Tuesday, April 23, 2019
Follow us on
Haryana

JIND-वादे तो सारे नेता करैं, पर टेम पै सबकी मां सी रूसज्या सै...

January 24, 2019 05:25 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR  JAN 24

जींंद से बाहर के रिपोर्टर्स ने जो देखा, जो सुना वो लिखा : 3 प्रमुख इलाकों बाजार, यूनिवर्सिटी और अर्बन एस्टेट से जानिए... क्या है जनता का मूड, नेता और पार्टियों को किस नजर से देख रहे वोटर, पढ़िए... शहरी युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों पर केंद्रित रिपोर्ट


जब पहली बार देखा जींद
क्षेत्र का सबसे बड़ा दर्द- सरकार का विधायक नहीं चुना, इसलिए करनाल-रोहतक से पिछड़ा
बाजार से... संदीप शर्मा
अम्बाला
भास्कर न्यूज | टीम हरियाणा
सारे दलों के लिए जींद राजनीति का बिगुल क्षेत्र है। चाहे लालों के दौर की बात करें या हुड्डा-चौटाला की, सभी यहीं से राजनीतिक अभियान शुरू करते रहे हैं। फिर भी जींद का उतना विकास क्यों नहीं हुआ जितना रोहतक या करनाल में दिखता है? घंटाघर चौक के पास जलेबी बना रहे सूरज इस मुश्किल सवाल का सरल सा जवाब देते हैं-हमने कभी सरकार का विधायक नहीं चुना।
बात कुछ हद तक सही है, जींद हलके में 10 साल से इनेलो का विधायक बनता रहा है। इनेलो तीन प्लान से सत्ता से बाहर है। फिर आप उसी पार्टी का विधायक क्यों नहीं चुनते, जिसकी सरकार बनने की संभावना हो। इस पर सूरज और जलेबी के दो ग्राहक एक साथ बोले-हम पार्टी को नहीं उम्मीदवार को देखते हैं। हरिचंद मिड्‌ढा इनेलो की वजह से चुनाव नहीं जीतते थे, उनके खुद के चेहरे पर वोट डलते थे। वह गऊ आदमी थे। इस बार भी लोग पार्टी नहीं प्रत्याशी ही देख रहे हैं।
शहर के टाउन हॉल, घंटाघर चौक, काठ मंडी, पुरानी अनाज मंडी, जनता बाजार, इंदिरा बाजार हो या झांझ गेट, यहां ज्यादातर दुकानें बनिया व पंजाबी समुदाय के लोगों की हैं। इन दोनों समुदायों के करीब 15-15 हजार वोट हैं, जो शहर के हिसाब से निर्णायक हैं। भाजपा और कांग्रेस का सबसे ज्यादा जोर यहीं लग रहा है। फिर भी चुनाव के हिसाब से ये बाजार शांत नजर आते हैं। इक्का-दुक्का दुकान पर भाजपा के झंडे हैं। दुकानों पर रणदीप सुरजेवाला के स्टीकर व पंफलेट लगे हैं। वहीं सफीदों गेट की तरफ अपराही व सैनियान मोहल्ले के बाजार में भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की पार्टी की स्टीकर व पंफलेट नजर आते हैं। इंदिरा बाजार के दुकानदार मनोज बड़ी चालाकी से जवाब देते हैं-मैं सैनी होता तो लोकतांत्रिक पार्टी का आगे बताता, जाट होता तो दुष्यंत और पंजाबी होता तो कृष्ण मिड्‌ढा को, लेकिन मैं इनमें से कोई नहीं, यहां तो 31 को ही बेरा पाटेगा। हां, हर कोई जात-बिरादरी तो देखेगा ही।
गोहाना रोड पर इन बाजारों से अलग नजारा है। यहां चुनाव प्रचार वाहनों का खूब शोर है। सबसे ज्यादा वाहन दुष्यंत-दिग्विजय चौटाला की पार्टी के प्रचार में लगे हैं। सभी दलों के आसमानी गुब्बारे दूर से नजर आते हैं। हालांकि दुकानदार यहां भी किसी का झंडा नहीं लगा रहे। दुकानदार संतोष कहती हैं कि सारे दल एक ही थैली के चट्‌टे-बट्‌टे हैं। सरकार ने साढ़े चार साल बाद ग्रुप डी की भर्तियां की हैं, कहीं दूसरी सरकार आकर इसे बदल न दे। हम लोग सोच समझकर फैसला लेंगे।
शहर के बाजार: यहां शांति कुछ कहती है और शोर कुछ और
घंटाघर चौक के पास ये है सूरज जलेबी की दुकान, जहां सभी पार्टियों के स्टीकर-पोस्टर लगे हैं। वोट प्रत्याशी को देखकर ही देने की बात कहते हैं।
