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प्रियंका (आई) राहुल के लिए राजनीति में... मोदी-योगी के इलाके पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी बनीं

January 24, 2019 05:07 AM

COURTESY DAINIK BHASKAR JAN 24


प्रियंका (आई)
राहुल के लिए राजनीति में...
मोदी-योगी के इलाके पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी बनीं

भास्कर न्यूज | नई दिल्ली/अमेठी
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले सीटाें के लिहाज से सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश में मास्टर स्ट्रोक खेला है। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी वाड्रा को पूर्वी उत्तर प्रदेश का पार्टी महासचिव नियुक्त किया है। प्रियंका फिलहाल विदेश में हैं और वह एक फरवरी को वापस आने के बाद जिम्मेदारी संभालेंगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पूर्वी उत्तरप्रदेश से ही चुनाव लड़कर जीते हैं। कभी यह कांग्रेस का गढ़ था, अब भाजपा का है। इसी इलाके में प्रियंका को प्रभारी बनाए जाने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा- यूपी में हम बैकफुट पर नहीं, फ्रंटफुट पर खेलेंगे। दूसरी ओर, यूपी के भाजपा प्रभारी जेपी नड्‌डा ने कहा कि यह कांग्रेस के परिवारवाद का ही विस्तार है। इससे राहुल की नाकामी सामने आ गई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाया गया है। साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पार्टी महासचिव पद से मुक्त करते हुए उनके स्थान पर केसी वेणुगोपाल को महासचिव (संगठन) नियुक्त किया गया है।
तैयारी: रायबरेली से लड़ सकती हैं
राजनीतिक गलियारे में अटकलें है कि प्रियंका गांधी अपनी मां सोनिया गांधी की संसदीय सीट रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। वे 1999 से ही रायबरेली में सोनिया के लिए प्रचार करती रही हैं।
चुनौती: पार्टी को पुनर्जीवित करना
प्रियंका को जिम्मेदारी ऐसे समय सौंपी गई है, जब यूपी में कांग्रेस के पास सिर्फ दो सीटें हैं। दोनों ही सीटें नेहरू-गांधी परिवार की परंपरागत सीटें हैं। जबकि पूरे प्रदेश में कांग्रेस तीसरी या चौथे नंबर की पार्टी बनी हुई है।
रणनीति: सपा-बसपा से गठबंधन
मायावती और अखिलेश कांग्रेस के बिना ही गठबंधन कर चुके हैं, लेकिन कांग्रेस उनके साथ जाने को तैयार है। राहुल ने बुधवार को भी कहा- मैं मायावती जी और अखिलेश का आदर करता हूं। हम साथ लड़ सकते हैं।
कांग्रेस (आई) बनाने वाली इंदिरा गांधी ने 1984 में मौत से कुछ रोज पहले कहा था- प्रियंका राजनीति में जरूर आएंगी। तब प्रियंका सिर्फ 12 साल की थीं।
फुटप्रिंट: लखनऊ के नेहरू भवन में इंदिरा का ऑफिस था, उसे अब प्रियंका के लिए तैयार करने का काम शुरू हुआ
प्रियंका को भी ऐसी स्थिति में राजनीति में उतारा गया है, जैसी स्थिति 1997 में बनी थी। तब भी कांग्रेस लगभग हाशिए पर थी और सभी बड़े कांग्रेस नेताओं ने मिलकर सोनिया काे राजनीति में आने के लिए मनाया था। अब प्रियंका को उतारा गया है। इस घाेषणा के बाद उत्तरप्रदेश कांग्रेस कमेटी ने लखनऊ के नेहरू भवन के उसी कमरे में प्रियंका का ऑफिस बनाने का काम शुरू कर दिया है, जहां इंदिरा गांधी बैठा करती थीं। नेहरू भवन में ऑफिस में रेनोवेशन का काम बुधवार को शुरू हुआ।
इंदिरा: 23 की उम्र में इंडियन लीग में आईं, 42 में अध्यक्ष बनीं
इंदिरा गांधी 1930 में इंडियन लीग की सदस्य बनीं। 1951 के चुनाव में पिता और पति के लिए प्रचार किया। 42 साल की उम्र में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद 1966 से 1977 तक, फिर 1980 से 1984 तक चार बार प्रधानमंत्री रहीं।
सोनिया: राजीव के बाद पार्टी चलाई, सदस्य 51 की उम्र में बनीं
1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया नेताओं से काफी दूर हो गईं। नरसिम्हा सरकार की हार के बाद सोनिया ने 1997 में पार्टी सदस्यता ली। 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। 1999 में चुनाव जीतीं। 2004, 2009 में कांग्रेस को सत्ता दिलवाई।
कमान पूर्वी यूपी की, नजर पूरे देश पर
कांग्रेस ने आम चुनाव से ठीक पहले प्रियंका को महासचिव बनाया
8 प्रधानमंत्री देने वाले पूर्वी उत्तरप्रदेश में अगले महीने कांग्रेस का प्रभार संभालेंगी
सक्रिय राजनीति में आने वाली नेहरू-गांधी परिवार की 11वीं सदस्य
16 की उम्र में पहला भाषण दिया था, 47 की उम्र में राजनीति में औपचारिक एंट्री
अब हम फ्रंटफुट पर खेलेंगे: राहुल
हम बैकफुट पर नहीं फ्रंटफुट पर खेलेंगे। प्रियंका और ज्योतिरादित्य को एक मिशन के लिए यूपी भेजा है। मैं काफी खुश हूं कि मेरी बहन, जो कर्मठ और सक्षम हैं, वह अब मेरे साथ काम करेंगी।
-राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष
यह परिवार का विस्तार: रविशंकर
प्रियंका को महासचिव बनाने से कांग्रेस पार्टी में गांधी परिवार का विस्तार है। उन्हें सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रभार क्यों दिया गया। हमें लगता है कि वह और बड़ी भूमिका की हकदार हैं।
-रविशंकर प्रसाद, कानून मंत्री
असली खबर यही: प्रशांत किशोर
इस फैसले का लंबे समय से इंतजार था। लोग उनके राजनीति में आने के समय और भूमिका पर बहस कर सकते हैं, लेकिन मेरे लिए असली खबर यह है कि उन्होंने डुबकी लगाने का फैसला किया।
-प्रशांत किशोर, उपाध्यक्ष, जदयू

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