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अम्बाला के छात्रों ने बनाया स्मार्ट डस्टबिन रोबोट: कचरा देख खुलेगा ढक्कन, भरने पर भेजेगा मैसेज

April 18, 2019 06:15 PM

भारतीय पब्लिक स्कूल के निखिल (क्लास 10th) और सेसिल कान्वेंट स्कूल के दक्ष गोयल ( क्लास 7th) ने एक ऐसा डस्टबिन बनाया है, जिसमें डिजिटल इंडिया व स्वच्छ भारत मिशन को फोकस किया गया है। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की थ्योरी का इस्तेमाल करते हुए डस्टबिन को कुछ ऐसे तैयार किया गया है, जिसमें लगा सेंसर कचरा डालने वाले की आमद को भांप लेता है और 100 मिली सेकेंड के लिए ढक्कन खुद-ब-खुद खुलकर बंद हो जाता है।

इतना ही नहीं, जैसे-जैसे डस्टबिन में कचरा भरता जाता है, उसमें लगा सेंसर उसका आंकलन भी करता रहता है। जैसे ही वह पूरी तरह भर जाता है, उससे जुड़े कंट्रोल रूम तक सिग्नल व मोबाइल एसएमएस भी पहुंच जाता है, ताकि सफाई कर्मी उसे आकर खाली कर सकें।

जीपीएस से डस्टबिन की लोकेशन तुरंत पता चलेगी।
किडोबॉटिक्स संस्थान के डायरेक्टर ज्योति गुप्ता ने बताया कि विद्यार्थियों ने पांच महीने की कड़ी मेहनत के बाद सस्ता स्मार्ट डस्टबिन रोबोट तैयार कर संस्थान और जिले का नाम रोशन किया है। इस डस्टबिन में 2 सेंसर, डायोड, माइक्रो कंट्रोलर्स के साथ जीएसएम पैनल लगाया है, जिसमें एक मोबाइल सिम लगाई जा सकती है। इस सिम का नंबर ही डस्टबिन की पहचान बनेगा।

मैनपावर, वक्त व सौर पैनल से ऊर्जा की बचत
दक्ष गोयल के मुताबिक, स्मार्ट डस्टबिन को चलाने के लिए महज 15-20 वोल्ट पावर की जरूरत होती है, जिसके लिए कूड़ेदान पर सोलर प्लेट भी लगाई गयी है | ऐसे में इसको किसी तरहं की बिजली की आवश्यकता भी नहीं होगी | डस्टबिन भरते ही न केवल सिग्नल मिलेगा, बल्कि कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी कर वहां डस्टबिन के अंकित नंबर की बत्ती भी जलने लगेगी।
निखिल ने आईसी प्रोग्रामिंग के जरिए ऐसी कमांड सेट की है, जिससे कूड़ादान भरते ही दोनों अटैच्ड नंबरों पर मेसेज चला जाएगा। वहीं, जब तक कूड़ेदान को खाली नहीं किया जाएगा, वह हर २ घंटे में मेसेज भेजता रहेगा। यह तकनीक प्लास्टिक या मेटल और हर तरह के डस्टबिन में काम कर सकती है। 

इसके अलावा बेहतर कम्युनिकेशन के लिए अलार्म भी बजेगा और कर्मियों के मोबाइल पर एसएमएस अलर्ट भी मिलेगा। इस डस्टबिन को अलग-अलग स्थानों पर स्थायी जगह बनाकर स्थापित किया जाए, तो उसमें सोलर पैनल से कनेक्टिविटी देकर ऊर्जा की बचत भी की जा सकती है। साधारण डस्टबिन की जगह आधुनिक तकनीक पर आधारित डिजिटल डस्टबिन का इस्तेमाल हो तो मैनपावर भी बचाया जा सकता है।
किडोबॉटिक्स की संचालक श्रीमती ज्योति गुप्ता ने कहा कि यह एक प्रतिरूप है, जिसे बनाने में जो खर्च आया है, उसे और बेहतर कर व्यावसायिक दृष्टिकोण लेकर तैयार किया जाए, तो उत्पादन मूल्य व निर्माण अवधि की बचत होगी। डस्टबिन भरते ही न केवल सिग्नल मिलेगा, बल्कि कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी कर वहां डस्टबिन के अंकित नंबर की बत्ती भी जलने लगेगी।

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