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Himachal

हिमाचल में चुनाव उनका, जो इस इलेक्शन में कैंडिडेट ही नहीं बने...

May 10, 2019 06:11 AM

COURTESY NBT MAY 10

हिमाचल में चुनाव उनका, जो इस इलेक्शन में कैंडिडेट ही नहीं बने...


अनुराग ठाकुर
आश्रय शर्मा
शिमला में इन दिनों एक सब्जी बेचने वाले का चर्चा हर तरफ है, कारण है की रवि कुमार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। रवि कुमार जो पिछले 20 सालों से शिमला में सब्जी बेचते रहे हैं अब वह लोकसभा में अपने शहर का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। रवि कुमार का कहना है कि पिछले कई सालों से राजनीतिक पार्टियां सिर्फ यहां के लोगों को छलती आई हैं इसलिए उन्होंने फैसला किया है की चुनाव लड़ेंगे और लोगों की सेवा करेंगे। रवि कुमार का चुनाव चिन्ह टेलीफोन है।
Sunil.Dogra@timesgroup.com• शिमला : इस बार के लोकसभा चुनाव हिमाचल में कई मायनों में अलग और खास हैं। इलेक्शन का पूरा फोकस मंडी सीट पर है, जहां से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुखराम के पोते आश्रय शर्मा चुनाव लड़ रहे हैं। हमीरपुर सीट भी इसलिए चर्चा में है क्योंकि यहां से अनुराग ठाकुर चौथी बार सांसद बनने के लिए मैदान में हैं। बाकी दोनों सीटों पर नए कैंडिडेट हैं। जानकार मानते हैं कि इस बार चुनाव उम्मीदवारों से ज्यादा उन नेताओं के बीच है, जो खुद इलेक्शन नहीं लड़ रहे हैं। सभी चारों सीटों पर वोटिंग 19 मई को होनी है।

 

दिग्गज मैदान से बाहर

इस बार कोई भी दिग्गज नेता खुद चुनावी मैदान में नहीं है। हिमाचल के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के उम्रदराज होने का हवाला देकर बीजेपी ने उन्हें चुनावी राजनीति से बाहर कर दिया। 6 बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह न तो खुद चुनाव लड़ रहे हैं और न ही उनके परिवार से कोई और। विधानसभा चुनावों में हारने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल भी चुनावी राजनीति से बाहर हो गए हैं। सुखराम ने अपने पोते को आगे किया है। विद्या स्टोक्स के युग का अंत हो गया है।

 

वीरभद्र बनाम जयराम

जानकारों की नजर इस बार मंडी पर है। इस सीट पर सुखराम और वीरभद्र सिंह या उनके परिवार ने 8 बार कब्जा किया है। मंडी जिले को सुखराम का गढ़ माना जाता है। हालांकि यह सीट बहुत बड़ी है और बाकी इलाकों में वीरभद्र सिंह का दबदबा है। इसी को देखते हुए आश्रय अपने पोस्टरों में उस फोटो का इस्तेमाल करना नहीं भूलते, जिसमें वीरभद्र और सुखराम गले मिल रहे हैं। हालांकि वीरभद्र भी बताना नहीं भूलते कि उन्होंने सुखराम को माफ नहीं किया है। सुखराम के बेटे अनिल शर्मा अभी भी बीजेपी विधायक हैं और बेटे को कांग्रेस का टिकट का दिलाने के चक्कर में उनकी मंत्रीपद की कुर्सी चली गई। कांग्रेस के लिए टेंशन इस बात कि है मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी मंडी से हैं।

 

बदल रहे समीकरण

शांता कुमार की सीट कांगड़ा में बीजेपी ने कैबिनेट मंत्री और गद्दी कम्युनिटी के किशन कपूर को उम्मीदवार बनाया। उनके मुकाबले कांग्रेस ने ओबीसी कम्युनिटी के पवन काजल को उतारा है। वीरभद्र सिंह ने कांगड़ा में चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। वह ज्यादातर वक्त यहीं बिता रहे हैं। हिमाचल की इकलौती रिजर्व सीट शिमला में 2009 तक बीजेपी को कभी जीत नसीब नहीं हुई। उसके बाद वीरेंद्र कश्यप लगातार 2 बार चुनाव जीते। इस बार बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया। अब टक्कर 2 फौजियों में है। सोलन से कांग्रेस विधायक कर्नल धनीराम शांडिल (78) को पच्छाद से बीजेपी विधायक सुरेश कश्यप (48) टक्कर दे रहे हैं।

 

लोकल मुद्दे भी कम नहीं

चंबा में सीमेंट प्लांट और 4 लेन हाइवे के काम में देरी भी मुद्दे हैं। कांगड़ा और निचले हिमाचल से भेदभाव के आरोप फिर उठ रहे हैं। सेब उगाने वाले किसान बाकाया चुकाने और नुकसान की भरपाई की मांग करते रहे हैं। शिमला हेरिटेज रेलवे लाइन का एक्सपेंशन नहीं हो पा रहा है। हाटी समुदाय को जनजाति का दर्जा न मिलना बीजेपी को परेशान कर सकता है। बीजेपी के लिए मोदी ही सबसे बड़ा मुद्दा है। सर्जिकल स्टाइक और आर्मी पर भी फोकस है

 
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