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स्मृति इरानी बोलीं, आरोपों पर खुद सफाई देनी चाहिए

October 12, 2018 05:43 AM

MeToo अभियान को मिला महिला मंत्रियों का साथ

स्मृति इरानी बोलीं, आरोपों पर खुद सफाई देनी चाहिए

 

केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे पर विजयवर्गीय बोले, सरकार लेगी निर्णय
संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ दत्तात्रेय होसबोले
संबंधित व्यक्ति खुद सक्षम है कि वह इसपर जवाब दे सके, क्योंकि मैं वहां मौजूद नहीं थी तो इसपर कुछ नहीं कह सकती। उन्हें खुद बयान जारी करना चाहिए।

- स्मृति इरानी
इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस अभियान पर पहली बार राय व्यक्त की है। संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने फेसबुक की भारत में पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अखी दास के एक पोस्ट को शेयर किया है। इस पोस्ट में अखी ने लिखा है कि अपने अत्याचार की कहानी बताने वाली महिला पत्रकार के समर्थन के लिए आपको मी टू अभियान की जरूरत नहीं है। आपको महिला होने की भी जरूरत नहीं है। आपको केवल सही और गलत के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है। होसबोले ने इस पोस्ट के स्क्रीनशॉट को ट्वीट करते हुए लिखा है कि अखी ने वही व्यक्त किया जो वह महसूस करते हैं।


संघ ने किया अभियान का समर्थन• एनबीटी, नई दिल्ली

 

मी टू अभियान को बीजेपी की महिला मंत्रियों का साथ मिला है। केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति इरानी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने अभियान का समर्थन किया है। स्मृति इरानी ने कहा है कि यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे केंद्रीय मंत्री एम.जे. अकबर इस मामले पर बोलने के लिए खुद सक्षम हैं। उन्हें बयान जारी करना चाहिए। वहीं, बीजेपी के महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अकबर के इस्तीफे की मांग पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस बारे में सरकार को निर्णय लेना है।

मी टू अभियान और इसके लपेटे में आए अकबर को लेकर गुरुवार को दिनभर बयानबाजी होती रही। एक टीवी इंटरव्यू में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वह अकबर के मामले पर कहने के लिए सही व्यक्ति नहीं हैं, लेकिन उन महिलाओं के साहस का समर्थन करती हैं, जिन्होंने यौन उत्पीड़न के खिलाफ बोला है। इसी तरह मेनका गांधी से जब पूछा गया कि यौन उत्पीड़न के मामले में बॉलिवुड से लेकर राजनीतिक हस्तियों के नाम आ रहे हैं, क्या उनपर कार्रवाई होनी चाहिए, तो उन्होंने कहा कि जांच होनी चाहिए। बड़े पदों पर रहने वाले मर्द अक्सर ऐसा करते हैं। यह मीडिया, राजनीति और अन्य कंपनियों पर भी लागू होता है। जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने अकबर के मामले पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन अभियान का समर्थन किया।

'10-20 साल बाद शिकायत सही नहीं'

ऐसा नहीं है कि सभी इस अभियान के साथ हों। संजय राउत ने कहा है कि 10-20 साल के बाद शिकायत करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि शेक्सपियर का वाक्य 'जस्ट यू टू' हिंदुस्तान में मी टू हो गया है। रामदास अठावले ने भी इस कैंपेन का विरोध करते हुए कहा है कि अकबर का पक्ष सुना जाना चाहिए। रीता बहुगुणा जोशी ने कहा है कि यह इस्तीफे का सवाल नहीं है। सवाल किसी पर लगाए गए आरोपों को साबित करने का है। बीजेपी सांसद उदित राज ने एक बार फिर इसका विरोध करते हुए सवाल उठाया है कि अगर महिला के आरोप गलत साबित होते हैं तो क्या पुरुष का सम्मान लौटाया जा सकता है। केवल शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई या इस्तीफे की मांग का अर्थ है कि पुलिस या कानून व्यवस्था की कोई जरूरत नहीं है।

 

 
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