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कलीजियम का फैसला वेबसाइट पर न आने से निराश हूं : जस्टिस लोकूर

January 24, 2019 05:53 AM

COURTESY NBT JAN 24

कलीजियम का फैसला वेबसाइट पर न आने से निराश हूं : जस्टिस लोकूर


• विस, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसा मैकेनिज्म तैयार कर रहा है, जिसके तहत जब भी नए मामले में कोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी तो खुद-ब-खुद वह मामला चार दिनों के भीतर सुनवाई के लिए लिस्ट हो जाए। इससे मामले में जल्द सुनवाई की गुहार के लिए मेंशनिंग से निजात मिलेगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि नए मामले में अर्जी दाखिल करने के बाद खुद-ब-खुद चार दिनों में केस लिस्ट होगा और अगर इसके बावजूद किसी वकील को ज्यादा अर्जेंसी का मामला लगता है तो वह मामले की तुरंत सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार के सामने गुहार लगा सकते हैं।
नई अर्जी पर 4 दिन के अंदर सुनवाई
रिटायर जस्टिस मदन बी लोकूर• विस, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस मदन बी लोकूर ने कहा कि वह इस बात से निराश हुए हैं कि 12 दिसंबर का सुप्रीम कोर्ट कलीजियम का फैसला कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड नहीं हुआ। लोकूर 12 दिसंबर के कलीजियम में शामिल थे। वह 30 दिसंबर को रिटायर हुए हैं। लोकूर ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके रिटायरमेंट के बाद कौन से दूसरे दस्तावेज आए हैं। हाई कोर्ट के जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट में प्रोमोट नहीं किए जाने पर उन्होंने कहा कि कलीजियम में जो कुछ होता है वह गोपनीय है और विश्वास महत्वपूर्ण फैक्टर है।

जस्टिस लोकुर ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि जूडिशियल नियुक्ति के लिए कुछ टाइमलाइन तय किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जस्टिस केएम जोसेफ के नाम की जब कलीजियम ने सिफारिश की थी, तो सरकार कई महीनों तक फाइल पर बैठ गई थी। अगर सरकार की तरफ से कलीजियम की सिफारिश पर कोई जवाब न आए, तो फिर कलिजियम का फैसला मान्य होना चाहिए। न तो जूडिशियरी और न ही सरकार को जजों की नियुक्ति संबंधी फाइल पर बैठना चाहिए। 12 जनवरी 2018 के जजों के प्रेस कॉन्फ्रेंस की जरूरत बताई और कहा कि इसका फायदा हुआ इससे सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में पारदर्शिता आई

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