जींद घोषणा क्षेत्र, बड़े नेता बनाए पर जाति के फेर में उलझा विकास
जींद से करीब 10 किलोमीटर पहले ही नजारा चुनावी दिखने लगा था। बस स्टैंड से चौ. रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी के लिए निकले तो रास्ते ने अच्छे हरे-भरे शहर होने का अहसास कराया। जैसे ही मुख्य सड़क से ऑटो यूनिवर्सिटी के लिए मुड़ा तो टूटी-फूटी सड़कें हकीकत बयां करने लगीं। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पिता के नाम पर बनी इस यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में करीब 50 युवा धूप का आनंद लेते दिखे।
चुनाव पर चर्चा शुरू हुई तो संगीत के छात्र दीपक लोहान बोले-नेताओं को उठना हो तो जींद आते हैं। बड़े नेता यहीं से बनते हैं। लेकिन यह घोषणाओं का क्षेत्र बन के रह गया है। भाजपा-कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। जींद से राजनीतिक ताकत लेने वाले चौटाला भी 5 बार मुख्यमंत्री रहे। फिर भी हमारा इलाका पिछड़ा ही रह गया। इस बार सोच के वोट देंगे। चाहे नोटा ही क्यों ना दबाना पड़े। एमबीए के छात्र गौरव कहते हैं कि ये उपचुनाव नहीं बल्कि इसके जरिए सबको पूरा हरियाणा चाहिए, इसलिए जींद जरूरी है। यहां काम नहीं हुए। खेती फायदे की रही नहीं और कारखाने बंद हैंै। 10% आरक्षण से काम नहीं चलेगा। तीन साल पहले तक की भर्तियां रुकी पड़ी हैं। और हम जैसे एमबीए चार साल से डाक्यूमेंट आधार से लिंक करने में जुटे हैं। मैथ्स की छात्रा खुशी का गणित अलग ही है। कहती हैं-जींद ने विकास अपने पड़ोसी जिलों को करते हुए देखा है। यह चुनाव नेताओं के लिए है। जनता के लिए नहीं। जैसी हमारी सड़कें हैं। वैसे ही नेता हैं। अंकुर नरवाल कहते हैं जींद में विकास के नाम पर एक अंडरपास और ब्रिज है। एमसीए की रितु बात को आगे बढ़ाते हुए कहती हैं-डेढ़ साल से हमारी यूनिवर्सिटी की सड़क टूटी पड़ी है और हमारा पूरा जिला जाति में उलझ गया है। इसीलिए हम करनाल- रोहतक जैसे नहीं हो पाए। जबकि एमसीए के विपिन कहते हैं कि इस सरकार में बदलाव तो दिख रहा है। बिजली के बिल कम हुए हैं। मंदीप कहते हैं-हमारा मुद्दा बदलाव है। जिनके एजेंडे में हम हैं, उन्हीं को बनाएंगे विधायक। ये युवा ही कर सकता है। नए को मौका देंगे। एमए मनोविज्ञान के विजय भी सहमत हैं। कहते हैं-नेता का अपना एजेंडा है। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कविता महिलाओं की आजादी को बड़ा मुद्दा मानती हैं। कहती हैं- शहर में महिलाएं 6 बजे के बाद घर से नहीं निकल सकतीं। शहर की सूरत गांव जैसी है। बसों की कमी से छात्राओं को परेशानी हो रही है। सुरक्षा भी चुनौती है। नेताओं के लिए हम महज वोट बैंक हैं। महिलाएं सोच समझ कर जवाब देंगी।
उधर, कोर्ट की दीवार पर लगी 120 अधिवक्ताओं के चैंबर्स की सूची में महज 3 महिलाएं दिखीं। उनमें से एक शीला देवी मदेरणा ने चुनाव में महिलाओं की भागीदारी पर कहा कि यही इलाके की हकीकत है। 21 में से महज दो ही महिला उम्मीदवार हैं। यहां तो बेटियां विदाई के साथ ही वकालत छोड़ देती हैं, जो बहुएं वकील आती हैं, उनसे अक्सर परिवार के लोग यह कह कर छुड़वा देते हैं कि बहुओं की कमाई नहीं खाएंगे। खैर.. हम महिलाएं तो उन्हें चुनेंगे जो महिलाओं-बच्चों से जुड़े मुद्दे उठाए। हमें बराबर समझे।
यूनिवर्सिटी व कोर्ट से... गिरजेश मिश्रा
पानीपत
वादे तो सारे नेता करैं, पर टेम पै सबकी मां सी रूसज्या सै...
