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HARYANA-पांडव बनाम कौरव

November 09, 2018 06:29 AM

COURTESY DAINIK TRIBUNE NOV 9

पांडव बनाम कौरव
हरियाणा में इन दिनों सियासी ‘महाभारत’ छिड़ी है। यह बात अलग है कि इंडियन नेशनल लोकदल और चौटाला परिवार में चल रही वर्चस्व की लड़ाई में दोनों ही एक-दूसरे को कौरव-पांडव बताने में जुटे हैं। तिहाड़ जेल से चौदह दिन की फरलो पर बाहर आते ही इनेलो प्रधान महासचिव अजय चौटाला ने खुद और अपने परिवार को पांडव बता दिया। खैर, राजनीति में उतार-चढ़ाव चलते रहते हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी आम है, लेकिन दोनों भाइयों के बीच चल रही सत्ता की लड़ाई इस बार काफी गंभीर हो चली है। कहने वाले कह रहे हैं कि कौरव कौन हैं और पांडव कौन, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।
खट्टर की पूजा
खट्टर काका इन दिनों सियासी रंग में हैं। वर्करों की नाराज़गी को वे भांप चुके हैं, इसीलिए अकसर वर्करों के साथ मेल-मिलाप की कोशिश में रहते हैं। अब चुनावों का समय नजदीक है, ऐसे में वर्करों के बिना काम नहीं चलने वाला। पार्टी नेतृत्व भी कई बार काका को नसीहत दे चुका है कि वर्करों की सुनवाई करो, नहीं तो बात बिगड़ जाएगी। देर से ही सही, पर अपने काका को यह बात अच्छे से समझ में आ गई है। अब दिवाली को ही ले लें। सत्ता के शुरुआती दिनों में इस तरह के ताम-झाम से दूर रहने वाले काका इस बार दिवाली पर पंचकूला में पार्टी के एक वर्कर के घर ही लक्ष्मी पूजन करने जा पहुंचे। इंदिरा कालोनी के पार्शनाथ मोर्य नाम के किसी पुराने वर्कर के घर जाकर काका ने दिवाली मनाई। यही नहीं, कालोनी के लोगों से भी दिल खोलकर बात की और उनकी समस्याएं सुनीं। वैसे काका अगर यह स्टाइल शुरुआत से ही अपना कर चलते तो आज वे सही मायनों में प्रदेश की ‘लाल सियासत’ के उस मुकाम को हासिल कर चुके होते, जिसके लिए उन्होंने शपथ ग्रहण के दौरान ही अपने नाम के पीछे से खट्टर को हटाकर केवल ‘लाल’ रखा था। देर आए दुरुस्त आए…!
राव की मुलाकात
‘रामपुरा हाउस’ वाले बड़े राव साहब पटाखेबाजी के बड़े शौकीन हैं। दिवाली वाले पटाखे नहीं, बल्कि वे ‘सियासी पटाखे’ छोड़ते हैं। अब छोटी दिवाली पर उन्होंने ऐसा बड़ा पटाखा फोड़ा कि भाजपा नेतृत्व तक में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हिसार वाले युवा सांसद दुष्यंत चौटाला के साथ उनकी एक घंटा 35 मिनट हुई 6 तुगलक रोड कोठी की मुलाकात इनेलो व कांग्रेस से अधिक भाजपा गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। रही-सही कसर, इनेलो प्रधान महासचिव अजय चौटाला ने पूरी कर दी। मीडिया ने जब अजय से मुलाकात को लेकर सवाल किया तो कहा कि राव इंद्रजीत सिंह और दुष्यंत चौटाला की मुलाकात के राजनीतिक मायने ही निकाले जाने चाहिए। यानी तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है कि आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में और भी बड़ा धमाका हो सकता है। अब देखना यह होगा कि अगला पटाखा किस-किस की नींद उड़ाता है।
पहली दिवाली
