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Haryana

ताऊ देवीलाल की चौथी पीढ़ी से मुकाबला होगा कांग्रेस के दिज्गज नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का

April 24, 2019 01:17 PM

ईश्वर धामु 

भिवानी:हरियाणा का गेट-वे ऑफ देहली सोनीपत लोकसभा सीट पर कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को अपना प्रत्याशी बना कर भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। हालांकि हुड्डा के नाम की पहले केवल चर्चाएं थी। समझा जा रहा था कि कांग्रेस बाप-बेटे को एक साथ टिकट नहीं देगी। पर अंतिम समय पर कांग्रेस न भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को सोनीपत से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। यह एक तरह से दूसरी पार्टी प्रत्याशियों के लिए एक बड़ा राजनैतिक झटका था। नौ विधानसभा क्षेत्रों वाली इस लोकसभा क्षेत्र में तीन विधानसभा क्षेत्र जींद, जुलाना और सफीदो जिला जींद के तहत आते हैं। शेष गन्नौर, राई, खरखैदा, सोनीपत, बड़ोदा, और गोहाना जिला सोनीपत के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्र हैं। कांग्र्रेस ने हुड्डा को मैदान में उतारने के बाद जेजेपी-आप गठबंधन के प्रत्याशी इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिज्विजय चौटाला ने भी अपना नामांकन दाखिल कर दिया। ताऊ देवीलाल की चोथी पीढ़ी ने इतिहास दोहरा दिया। क्योकि 1998 के लोकसभा चुनाव के लिए अजय चौटाला ने अपने दादा चौधरी देवीलाल से चुनाव लडऩे को कहा तो उन्होने कहा कि अगर नेता बनना है तो भिवानी  जाकर चुनाव लड़ों। सांसद तो कहीं से भी बन जाओगे। उस समय अजय चौटाला ने तत्कालीन हरियाणा विकास पार्टी के प्रत्याशी के रूप में सुरेन्द्र सिंह के मुकाबले में आकर चुनाव लड़ा। पहली बार नए क्षेत्र से लड़े चुनाव में अजय चौटाला ने तीन लाख 51 हजार 546 वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे। लेकिन इस चुनाव ने उनको राजनीति में स्थापित कर दिया। अब की बार अजय चौटाला ने अपने छोटे बेटे दिज्विजय चौटाला के कांग्रेस के दिज्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के सामने चुनाव मैदान में उतारा है। चुनाव परिणाम चाहे जो भी रहे पर इस चुनाव के माध्यम से दिज्विजय चौटाला को राजनीति में एक मुकाम मिल जायेगा और वें आने वाले चुनाव में एक बड़ी चुनौती बन जायेंगे। अब 39 साल बाद सोनीपत से ताऊ देवीलाल की चोथी पीढ़ी दिज्विजय चौटाला मैदान में आए हैं। ताऊ देवीलाल ने सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से 1980 और 1984 में दो बार चुनाव लडा था। देवीलाल सिर्फ 1980 में ही चुनाव जीते थे। दूसरी ओर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का सोनीपत से यह पहला चुनाव है। लेकिन उनके पिता चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा उस समय  रोहतक से चुनाव जीते थे, जब सोनीपत रोहतक का ही क्षेत्र होता था। लेकिन सोनीपत क्षेत्र को राजनीति में हुड्डा का प्रभावी क्षेत्र माना जाता है। अब हुड्डा के मुकाबले में इनेलो के सुरेन्द्र छिक्कारा भी मैदान में है। सोनीपत क्षेत्र से लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के सुप्रीमो राजकुमार सैनी ने घोषणा की हुई थी कि वें भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के मुकाबले में चुनाव लड़ेंगे। लेकिन उन्होने अपनी पार्टी की महिला प्रत्याशी राजबाला सैनी को टिकट थमा दिया। लेकिन उन्होने मीडिया से कहा कि वें सोनीपत से हुड्डा के मुकाबले में उतरना चाहते थे। पर अब देर हो चुकी है। पर सभी पूर्व ब्यानो को दाकिनार करते हुए राजकुमार सैनी नामांकन के अंतिम दिन सोपीत पहुंचे भी। पर उनके नामांकन पत्र में त्रुटी होने के कारण वे परचा दाखिल नहीं कर पाए। अब तीन जाट प्रत्याशियों के मुकाबले में भाजपा के ब्राहमण प्रत्याशी रमेश कौशिक फिर से मैदान में हैं। सोनीपत सीट के लिए अब तक 11 बार चुनाव हो चुके हैं। इनमें 9 बार जाट प्रत्याशी ने जीत दर्ज करवाई है। केवल दो बार 2014 में रमेश कौशिक भाजपा के प्रत्याशी के रूप में सफल हुए तो 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अरविंद शर्मा ने यह सीट जीती थी। अब देखना है कि बाजी कौन लेकर जाता है?

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