जींद का अर्बन एस्टेट तीन वार्डों में फैला है। यहां रहने वाले बहुत से लोगों के वोट अभी गांव से जुड़े हैं। ज्यादा वोटर उस समुदाय से हैं, जो जींद हलके में निर्णायक है। इसलिए यहां शहर के दूसरे पॉश इलाकों से अलग माहौल है। कभी इनेलो यहां मजबूत रहती थी। जेजेपी के बाद अब तस्वीर बदली है। यहां लोग खुलकर चुनाव पर चर्चा करते हैं। राय देने से लेकर शर्त लगाने तक से नहीं चूकते। यहां चुनाव को लेकर कितनी दिलचस्पी है इसका अंदाजा इस बात से लगा लें कि यहां रेहड़ी वाले से ग्राहक ही पूछ लेते हैं, कौन जीत रहा है। रेहड़ी वाले ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई कप-प्लेट वाला (दिग्विजय का चुनाव चिन्ह) और भाजपा वाले में मुकाबला है। इतने में वहां खड़ा युवक बोल पड़ा- रणदीप सुरजेवाला पूरी टक्कर में है।
थोड़ा आगे धूप सेंक रहे 5 बुजुर्गों की जुबान पर भी चर्चा है। आरके मोर कहते हैं सबको देख लिया, इब दिग्विजय को चांस देना है। इन बालकां के पिता भी जेल में है। भाजपा वाला तो कल तक इनेलो का लता ओढ़कर घूम रहा था, हां उसके पिता अच्छे इंसान थे। रही बात सुरजेवाला की वह तो पहले ही विधायक हैं, अब क्या बनने यहां आए हैं। यूं तो लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी का विनोद आशरी भी अच्छा आदमी है। विकास की बात की तो लाल सिंह मलिक कहते हैं- यह तो बात ही ना करो। न किसी ने कराया, न कोई कराएगा। हमें तो खड्ढे खोदने वाला चाहिए। ईश्वर सिंह कहते हैं - सब डरते हैं, लेकिन राजकुमार सैनी खुलकर बोलते हैं। हवा सिंह जेजेपी और कांग्रेस में मुकाबला मान रहे हैं तो रामफल खर्ब- भाजपा की ईमानदारी को मजबूत मान रहे हैं। कहते हैं-बाकी सारे लूटने वाले हैं। झूठ बोलकर वोट लेते रहे हैं। इस पर पांचों में तीखी बहस छिड़ गई। इतने में केसी शर्मा बोले-सुरजेवाला राष्ट्रीय नेता हैं। भाजपा तो पुरानी पेंशन नीति बहाल नहीं कर रही। इनेलो के तो खुद घर में लड़ाई हो रखी है।
इससे थोड़ा आगे घर के बाहर बैठीं कर्मपति और सुदेश बिना लाग लपेट कहती हैं- चौटाला के पोते नै बणावांगे। नया छोरा है। बाकी तो सारे देख लिए। वादे सारे करां, पर टेम पै सबकी मां सी रूसजै। दर्शना जवाब देती हैं कुछ नहीं कह सकते, 31 नै बता द‌्यांगे। यहां तो 2 दिन पहले तक भी वोटर पलट ज्यां सै और जीतणे आला हार जाता है। शहर में हर आमजन की जुबां पर यही चर्चा है, इस उपचुनाव में कौन जीतेगा।
अर्बन एस्टेट से... पवन राणा
करनाल
चौ. रणबीर िसंह विवि के विद्यार्थी।
अर्बन एस्टेट में चुनावी चर्चा करते बुजुर्ग

 
Have something to say? Post your comment
 
More Haryana News
14 साल बाद सावित्री जिंदल ने भजन के पोते भव्य काे दिया जीत का मंत्र हिसार| ROHTAK- नेताओं के शो से रोड रहा 3 घंटे जाम, एंबुलेंस और स्कूल बस भी फंसी HARYANA-Only 30% works announced by CM complete: RTI GURGAON-Banned diesel autos chosen form of public transport in city, finds survey 850 vending sites to come up in 8 sectors of Panchkula Parties fail women in Haryana again In Jatland, political parties turn into family fiefs HARYANA-नाम तय, नजारा दिलचस्प, नजर चुनावी समर पर अम्बाला से भाजपा प्रत्याशी कटारिया द्वारा दायर ताज़ा हलफनामे और पिछले 2014 एफिडेविट में दर्शाए अपने पैन कार्ड नंबर में अंतर दुष्यंत की पूर्व केंद्रीय मंत्री बिरेंद्र सिंह को चुनौती ‘मैं विपक्ष का सांसद और आप रहे मोदी सरकार में मंत्री रहे, आओ करें बहस, हिसार में किसने क्या करवाया’ - दुष्यंत चौटाला