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अमेरिकी कंपनियां दे रहीं ट्रैकर; कौन कितनी देर सीट पर बैठा, कितना चला, हर मूवमेंट पर बॉस की नजर

February 21, 2019 04:55 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR FEB 21

अमेरिकी कंपनियां दे रहीं ट्रैकर; कौन कितनी देर सीट पर बैठा, कितना चला, हर मूवमेंट पर बॉस की नजर
 : कर्मचारियों को फिट रखने व मेडिकल कॉस्ट से बचाने की कवायद

वॉशिंगटन | अपने कर्मचारियों को फिट रखने और मेडिकल कॉस्ट बचाने के लिए अमेरिका में कई कंपनियां उन्हें फिटनेस ट्रैकर दे रही हैं। ट्रैकर कर्मचारियों की फिटनेस एक्टिविटी प्लान का डेटा उनके बॉस के फोन पर एप के जरिए भेजता है। कर्मचारी कितनी देर सीट पर बैठा रहा, कितने कदम चला, कितनी देर सोया और उसका हार्ट रेट कितना था, यह सब डेटा बॉस को मिलता है। यानी बॉस हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं। प्लान के बताए निर्देशों का तीन महीने तक पालन करने वाले कर्मचारियों को बाकायदा इंसेंटिव भी दिया जा रहा है। यह फिटनेस ट्रैकर कंपनियों की तरफ से फ्री में या कम कीमत पर कर्मचारियों को दिया जा रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों पर अन्य कर्मचारियों की तुलना में फिटनेस ट्रैकर पहनने के लिए दबाव डाला जा रहा है, जबकि कुछ कर्मचारियों को हेल्थ टारगेट पूरा करने पर बॉस की तरफ से बधाई दी जा रही है। फिटनेस ट्रैकर डिवाइस बनाने वाली कंपनी फिटबिट के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट एडम पेलेग्रिनी का कहना है कि इसके जरिए हम पता लगा सकते हैं कि कौन अपना हेल्थ टारगेट पूरा नहीं कर पा रहा है, या फिर कौन एक्शन प्लान का पालन नहीं कर रहा है।

कंज्यूमर प्राइवेसी एडवोकेट ली टीन ने बताया कि 'ज्यादातर कंपनियां या बॉस अपने कर्मचारियों के बारे में बहुत ज्यादा जानती हैं। ऑफिस के बाहर कर्मचारी क्या करते हैं, छुट्टी के दिन वे कहां जाते हैं। यहां तक कि कर्मचारियों के जीवन पर भी बॉस का बहुत ज्यादा प्रभाव रहता ही है। इस बात की संभावना ज्यादा है कि फिटनेस ट्रैकर के जरिए कर्मचारियों के प्रमोशन और डिमोशन पर असर पड़ेगा। क्योंकि डिवाइस अापसे ज्यादा आपके बारे में जानती है।'
कर्मचारियों की प्राइवेसी खतरे में, क्योंकि उनका निजी डेटा शेयर हो रहा
फिटनेस ट्रैकर की वजह से कर्मचारियों की प्राइवेसी पर भी खतरा पैदा हो गया है। कर्मचारियों को हेल्थ इंश्योरेंस देने वाली 20% कंपनियाें ने 2018 में फिटनेस ट्रैकर जैसी डिवाइस से डेटा हासिल किया, जो 2017 की तुलना में 14% ज्यादा था। इस हेल्थ डेटा को न सिर्फ बॉस के साथ साझा किया जाता है बल्कि डिवाइस मेकर्स, हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियाें और थर्ड पार्टी को भी दिया जाता है।

 
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