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Editorial

NBT EDIT-मजबूत राष्ट्र के लिए-2019 का जनादेश

May 24, 2019 06:58 AM

COURTESY NBT MAY 24

मजबूत राष्ट्र के लिए


लोकसभा चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत सुनिश्चित करके भारतीय मतदाता ने एक ऐसी मजबूत सरकार के लिए जनादेश दिया है, जो आतंकवाद और सुरक्षा के मुद्दों पर सख्त फैसले ले सके। इस क्रम में बीजेपी अकेले दम पर अपना एक कार्यकाल पूरा करके दूसरी बार सत्ता में आने वाली पहली गैर-कांग्रेसी पार्टी बन गई है। नेहरू युग के बाद किसी प्रधानमंत्री के पक्ष में जनता ने ऐसा भरोसा पहली बार ही दिखाया है। याद करें तो नरेंद्र मोदी से पहले यह गौरव इंदिरा गांधी को भी नहीं हासिल हो पाया था। न सिर्फ बीजेपी बल्कि उसके तमाम सहयोगी दलों ने मोदी के नाम पर ही वोट मांगे। दरअसल भारत में एक मजबूत नेता की छवि लोगों के लिए काफी मायने रखती है। मोदी के बरक्स विपक्ष का कोई भी नेता मतदाताओं की इस कसौटी पर खरा नहीं उतर सका। पिछले पांच सालों में सरकार की कई नीतियों पर विपक्ष ने सवाल उठाए, उसके कुछ कदमों का प्रबल विरोध हुआ लेकिन इसके बावजूद सरकार के प्रति लोगों का भरोसा नहीं टूटा। ऐसा शायद इसलिए हुआ कि नोटबंदी जैसे एकाध अवसरों को छोड़कर आमजन का जीवन कुल मिलाकर स्थिर रहा। सरकार के कार्यकाल के दौरान खान-पान और रोजमर्रा की अन्य जरूरी चीजें एक सीमा से ज्यादा महंगी नहीं हुईं। साधारण जनता को प्रभावित करने वाली कई स्कीमें भी जमीन पर उतरीं और लोगों को उसका फायदा मिला। जैसे किसान सम्मान निधि के तहत जरूरतमंदों तक पैसे पहुंचे। उज्ज्वला योजना के तहत कमजोर वर्ग के लोगों को बड़े पैमाने पर गैस कनेक्शन मिले। स्वच्छ भारत के तहत शौचालय निर्माण योजना का लाभ भी हर किसी को बराबर मिला। लेकिन सबसे ऊपर राष्ट्रवाद का मुद्दा रहा। आतंकवाद को लेकर मोदी सरकार के आक्रामक स्टैंड और सर्जिकल स्ट्राइक तथा एयर स्ट्राइक की कार्रवाइयों ने जनता को अपने राष्ट्रीय शत्रु पर जीत का एक मनोवैज्ञानिक संतोष दिया और लोगों में राष्ट्रीय स्वाभिमान का भाव जगाया। लोगों में यह उम्मीद पैदा हुई है कि नरेंद्र मोदी की अगुआई में भारत दुनिया के एक ताकतवर देश के रूप में उभर सकता है। इन सारे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लोगों ने जाति-धर्म और क्षेत्र के आग्रहों से ऊपर उठकर बीजेपी को वोट दिया। दूसरी तरफ विपक्ष खुद को मोदी सरकार के मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने में विफल रहा। उसने सरकार के कदमों की आलोचना की, कुछ मामलों में वैकल्पिक नीतियां भी पेश कीं, लेकिन विकल्प बनने की संभावना नहीं जगा सका। उसके आपसी अंतर्विरोध उसकी सारी कोशिशों पर हावी रहे। अपोजिशन के कई नेता एक-दूसरे की टांग खींचते रहे। कुछ लीडर अपने राज्य के बाहर नहीं देख पाए और यूपी में उन्होंने जातियों का गठबंधन बनाकर आम चुनाव जीतने का मन बनाया! इस चुनाव ने भारतीय वोटरों के बदले हुए माइंडसेट पर भी मोहर लगाई है, जो पुराने ढंग से फैसले नहीं करता।
2019 का जनादेश

 
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