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Haryana

राज्य के 3 जिलों में 100-100 बिस्तरों से युक्त मातृ एवं बाल स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग स्थापित की जाएगी:विज

October 30, 2018 04:39 PM
हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि मां एवं नवजात बच्चे की सुरक्षा के लिए राज्य के 3 जिलों में 100-100 बिस्तरों से युक्त मातृ एवं बाल स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग स्थापित की जाएगी। इनमें मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को और कम करने के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हरियाणा में प्रत्येक विंग की स्थापना के लिए 20 करोड़ रुपये की सैद्घांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में प्रत्येक एमसीएच के लिए एक-एक करोड़ रुपए टोकन मनी के तौर पर मंजूर किए हैं तथा शेष राशि एमसीएच के कार्य शुरू होने के पश्चात जारी की जाएगी। उन्होंने बताया कि उत्कृष्टï श्रेणी के तृतीय श्रेणी के अस्पतालों से भी इनका लिंक रखा जाएगा ताकि आवश्यकता पडऩे पर मरीज को रैफर की सुविधा मिल सके। इस प्रकार के 100 बिस्तरों से युक्त केन्द्रों को विभिन्न चरणों में प्रदेश के सभी जिलों में स्थापित किया जाएगा।
श्री विज ने बताया कि नई एमसीएच विंग की स्थापना पंचकूला, पानीपत तथा हिसार के मौजूदा स्वास्थ्य केन्द्रों, उपमंडल अस्पताल या जिला सिविल अस्पतालों में ही की जाएगी। इनमें प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात की गुणवत्तापूर्वक स्वास्थ्य सेवाएं तुरन्त उपलब्ध करवाई जाएगी, जिनमें व्यापक प्रजनन, माता, नवजात तथा बाल स्वास्थ्य की आधुनिक सुविधाएं प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही डिलिवरी के बाद 48  घंटे तक ठहरने की व्यवस्था तथा सुरक्षित एवं सम्मानपूर्वक मातृत्व देखभाल की सुविधा होगी।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन सभी एमसीएच विंग में ओपीडी, लेबर रूम, आई सी यू, एसएनसीयू, ओटी रूम, डिलिवरी से पहले एवं बाद में ठहरने के कक्ष, एवं एएनसी, पीएनसी व प्राईवेट वार्ड, प्रयोगशालाए, अल्ट्रासाऊंड सहित प्रतिक्षा कक्ष, पैंट्री, एम्बूलैंस इत्यादि की सुविधा होगी। इसके अलावा, मरीज एवं तीमारदार के लिए उत्कृष्टï सुविधाएं, समुचित पावर सप्लाई तथा पैब्लिक एड्रस प्रणाली भी होगी।
श्री विज ने बताया कि हमारी सरकार द्वारा शुरू की अनेक उत्कृष्टï चिकित्सा सुविधाओं से प्रदेश की एमएमआर तथा आईएमआर में भारी कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा हमने वर्ष 2030 तक मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को और कम करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत एक लाख जीवित बच्चों पर मातृ मृत्यु दर को कम करके 70 तक एवं प्रति एक हजार जीवित बच्चों पर नवजात मृत्यु दर को कम करके 12 तथा 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों की दर कम करके 25 प्रति हजार तक लाने का लक्ष्य है।  
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