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गुलाम नबी आजाद हरियाणा कांग्रेस प्रभारी, खेमों में बंटी पार्टी को जाेड़ना बड़ी चुनौती 9 माह बाद हरियाणा कांग्रेस को मिला प्रभारी

January 24, 2019 05:14 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JAN 24

गुलाम नबी आजाद हरियाणा कांग्रेस प्रभारी, खेमों में बंटी पार्टी को जाेड़ना बड़ी चुनौती
9 माह बाद हरियाणा कांग्रेस को मिला प्रभारी
प्रभारी की नियुक्ति से लोस और विस चुनाव के लिए पार्टी को और सक्रिय करने की तैयारी
भास्कर न्यूज | राजधानी हरियाणा
पिछले नौ महीने से खाली हरियाणा कांग्रेस प्रभारी के पद की जिम्मेदारी पार्टी हाईकमान राहुल गांधी ने पार्टी के सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद को दी है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में सरकार बना चुकी कांग्रेस की नजर अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा पर है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग खेमों में बंटी कांग्रेस को एकजुट करना होगा। हरियाणा हुड्डा, तंवर, सुरजेवाला, किरण, कुलदीप के खेमे हैं। जोकि भले ही दिखावे के लिए हमेशा एकजुटता के बयान देते हों, लेकिन सभी की दिशाएं अलग-अलग हैं।
ऐसे में आजाद को पार्टी को सत्ता में लाने के लिए सबसे पहले इन नेताओं को एक मंच पर लाना होगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभाल चुके कमलनाथ भी हरियाणा के प्रभारी रहे, लेकिन उनका अनुभव भी इन खेमों को एकजुटता के सूत्र में नहीं पिरो पाया। हाल ही में हरियाणा में हुए नगर निगम चुनाव में भी हुड्डा और तंवर खेमा पार्टी सिंबल चुनाव लड़ने को लेकर अलग-अलग राह पर थे। आखिर दिल्ली में मीटिंग हुई और सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने का फैसला हुआ तो तंवर खेमा नाराज भी हुआ था। इसके बाद जींद उपचुनाव में टिकट को लेकर खेमों के साथ मंथन हुआ जब कोई नतीजा नहीं निकला तो पार्टी के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला को मैदान में उतारना पड़ा। पार्टी के अनुभवी 69 वर्षीय नेता गुलाम नबी आजाद की पार्टी में अच्छी पकड़ है। वे सोनिया गांधी और राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं।
ब्लॉक और जिला कार्यकारिणी का हो सकता है गठन
कांग्रेस को नया प्रदेश प्रभारी मिलने से पार्टी की सक्रियता और बढ़ सकती है। क्योंकि चार साल से संगठन नहीं है। न तो जिलों में कार्यकारिणी है और न ही ब्लॉक स्तर पर। प्रदेशाध्यक्ष को बदलने की भी चर्चाएं चलती रही हैं। प्रदेश के नेताओं ने सर्व सम्मति से प्रस्ताव पास कर प्रदेशाध्यक्ष का निर्णय पहले ही हाईकमान पर छोड़ा जा चुका है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेशाध्यक्ष की कमान भी किसी दूसरे नेता को दी जा सकती है या फिर कुछ कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा पार्टी की जिला अौर ब्लाॅक कार्यकारिणी का गठन भी अब जल्द हो सकता है

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