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Haryana

कांग्रेस को मिली संजीवनी न केवल वोट प्रतिशत बढ़ा, बल्कि पांच विधानसभाओं में वह नंबर एक पर रही है

May 25, 2019 06:09 AM

COURTESY NBT MAY 25

कांग्रेस को मिली संजीवनी


न केवल वोट प्रतिशत बढ़ा, बल्कि पांच विधानसभाओं में वह नंबर एक पर रही है


Rahul.Anand@timesgroup.com• नई दिल्ली : 2019 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए वजूद की लड़ाई थी। लगातार गिरते ग्राफ की वजह से पार्टी को चुनाव में खुद को स्थापित करने का दबाव था। यही वजह थी कि कांग्रेस, ‘आप’ के साथ गठबंधन के लिए भी तैयार हो गई थी। दिल्ली में लोकसभा की एक भी सीट जीत न पाने के बावजूद कांग्रेस को संजीवनी मिली है। न केवल उसके वोट प्रतिशत में इजाफा हुआ है, बल्कि पांच विधानसभाओं में वह नंबर एक पर रही है। अभी चुनाव हो, तो कांग्रेस पांच सीटों पर जीत सकती है। बाकी 65 सीटों पर बीजेपी का कब्जा हो सकता है।

कांग्रेस के लिए अच्छी बात यह रही कि उसका वोट 15.15 प्रतिशत से बढ़कर 22.50 तक पहुंच चुका है। यानी 7.35 पर्सेंट वोट का इजाफा हुआ है। पार्टी कुल 42 विधानसभाओं में दूसरे स्थान पर पहुंच चुकी है। कांग्रेस नेताओं का कहना है, ‘हम खुश तो नहीं हैं, लेकिन इस चुनाव ने हमें नए सिरे से दिल्ली में स्थापित किया है। पार्टी इसे अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पॉजिटिव तरीके से ले रही है।’

कांग्रेस प्रवक्ता जितेंद्र कुमार कोचर ने कहा, ‘इस चुनाव से इतना साफ हो गया है कि बीजेपी को केवल कांग्रेस हरा सकती है। हमारा रोडमैप तैयार है। हमारा एकमात्र दुश्मन ‘आप’ है।’ उन्होंने कहा कि ‘आप’ को इस चुनाव में जनता ने नकार दिया है। इसी तरह अगले चुनाव में भी जनता उसे नकार देगी। कोचर ने कहा कि जब-जब बीजेपी और कांग्रेस में सीधी टक्कर होती रही है, बीजेपी की हार होती रही है। अब फिर से बीजेपी को टक्कर देने के लिए कांग्रेस तैयार है। कांग्रेसस नए सिरे से तैयारी में जुटी है।

लोकसभा चुनाव के आंकड़े कहीं न कहीं कांग्रेस के लिए पॉजिटिव संकेत दे रहे हैं। कांग्रेस को पिछले कुछ सालों से लड़ाई का हिस्सा नहीं माना जाता था। अब कांग्रेस ने खुद को स्थापित कर दिया है। अब भी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चिंता बनी हुई है। इस हार के बाद आगे की रणनीति क्या होगी, यह तो साफ नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस में बड़े स्तर पर बदलाव संभव है।

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इस चुनाव में सबसे पहले गठबंधन की वजह से कांग्रेस के नेता और वर्कर घरों में बैठे रहे, उन्हें प्रचार

का समय नहीं मिला। दूसरा कांग्रेस का अटैक काफी असरहीन रहा।

सूत्रों का कहना है कि अध्यक्ष बनने के बाद शीला दीक्षित ने एक भी प्रदर्शन नहीं किया। वर्कर में जो जोश उनके आने के बाद आया था वह धीरे-धीरे कम हो गया। ‘आप’ सरकार के बजट पर भी पार्टी की तरफ से कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की गई। प्रदेश कांग्रेस की रफ्तार इतनी धीमी थी कि चुनाव आते-आते जोश ठंडा पड़ गया और इस वजह से जनता एकतरफा मोदी लहर में बीजेपी के साथ चली गई।

 
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