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नोटा के पक्ष में डाले गए वोट पूर्ण रूप से वैध या अवैध -हेमंत कुमार

May 25, 2019 03:21 PM

चंडीगढ़ - गत 23 मई को 17 वी लोक सभा चुनावो की मतगणना के दौरान देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशो की 542 सीटों पर (तमिलनाडु की वेल्लोर सीट को छोड़ जहाँ भारतीय चुनाव आयोग द्वारा पहले ही मतदान रद्द कर दिया था) मतदाताओं द्वारा नोटा (चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में कोई भी नहीं ) के विकल्प के पक्ष में कहीं कुछ वोटो से लेकर कहीं सैंकड़ो वोट तक डाले गए। हेमंत ने चुनाव आयोग को लिखकर मांग की है कि या तो नोटा के पक्ष में डाले गए वोट को पूर्ण रूप से वैध माना जाए या अवैध। बिहार राज्य में यह आंकड़ा प्रदेश में कुल डाले गए वोटो का दो प्रतिशत अर्थात 8 लाख के पार है जो देश में सबसे अधिक है जिसमें से गोपालगंज लोक सभा सीट पर नोटा के पक्ष में 51,660 वोट पड़े जो इस बार के चुनावो में किसी भी संसदीय सीट पर सबसे अधिक हैं। यहाँ तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भी नोटा के पक्ष में 4037 वोट पड़े जबकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा जीती गयी केरल की वायनाड सीट पर 2155 वोट नोटा के पक्ष में डाले गए। बहरहाल, इन सबके बीच पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने आज भारतीय चुनाव आयोग को लिखकर मांग की है की जिस प्रकार चुनाव आयोग ने दिसंबर, 2013 में चुनावी सम्बन्धी हिदायतो के रूप में देश के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशो के मुख्य चुनाव अधिकारियों को 7 दिसंबर, 2013 को जारी एक पत्र में स्पष्ट किया है की नोटा के पक्ष में डाले गए वोट वैध नहीं माने जा सकते। इसमें आगे यह भी लिखा गया कि चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की ज़मानत राशि लौटाने के लिए जैसे डाले गए वैध वोटो का एक-छठा भाग अर्थात 16.66 % वोट निर्धारित किये जाते है उनमें नोटा के पक्ष में डाले गए वोट शामिल नहीं किये जाएँ। एडवोकेट हेमंत का मानना है कि अगर चुनाव आयोग नोटा के पक्ष में डाले गए वोटो को उक्त जारी पत्र के अनुसार वैध वोट नहीं मानता, तो चुनाव में मतगणना के हर सम्बंधित चुनावी क्षेत्र की फाइनल रिजल्ट लिस्ट में दर्शाये गए हर उम्मीदवार द्वारा प्राप्त वोटो के प्रतिशत में भी नोटा के वोटो को भी शामिल नहीं करना चाहिए क्योंकि एक ही समय पर नोटा के पक्ष में डाले गए वोट को एक उद्देश्य के लिए अवैध एवं दुसरे उदेश्य के लिए वैध नहीं माना जाना चाहिए। इस सम्बन्ध में हेमंत ने अपने स्थानीय हलके अम्बाला (आरक्षित) लोक सभा सीट का उदाहरण देते हुए बताया कि इस सीट पर कुल वोट 13 लाख 16 हज़ार 235 वोट पड़े जिसमे से 13 लाख 13 लाख 394 सामान्य वोट एवं 2841 पोस्टल वोट शामिल थे। अब इनमे से 7943 वोट नोटा के पक्ष में थे।अब चुनाव आयोग के हिदायतों के मुताबिक जमानत राशि बचाने के लिए 13 लाख 16 हज़ार 235 में से 7943 वोट कम करने होंगे जो कि 13 लाख 8 हज़ार 292 बनता है एवं इसका एक-छठा अर्थात 16 .66 प्रतिशत 2 लाख 18 हज़ार बनता है। अब इसी राशि के अनुसार अगर विजयी भाजपा उम्मीदवार रतन लाल कटारिया द्वारा प्राप्त 7 लाख 46 हज़ार 508 वोट का वोट प्रतिशत का आकलन किया जाए तो यह पूरा 57 प्रतिशत बनता है जबकि चुनाव आयोग के आधिकारिक डाटा में यह 56.72 प्रतिशत दर्शाया जा रहा है। इसी प्रकार अम्बाला से दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस की कुमारी शैलजा द्वारा प्राप्त 4 लाख 4 हज़ार 163 वोट का वोट प्रतिशत 30 .89 बनता है परन्तु इसे 30.71 दर्शाया गया है।

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