लगभग 30 साल बाद चौटाला परिवार में दो दिवाली मनाई गई। देवीलाल के समय जब चौधरी रणजीत सिंह परिवार से अलग हुए तो परिवार की दिवाली अलग-अलग मनाई गई। इस दिवाली पर भी कुछ ऐसे ही हालात देखने को मिले। अजय चौटाला ने अपने परिवार सहित सिरसा के बरनाला रोड स्थित अपने आवास पर परिवार के साथ दिवाली मनाई। उनकी पत्नी नैना चौटाला व बेटों दुष्यंत व दिग्विजय सिंह के अलावा उनके करीबी लोग दिवाली पर मौजूद रहे। वहीं, विपक्ष के नेता एवं अजय के छोटे भाई अभय सिंह चौटाला ने तेजाखेड़ा फार्म हाउस पर दिवाली मनाई। दोनों परिवारों के बीच बोलचाल तक नहीं हुई। परिवार की इस लड़ाई में पार्टी वर्कर खासतौर पर वो लोग बुरी तरह से घिरे हुए हैं, जिनके दोनों के साथ पुराने और गहरे संबंध हैं। ऐसे लोगों की संख्या काफी रही जो अजय के परिवार को भी दिवाली की शुभकामनाएं देने पहुंचे और अभय के साथ भी दिवाली की खुशियां साझा कीं।
राहत की बात
हरियाणा के लिए इस बार की दिवाली राहतभरी रही। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दिवाली पर कम पटाखेबाजी हुई। इससे प्रदूषण पर भी अधिक असर नहीं पड़ा। सुप्रीमकोर्ट भी पटाखों की बिक्री पर काफी सख्त रहा। ऐसे में सुप्रीमकोर्ट के आदेशों का पूरा असर देखने को मिला। वैसे इस बार बारूद के पटाखों से अधिक प्रदेश की राजनीति में सियासी पटाखे फूट रहे हैं। चौटाला परिवार में तो रोजाना आतिशबाजी हो ही रही है। भाजपा में भी पटाखे फूटने की शुरुआत हो गई है।
गड्ढों का इतिहास
हरियाणा की राजनीति में ‘गड्ढों’ की बड़ी भूमिका रही है। 1999 से 2004 तक सत्ता में रही चौटाला सरकार के समय के ‘गड्ढों’ को कांग्रेस ने मुद्दा बनाया था। कांग्रेसियों ने फैक्टरियों के बाहर गड्ढे खुदवाने को लेकर चौटाला को खूब घेरा था। 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने ‘गड्ढा चालीसा’ का पाठ पढ़ना शुरू कर दिया। विरोधियों ने जब भी विकास की बात उठाई तो भाई लोगों ने कहा कि हम तो कांग्रेसियों के खोदे गड्ढों को भर रहे हैं। अब भाई लोगों को सत्ता में आये चार वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन सड़कों के गड्ढे खत्म नहीं हुए हैं। पिछले दिनों खट्टर काका ने पीडब्ल्यूडी, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, मार्केटिंग बोर्ड, शहरी स्थानीय निकाय और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की बैठक भी ली। इसी में तय हुआ था कि दिवाली तक सड़कों को गड्ढामुक्त कर दिया जाएगा, लेकिन गड्ढे हैं कि अब भाजपाई भाई लोगों का पीछा नहीं छोड़ रहे हैं।
आखिर में दोस्ती
खट्टर काका पिछले दिनों नयी दिल्ली में अपने राजनीतिक गुरु और पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पहुंचे। राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हुई और काका ने अपनी सरकार के चार वर्ष के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड भी पीएम के सामने रखा। अगले एक वर्ष के रोडमैप के बारे में भी उन्होंने पीएम को बताया। काका को अपने ‘गुरु’ का पूरा ‘आशीर्वाद’ मिला हुआ है। इसीलिए वे इन दिनों खुलकर बैटिंग कर रहे हैं। अब अपने बादली वाले ‘छोटे स्वामीनाथन’ भी कहां कम हैं। इसी दिन उन्होंने भी पीएम से मुलाकात की। सांपला रैली में पीएम ने धनखड़ का सियासी कद यह कहकर बढ़ा दिया था कि वे (धनखड़) उनके पुराने संघर्ष के साथी हैं। ताजा मुलाकात के दौरान पीएम ने अपनी दोस्ती को फिर से साबित कर दिखाया। बताते हैं कि जैसे ही छोटे स्वामीनाथन, मोदी से मिलने पहुंचे तो मोदी ने खड़े होकर उन्हें अपनी बगल में बुला लिया। पहले तो बादली वाले साहब डर गए, लेकिन बाद में अहसास हुआ कि उन्हें फोटो के लिए बुलाया है। अब उन्होंने इसी फोटो को कोठी के ड्राइंग रूम की शोभा बना रखा है।
-दिनेश भारद्वाज

 
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