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HARYANA-अपने जिंदा होने का प्रमाण ना देने से अटकी है 44 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन

February 16, 2019 05:27 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR FEB 16

अपने जिंदा होने का प्रमाण ना देने से अटकी है 44 हजार सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के तहत पेंशन ले रहे 1.39 लाख सेवानिवृत्त कर्मचारियों में से प्रदेश के 44 हजार कर्मचारी एक साल में भी अपने जिंदा होने का प्रमाण नहीं दे सके हैं। इसके चलते उनकी पेंशन रोक दी गई है। अब बिना अपने जीवित होने का प्रमाण दिए उन्हें पेंशन नहीं दी जाएगी। इसके लिए ईपीएफओ ने भी स्पष्ट कर दिया है।
हालांकि 31 दिसंबर तक सभी सेवानिवृत कर्मचारियों को डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करवाने के लिए मौका भी दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी 44,914 पेंशनर इस सुविधा का लाभ नहीं ले सके हैं। अब केंद्रीय मंत्रालय के आदेश पर ईपीएफओ की ओर से नया सर्कुलर जारी किया गया है कि जिन्होंने बीते साल डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र जमा करवाया था, वे अब फिजिकली भी मान्य होंगे। नए आदेश में उन्हें रोक दिया गया जिन्होंने एक बार भी डिजिटल प्रमाण पत्र नहीं दिया है। बाद में ईपीएफओ ने फैसला लिया कि अब आधार से बॉयोमीट्रिक तरीके से ही सभी पेंशनर को जोड़ा जाए। बिना डिजिटल एंट्री के पेंशन को रोक दिया जाएगा। इस फैसले को लागू करने के लिए वर्ष 2016 से मार्च 2017 और फिर दिसंबर 2018 तक का समय दिया गया। वर्ष 2017 में पूरी तरह डिजिटल चालू कर दिया गया, लेकिन लोग इसे अपडेट नहीं करवा पाए। अब 31 दिसंबर 2018 तक प्रदेश में 94180 पेंशनर ही खुद को जीवित बता पाए। इसके कारण अब 44914 पेंशनर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र ना देने के चलते पेंशन से महरूम हो गए हैं।
ईपीएफओ की ओर से हर साल बॉयोमीट्रिक तरीके से डिजिटल लाइफ प्रमाण पत्र अनिवार्य
ये है पेंशनर्स के डिजिटल प्रमाण पत्र की स्थिति
रीजनल ऑफिस कुल पेंशनर्स अब तक बने
रोहतक 30,287 17,934
गुड़गांव 19,541 11,991
फरीदाबाद 43,825 33,321
करनाल 45,441 30,934
ये है डिजिटल लाइफ प्रमाण-पत्र : नए आदेश के तहत बॉयोमीट्रिक आधार पर ही अब मशीन में सेवानिवृत्त कर्मचारी को अपना अंगूठा लगाना होता है। यह हर साल कर्मचारियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा ना होने पर पेंशनर को मृत मानते हुए उसकी पेंशन रोक दी जाती है।
पहले बैंक कर्मचारी ही करते थे पुष्टि : वर्ष 2017 से पहले जीवन प्रमाण पत्र मैनुअल ही होता था। पेंशनर बैंक में जाते थे और वहां पर एक फार्म भरने के बाद ही उसका जीवन प्रमाण पत्र मान लिया जाता था। यह फार्म स्वयं बैंक कर्मचारी के सामने भरा जाता था, यानि एक तरह से बैंक कर्मचारी ही इसकी पुष्टि कर देते थे। इस पुष्टि के बाद ही ईपीएफओ भी स्वीकार कर लेते थे।
नोट : ईपीएफओ की ओर से अब तक दर्ज किए गए आंकड़े
डिजिटल दे चुके तो फिजिकल भी मान्य : सुब्रतो भौमिक
ईपीएफ के सेवानिवृत कर्मचारियों को डिजिटल लाइफ प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। इसे देने के लिए 31 दिसंबर 2018 तक का समय दिया गया था, लेकिन काफी लोग अभी भी डिजिटल जीवन प्रमाण नहीं दे पाए हैं। इसके चलते उनकी पेंशन रोकी गई है। साथ ही इस बार छूट दी गई है कि जिसका डिजिटल प्रमाण पत्र पिछले साल आया हुआ है, उसका इस बार फिजिकल मौजूदगी भी मान्य कर दी जाएगी। ऐसे में पेंशन पाने के लिए जीवन प्रमाण पत्र के बिना लाभ नहीं मिल पाएगा। - सुब्रतो भौमिक, सहायक पीएफ आयुक्त, ईपीएफओ

 
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