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Haryana

आजाद हिंद फौज के 170 गुमनाम सिपाहियों का रिकार्ड तलाश कर सरकार को भेजा, डीसी 19 पत्र लिख चुके, अब तक किसी को नहीं मिला सम्मान

June 17, 2019 06:22 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JUNE 17

आजाद हिंद फौज के 170 गुमनाम सिपाहियों का रिकार्ड तलाश कर सरकार को भेजा, डीसी 19 पत्र लिख चुके, अब तक किसी को नहीं मिला सम्मान
6 साल से रिकार्ड खंगाल रहे श्रीभगवान फौगाट सालभर से मांग रहे धरने की अनुमति

रेवाड़ी | नेताजी सुभाषचंद्र बोस की आजाद हिंद फौज (आईएनए) का हिस्सा रहने के बाद भी सालों से गुमनामी में रहे सैनिकों की संख्या सैकडों में है। ये दावा रेवाड़ी के श्रीभगवान फौगाट का है, जो कि 6 साल से इन गुमनाम सिपाहियों का रिकार्ड खंगालने में जुटे हुए हैं, लेकिन सरकार को रिकार्ड भेजे जाने के बावजूद भी इन सैनिकों को अब तक सम्मान नहीं मिल पाया।
फौगाट के अनुसार वे अब तक राज्य के 170 सिपाहियों का रिकार्ड खंगालकर सरकार और संबंधित डीसी को भेज चुके हैं। रेवाड़ी डीसी भी 19 बार सरकार व दूसरे जिलों के डीसी को चिट्‌ठी भेज चुके हैं। तमाम बातों के बावजूद भी सरकार का जवाब हैरान करने वाला है। पेंशन जारी करने वाली सरकार की प्रोटोकॉल शाखा का जवाब है कि यदि डीसी उचित समझें तो इन सिपाहियों का प्रस्ताव बनाकर भेजें। फौगाट एक साल से सचिवालय के सामने धरने पर बैठने अनुमति मांग रहे हैं, मगर जिला प्रशासन इस पर भी टाल -मटोल करता आ रहा है। पहली बार उन्होंने 26 जून 2018 को धरने की परमिशन के लिए पत्र लिखा था। तमाम प्रयासों के बावजूद 170 में से किसी एक के परिवार को भी सरकार की तरफ से फायदा नहीं मिल पाया है।
केस स्टडी- जीते जी नहीं हो रही सुनवाई
फौगाट ने 2015 में महेंद्रगढ़ के गांव खेड़ा के स्वतंत्रता सेनानी हरफूल सिंह का रिकार्ड खंगाला था। पेंशन जारी करने वाली राज्य सरकार की प्रोटोकॉल शाखा समेत संबंधित अधिकारियों को यह रिकार्ड भेज दिया गया। सरकार ने पंजाब रेजिमेंट से इसकी जांच कराई तो हरफूल सिंह के स्वतंत्रता सेनानी होने के सबूत मिले। सेनानी की पत्नी कमला देवी ने कई दफ्तरों पर जाकर अधिकार मांगा, मगर सम्मान आज तक नहीं मिला। आरटीआई में फौगाट ने पूछा कि ऐसे संघर्ष करके कमला देवी का भी निधन हो जाएगा, फिर सम्मान का क्या फायदा। तो जवाब आया कि वारिसों को इसका फायदा देंगे।
श्रीभगवान फौगाट
व्यवस्था में 2 बड़ी खामियां
1. खुद करें आवेदन सरकार के एक पत्र में जवाब है कि स्वतंत्रता सेनानी के वारिश खुद सम्मान पेंशन के लिए आवेदन करें, जबकि ज्यादातर परिवारों को तो जानकारी ही नहीं है कि उनके पिता या दादा के स्वतंत्रता सेनानी होने का कहीं रिकार्ड भी मिल सकता है।
पिता की मृत्यु के बाद मिला सम्मान पेंशन का लाभ
मूलरूप से दादरी निवासी श्रीभगवान के पिता रामसिंह अंग्रेजों की हांगकांग सिंगापुर रॉयल आट्रिलरी (एचकेएसआरए) यूनिट में कार्यरत थे, जो कि बाद में बगावत करके आईएनए में शामिल हुए। रामसिंह सरकार से सम्मान पेंशन के लिए 1972 से 1978 तक पत्राचार करते रहे। 1996 में उनका निधन हो गया। 2012 में रामसिंह की पत्नी चमेली देवी को सम्मान पेंशन का लाभ मिला।
2. समिति के गठन का इंतजार
श्रीभगवान फौगाट कहते हैं कि पंजाब रेजिमेंट ने जांच कर कनीना के हरफूल सिंह को स्वतंत्रता सेनानी माना, मगर सरकार का जवाब था कि स्वतंत्रता सेनानी सम्मान समिति के गठन के बाद यह लाभ दिया जाएगा। जबकि सरकार ने समिति का अध्यक्ष तो नियुक्त कर दिया। सदस्य बनाए नहीं हैं। ऐसे में समिति का गठन तो सरकार के ही हाथ में हैं।

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