Friday, May 24, 2019
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Haryana

जेजेपी-आप गठबंधन ने लोकसभा चुनाव मैदान में उतारे 3 और उम्मीदवार, नवीन जयहिंद फरीदाबाद मेे केंद्रीय मंत्री को देंगे टक्कर

April 21, 2019 03:40 PM
जननायक जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी गठबंधन ने हरियाणा की तीन और लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। दिल्ली स्थित आप मुख्यालय पर दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एलान किया कि आप के हरियाणा प्रमुख नवीन जयहिंद फरीदाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे।
इसके साथ पूर्व डीजीपी पृथ्वीराज को गठबंधन ने अंबाला सुरक्षित सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। वहीं पानीपत निवासी एडवोकेट कृष्ण कुमार अग्रवाल को करनाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। वे अग्रवाल समाज की कई संस्थाओं में वरिष्ठ पदों पर सक्रिय हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ जेजेपी नेता और सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जेजेपी के पूर्व घोषित 4 उम्मीदवारों की तरह आप के ये 3 उम्मीदवार भी अपने-अपने लोकसभा क्षेत्र में मजबूती के साथ लड़ेंगे। दुष्यंत ने खुशी जाहिर की कि जेजेपी की तरह आप ने भी नवीन जयहिंद और कृष्ण कुमार अग्रवाल के रूप में युवा शक्ति को टिकट दी है।
दुष्यंत चौटाला ने कहा कि विरोधी दलों विशेषकर कांग्रेस में जेजेपी-आप गठबंधन से खौफ साफ दिख रहा है। उन्होंने कहा कि गठबंधन की मजबूती को देखते हुए ही कांग्रेस अब तक अपने 4 उम्मीदवार नहीं उतार पाई है।
सांसद दुष्यंत चौटाला ने बताया कि लोकसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के संयुक्त कार्यक्रम निर्धारित किए जा रहे हैं जिनके तहत दिल्ली के मुख्यमत्री अरविंद केजरीवाल हरियाणा में दो रोड शो और दो चुनावी रैलियों को संबोधित करेंगे। उन्होंने बताया कि एक रोड शो सोनीपत से पंचकुला तक जाएगा और जीटी रोड पर पड़ने वाले 6 जिलों से होकर गुजरेगा, वहीं दूसरा रोड शो बहादुरगढ़ से शुरू होकर डबवाली तक जाएगा और 5 जिलों को कवर करेगा। इसी तरह चुनाव प्रचार के आखिरी सप्ताह में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दो जनसभाएं करवाई जाएंगी। उन्होंने बताया कि दोनों दलों के उम्मीदवारों के नामांकन पर दोनों दलों के वरिष्ठ नेता मौजूद रहेंगे और जिला स्तर पर समन्वय समिति बनाकर चुनाव प्रचार को चलाया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पत्रकारों से बातचीत में सांसद दुष्यंत चौटाला ने फिर दोहराया कि जेजेपी ने आम आदमी पार्टी के अलावा किसी भी अन्य दल से गठबंधन का कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1971 में कांग्रेस छोड़ने के बाद चौधरी देवीलाल ने कभी कांग्रेस की ओर मुड़कर नहीं देखा तो अब उनके उस दल के साथ जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
 
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