Monday, December 10, 2018
Follow us on
Niyalya se

नेताओं वाले केसों का आलम, 27 साल से आरोप भी तय नहीं जेल में कैदियों की भीड़, कोर्ट चिंतित

December 05, 2018 05:56 AM

COURTESY NBT DEC 5

नेताओं वाले केसों का आलम, 27 साल से आरोप भी तय नहीं


जेल में कैदियों की भीड़, कोर्ट चिंतित
दिनाकरण पर चलेगा भ्रष्टाचार का केस
'अलग राय के कारण फैसलों में दखल न दें'
बिहार में

304 केस पेंडिंग
केरल में

312 केस
सबसे ज्यादा यूपी में

992 केस
देशभर में पूर्व और मौजूदा सांसदों-विधायकों के खिलाफ

4,122

आपराधिक केस हैं पेंडिंग

• विशेष संवाददाता, नई दिल्ली

 

देश में पूर्व और मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे पेंडिंग केसों का आलम यह है कि कुछ मामलों में 1991 के बाद से आरोप भी तय नहीं हो सके हैं। देश में 4,122 जन प्रतिनिधियों के खिलाफ आपराधिक केस पेंडिंग हैं। यह बात मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में उस वक्त पता लगी जब राज्यों और उच्च न्यायालयों से मिले डेटा को कोर्ट के सामने रखा गया। वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया की ओर से अदालत में रखे गए इस डेटा के मुताबिक, इनमें से कुछ 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं। इनमें 430 केस ऐसे हैं जिनमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। साथ ही 2324 केस मौजूदा जनप्रतिनिधि पर भी हैं।

अदालत बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कहा गया था कि आपराधिक मामलों में दोषी पाए गए राजनीतिज्ञों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए और तेजी से सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन हो।

कोर्ट ने इस संबंध में पूरा ब्यौरा मांगा है ताकि इन केसों की जल्द सुनवाई के लिए पर्याप्त संख्या में विशेष अदालतों का गठन किया जा सके। हंसारिया की तरफ से पेश किए गए डेटा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 992 केस यूपी में पेंडिंग हैं जबकि केरल में 312 जबकि बिहार में 304 केस पेंडिंग है। वहीं दिल्ली में 124 केस पेंडिंग है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया गया था कि ऐसे केसों को सुनने के लिए देश भर में 12 स्पेशल कोर्ट बनाए गए हैं जिनमें दिल्ली में दो कोर्ट हैं।

हर जिले में बने स्पेशल कोर्ट

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की बेंच ने कहा कि मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई के लिए बिहार और केरल में वहां के हाई कोर्ट जरूरत के मुताबिक विशेष न्यायालय बनवाए। 14 दिसंबर तक अमल की रिपोर्ट भी दें।• विस, नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने जेलों में तय जगह से काफी ज्यादा भीड़ होने पर चिंता जाहिर की है। इनमें भी 67 फीसदी विचाराधीन कैदी हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे केसों का निपटारा जल्द किए जाने की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2019 के पहले छह महीने में अंडरट्रायल रिव्यू कमिटी हर महीने मिले और राज्यों की लीगल सर्विस अथॉरिटी को अंडरट्रायल के केसों की स्टेटस रिपोर्ट दे।
दिल्ली की एक अदालत ने अन्नाद्रमुक के पूर्व नेता टी.टी.वी. दिनाकरण पर दो पत्ती वाला चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए चुनाव आयोग के अधिकारियों को कथित रिश्वत देने के मामले में आरोप तय कर दिए हैं। दिनाकरण पर आपराधिक साजिश रचने, साक्ष्यों को नष्ट करने और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलेगा। (भाषा)
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट समेत तमाम अपीलीय अदालतों से कहा है कि आपराधिक मामलों में जिन आरोपियों को निचली अदालतों से बरी किया जाता है, उन फैसलों में अपनी अलग राय रखने की वजह मात्र से दखल नहीं देना चाहिए। कोर्ट ने पहले के दिए अपने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब तक बहुत जरूरी कारण और बाध्यकारी आधार न हों, निचली अदालत के फैसले में दखल नहीं देना चाहिए। अगर निचली अदालत ने बरी करने को लेकर कोई संभावित मत व्यक्त किया है तो दखल नहीं दिया जाना चाहिए। (विस)

Have something to say? Post your comment