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आखिर प्रियंका पर कांग्रेस ने क्यों लगाया दांव/ सूबे में 30 से 35 सीटों पर अपनी पकड़ बेहतर मान रही है कांग्रेस

January 24, 2019 05:50 AM

COURTESY NBT JAN 24

आखिर प्रियंका पर कांग्रेस ने क्यों लगाया दांव/


सूबे में 30 से 35 सीटों पर अपनी पकड़ बेहतर मान रही है कांग्रेस
युवा और वरिष्ठ नेताओं के बीच पुल का काम करती रही हैं प्रियंका
पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रियंका में दिखता है इंदिरा का अक्स
कांग्रेस ने प्रियंका के जरिये यूपी में सबसे ज्यादा माइलेज लेने की योजना बनाई है। पार्टी का मानना है कि यह राज्य प्रियंका के लिए नया नहीं है। वह पहले भी यहां काम करती रही हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने गठबंधन को लेकर अहम भूमिका निभाई थी। इसके साथ ही प्रियंका को उतारकर पार्टी ने कहीं न कहीं पूर्व पीएम इंदिरा गांधी की इमेज का फायदा लेने की योजना बनाई है। प्रियंका का चेहरा- मोहरा, उनका मैनरिजम, लोगों से उनके कनेक्ट करने का तरीका, जैसी चीजों के चलते शुरू से ही लोग प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि देखते रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि प्रियंका के तौर पर पार्टी ने एक तेजतर्रार महिला नेत्री देने

की कोशिश की है। दरअसल, माया, ममता बनर्जी के बावजूद देश में महिला नेत्रियों की कमी खटकती रही है।
2019 को मान रही आखिरी मौका
सबसे बड़ी वजह है, कार्यकर्ताओं में नया जोश और मनोबल। तीन राज्यों में जीत के बाद प्रियंका को राजनीति में लाना एनर्जी का डबल बूस्टर माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि प्रियंका के आने से आम कार्यकर्ता खुद आगे आएगा। नई एंट्री से पार्टी के भीतर कामकाज का स्टाइल और वर्क कल्चर बदलने की भी चर्चा है। जिस तरह वह आगे बढ़कर लोगों से बात करती हैं, सहज कनेक्ट होती हैं और रणनीतियों पर गहरी नजर रखती हैं, उससे संगठन को फायदा हो सकता है। उनकी एक बड़ी बात सबको साथ लेकर चलने की है। वह लंबे समय तक पार्टी के वरिष्ठ से लेकर युवा नेताओं के बीच एक सहज पुल का काम करती रही हैं। माना जा रहा है कि उनकी इस खूबी का फायदा मिलेगा।
गांधी परिवार के ‘घर’ में सहयोगी नहीं, लीड रोल में दिखने की कोशिश कर रही पार्टी
कांग्रेस समझ रही है कि 2019 का चुनाव सिर्फ देश ही नहीं, बल्कि उसके लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। वह इसे अपने उठ खड़े होने के आखिरी मौके के तौर पर देख रही है। उसने प्रियंका के रूप में अपना सबसे बड़ा पत्ता चलकर पूरी ताकत झोंक दी। एक और कारण यह माना जा रहा है कि प्रियंका फैक्टर राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिखेगा। पार्टी आने वाले चुनाव में इसका फायदा लेने की कोशिश करेगी। फिलहाल प्रचार का सारा दारोमदार राहुल के कंधों पर रहता है। उसके पास चंद भीड़ जुटाई नेता ही हैं। यह कमी अब काफी हद तक दूर होगी। पार्टी मान रही है कि प्रियंका के आने से भरपूर मीडिया अटेंशन मिलेगी। इस कदम को संगठन की कमजोरी दूर करने की कवायद भी माना जा रहा है। पार्टी ने यूपी में अपने लिए 30-35 ऐसी सीटें चिह्नित की हैं, जहां वह अपनी पकड़ बेहतर मान रही है।
Manjari.Chaturvedi@timesgroup.com

• नई दिल्ली : लंबे इंतजार के बाद गांधी परिवार के तीसरे सदस्य प्रियंका गांधी की भी सक्रिय राजनीति में आमद हो गई। आम चुनाव से ऐन पहले यूपी में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा अपनी बहन प्रियंका को सक्रिय राजनीति में उतारने को एक मास्टरस्ट्राेक माना जा रहा है। उन्हें पूर्वी यूपी का प्रभार देकर कांग्रेस ने सूबे में एक बज खड़ा करने की कोशिश की है। प्रियंका को सामने कर पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह यूपी में सहयोगी की भूमिका में उतरने की बजाय लीड रोल में दिखना चाहेगी। बुधवार को प्रियंका के नाम के ऐलान के बाद मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि आने वाले चुनाव में कांग्रेस बैकफुट पर नहीं, बल्कि फ्रंटफुट पर खेलेगी।

यूं तो कांग्रेस के भीतर प्रियंका लंबे समय से सक्रिय थीं, लेकिन अभी वह खुद को पर्दे के पीछे रखकर पार्टी के लिए काम कर रही थीं। उन्होंने खुद को मां और भाई के चुनावी क्षेत्र अमेठी, रायबरेली तक सीमित कर रखा था। अब वह उस राज्य में सक्रिय तौर पर उतरेंगी, जो गांधी परिवार के लिए स्वाभाविक घर रहा है। कांग्रेस ने प्रियंका को ऐसे समय में उतारा है, जब राहुल एक नेता के तौर पर पूरी तरह से स्थापित हो चुके हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में उन्होंने लगातार पीएम मोदी, बीजेपी और संघ से टक्कर ली है। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने जीत की स्क्रिप्ट लिखनी भी शुरू कर दी है।

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