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Haryana

HARYANA-कांग्रेस की नई चिंता, विधानसभा चुनाव में भी न डूब जाए लुटिया

June 16, 2019 06:08 AM

COURTESY NBT JUNE 16

राज्य इकाई के नेताओं के खींचतान से लोकसभा में 1 सीट भी नहीं मिली थी


टिकट चाहनेवालों का टूट रहा मनोबल
प्रदेश जहां कांग्रेस का आम वर्कर इस लड़ाई को लेकर परेशान है वहीं प्रदेश में पार्टी के दूसरी पंक्ति के नेता व टिकट चाहनेवालों का मनोबल लगातार टूटता जा रहा है। इन नेताओं का कहना था कि अब आलाकमान प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को अपना स्पष्ट संदेश में देने में जितना देर करेगा, पार्टी को विधानसभा चुनाव में उतना ही भारी नुकसान होगा। सूत्र बताते हैं कि गुलाम नबी आजाद अब पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बीच भी अब संबंध पहले जैसे नहीं हैं और इसी खटास के चलते आजाद कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि 4 जून को नई दिल्ली में कांग्रेस के वॉररूम में जो कुछ हुआ उस वक्त आजाद तंवर की गलती मान रहे थे, लेकिन 9 जून को जिस तरह हुड्डा ने अपना शक्ति प्रदर्शन किया, उससे भी आजाद नाराज हैं। बताया जा रहा है कि अशोक तंवर लगातार आजाद से संपर्क बनाकर अपनी हालत को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं, लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि आजाद हुड्डा की अनदेखी करें। इन्हीं कारणों से ऐसा लगता है फिलहाल उम्मीद की किरण कम ही दिखाई दे रही है।• एसपी रावत, कुरुक्षेत्र

 

हरियाणा विधानसभा चुनाव नजदीक है और हरियाणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की भृकुटियां लगातार तन रही हैं। विधानसभा चुनावों में अब तीन महीने से भी कम समय बचा है, जिसे देखकर कार्यकर्ता लगातार बेचैनी में हैं कि लोकसभा चुनावों में तो सभी 10 सीटें हार गए, लेकिन अगर विधानसभा चुनावों तक यही हालत रही तो विधानसभा में कांग्रेस की क्या हालत रहेगी, इसका अनुमान अभी से लगाया जा सकता है। पार्टी वर्कर्स का कहना है कि दुखदायी बात ये है कि नेतृत्व में न ऊपर कुछ दिखाई दे रहा है और न नीचे।

इसी बीच शुक्रवार देर शाम अखिल भारतीय किसान कांग्रेस के उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सोलंकी ने सभी जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा कर दी है। इस संबंध में जब कुछ कांग्रेसी नेताओं से बात की गई तो उन्होंने अपना नाम छापने से तो मना कर दिया, लेकिन बताया कि जितने नामों की घोषणा की गई है उनमें अधिकतर शहरी हैं और उनका किसानी से कोई संबंध नहीं है। अब ये कयास लगाए जा रहे हैं कि यह सूची एआईसीसी ने किसके कहने पर अप्रूव की है।

गौरतलब है प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वे विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ेंगे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को प्रदेश कांग्रेस में बदलाव का भरोसा है, उधर बदलाव की बात अशोक तंवर जिस अंदाज में लगातार खारिज करते जा रहे हैं उससे लगता है दोनों को ही आलाकमान ने किसी न किसी रूप में छूट दी हुई है और यहां एक म्यान में दो तलवारों जैसी हालत बनी हुई है। 9 जून को हुड्डा ने जब नई दिल्ली में प्रदेश भर से अपने समर्थक बुलाए तो उन्होंने यही संदेश दिया था कि अगले एक सप्ताह में प्रदेश कांग्रेस में फेरबदल हो जाएगा और प्रदेश कांग्रेस की कमान हमारे खेमे के पास होगी। लेकिन इसके जवाब में प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने 12 जून को तंवर ने जब गुरुग्राम में कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई तो तंज कसने के अंदाज में बिना नाम लिए कहा कि जो आजकल या एक सप्ताह में बदलाव की बात करते हैं वे तो पिछले साढ़े चार साल से यही बात कहते आ रहे हैं। आज तक कोई बदलाव हुआ है क्या/

कार्यकर्ताओं की इस व्यथा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और प्रदेश अध्यक्ष डॉ.अशोक तंवर के बीच प्रदेश कांग्रेस में वर्चस्व को लेकर तलवारें खिंची हुई हैं।

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