कांग्रेस अभी इसी कवायद में जुटी है कि गुटों को कैसे तोड़कर सभी एक साथ लाया जाए। जबकि गुट नदियों के किनारे की तरह बन चुके हैं, जिनको एक साथ लाना नामुमकिन जैसा हो गया है।
नेताजी का लपटों के बीच तप
लोकसभा में चुनावी हार के बाद आप के प्रदेशाध्क्ष ने धूप और आग की लपटों के बीच तप किया। बाकायदा, साधारण कपड़े धारण किए और तप करने में रम गए। हालांकि उन्होंने यह तप प्रदेश के लिए किया है। लेकिन नेताजी को मेहनत जनता के बीच ज्यादा करनी पड़ेगी। क्योंकि वोट जनता ही देगी। लोकसभा चुनाव में एक भी प्रत्याशी जमानत नहीं बचा पाया और खुद नेताजी भी हार गए। चुनावी परिणाम के बाद केजरीवाल के चुनावी ट्वीट भी बंद हो गए। अब देखना यह है कि अगले सौ दिन नेताजी वोट जुटाने के लिए दूसरा कौनसा तरीका अपनाएंगे।
भाजपा के मिशन-75 पर आईएएस अफसरों का विश्लेषण
भाजपा ने विधानसभा में मिशन-75 का लक्ष्य तय किया तो इसका विश्लेषण आम लोगों के साथ आईएएस अफसरों के बीच भी शुरू हो गया। कोई कह रहा है कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव में जनता का मूड अलग होता है तो कोई लोकसभा का चुनाव मोदी के नाम पर लड़े जाने की बात कहते हुए विधानसभा चुनाव अलग होने की। कुछ भाजपा के इस लक्ष्य तक पहुंचने की संभावना ना के बराबर बता रहे हैं लेकिन भाजपा की वापसी वे जरूर मान रहे हैं।
-ओएसडी

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