Monday, September 23, 2019
Follow us on
 
Haryana

अभय के कंधे पर चौटाला ने फिर रखा हाथ!

October 12, 2018 05:33 AM

COURTESY DAINIK TRIUBNE OCT 12

अभय के कंधे पर चौटाला ने फिर रखा हाथ!
दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 11 अक्तूबर
इनेलो सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला परिवार में चल रहे ‘राजनीतिक कलेश’ के बीच खुलकर अपने छोटे बेटे अभय सिंह चौटाला के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं। गोहाना की सम्मान दिवस रैली में इशारों-इशारों में अभय की पीठ थपथपाने के बाद बृहस्पतिवार को संगठन में किये बदलाव के जरिये उन्होंने फिर से अभय चौटाला के कंधे पर हाथ रख दिया है। ‘राजनीतिक विरासत’ की इस ‘जंग’ में चौटाला का छोटे बेटे के साथ आना, आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति को नया मोड़ भी दे सकता है।
भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री स्व़ चौ़ देवीलाल के परिवार में वर्चस्व की यह लड़ाई नई नहीं है। देवीलाल और उनके भाई साहब सिंह के जमाने को छोड़ भी दें तो 1990 के दशक में देवीलाल के सामने ठीक ऐसी ही चुनौती आई थी, जिसका सामना आज चौटाला कर रहे हैं। बेशक, किसी जमाने में देवीलाल के सबसे करीबी उनके बेटे जगदीश सिंह हुआ करते थे और बाद में प्रताप सिंह चौटाला के प्रति भी उनका पूरा लगाव रहा।
प्रताप सिंह को राजनीति में भी देवीलाल लेकर आए और उन्हें विधायक भी बनाया। बाद में पार्टी का अधिकांश कामकाज ओमप्रकाश चौटाला और रणजीत सिंह के पास ही रहा। देवीलाल के राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय होने और डिप्टी पीएम बनने के बाद हरियाणा में राजनीतिक विरासत का सवाल उठा। उस समय देवीलाल ने ओपी चौटाला को यह कमान सौंपी थी। रणजीत सिंह इससे काफी खफा भी हुए।
उस दौर में परिवार की इस कलह का असर संगठन और सरकार पर भी पड़ा था। रणजीत सिंह के समर्थन में कई कैबिनेट मंत्रियों ने इस्तीफे दे दिए थे। पिछले 14 वर्षों से सत्ता से वनवास झेल रही इनेलो अब फिर से दोराहे पर है। पिता व बड़े भाई के जेल जाने के बाद से संगठन को संभाल रहे अभय सिंह चौटाला खुद सीएम के सबसे बड़े दावेदार हैं। वहीं ज्येष्ठ पुत्र होने के नाते अजय सिंह चौटाला का परिवार अपने कुनबे की राजनीतिक विरासत को संभालना चाहता है।
बहरहाल, ओमप्रकाश चौटाला ने प्रत्यक्ष तौर पर बेशक कुछ न कहा हो लेकिन इशारों में उन्होंने अभय को अपनी पसंद बता दिया है। गोहाना रैली में ही उन्होंने कह दिया था कि उनके जेल जाने के बाद इनेलो संगठन और भी मजबूत हुआ है। वहीं अब अभय के रास्ते में रोड़ा बनते दिख रहे दुष्यंत व दिग्विजय सिंह चौटाला को भी युवा व इनसो को भंग करने का फरमान सुनाकर चौटाला ने अपनी आंखें दिखा दी हैं। चौटाला के बारे में एक धारणा यह भी है कि फैसला लेते वक्त वे नफे-नुकसान के बारे में नहीं सोचते।
छोटा हुआ पार्लियामेंटरी बोर्ड : इनेलो ने अपने पार्लियामेंटरी बोर्ड को भी छोटा किया है। ओपी चौटाला खुद इस बोर्ड के चेयरमैन बने रहेंगे। डॉ़ केसी बांगड़ को बोर्ड से बाहर किया गया है। वे राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद पर ही रहेंगे। डा. नंदलाल चौधरी का निधन हो चुका है। बाकी सदस्यों में प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा, बीडी ढालिया, अंजू सिंह व कमल नागपाल शामिल रहेंगे।

दुष्यंत के करीबी 2 जिलाध्यक्ष नपे
चौटाला ने अपने सांसद पोते दुष्यंत चौटाला को झटका देते हुए युवा इनेलो की कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। युवा इनेलो की प्रदेश कार्यकारिणी के अलावा अधिकांश जिलों के पदाधिकारी भी दुष्यंत के करीबी थे। यही नहीं, दुष्यंत के संसदीय क्षेत्र यानी हिसार के जिलाध्यक्ष राजेंद्र लितानी को भी हटा दिया है। अब हरियाणा की कमान सतवीर सियाय के पास रहेगी। इसी तरह की गाज़ दादरी जिलाध्यक्ष नरेश द्वारका पर भी पड़ी है। उनकी जगह विजय पंचगांवा को जिलाध्यक्ष बनाया है। चौटाला ने पूर्व विधायक निशान सिंह को भी किसान सैल संयोजक से मुक्त करते हुए उनकी जगह पूर्व विधायक कलीराम को जिम्मेदारी दी है। कर्मचारी सैल में बदलाव करते हुए पूर्व संयोजक धारा सिंह को अब सैल का प्रभारी नियुक्त किया है। उनके स्थान पर संयोजक का दायित्व बलवीर सिंह को दिया गया है। एक नए सैल का गठन करते हुए मेडिकल सैल का संयोजक डा. केसी काजल को बनाया गया है।

ताजा बदलाव
ओपी चौटाला ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का पुनर्गठन किया है। वे खुद पार्टी सुप्रीमो बने रहेंगे। पूर्व विधायक केएल शर्मा को उपाध्यक्ष पद से हटाया गया है। उनकी जगह अश्विनी दत्ता व रामभगत गुप्ता की नई एंट्री हुई है। साधुराम चौधरी, नारायण प्रसाद अग्रवाल, अनंत कुमार तंवर व कुमारी फूलवती राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे। सेवानिवृत्त आईएएस आरएस चौधरी प्रधान महासचिव रहेंगे और राष्ट्रीय प्रवक्ता का जिम्मा डॉ़ केसी बांगड़ व कोषाध्यक्ष का दीपचंद गोयल के पास पहले की तरह रहेगा। राष्ट्रीय महासचिव की संख्या 4 से घटाकर 3 की गई है। राव कंवर सिंह को हटाया गया है और रमेश गर्ग, बृज शर्मा व कै़ इंद्र सिंह बने रहेंगे। इसी तरह से 5 सचिवों में से 4 – युद्धबीर आर्य, चत्तर सिंह, बलवंत सिंह मायना व सुरेश मित्तल पुराने ही हैं। बलदेव वाल्मीकि की जगह अशोक शेरवाल को राष्ट्रीय संगठन में शामिल किया है।

दादा से मुलाकात करेंगे दोनों भाई
सूत्रों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के बीच हिसार के सांसद दुष्यंत सिंह चौटाला व इनसो अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला जल्द अपने दादा एवं पार्टी सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात कर सकते हैं। 17 अक्तूबर को चौटाला की फरलो पूरी हो रही है और वे 18 को वापस तिहाड़ लौटेंगे। इससे पहले दुष्यंत व दिग्विजय की उनसे मुलाकात होने की संभावना है।

जेल में पिता से मिले दिग्विजय
इनसो कार्यकारिणी भंग होने के बाद दिग्विजय सिंह चौटाला ने अपने पिता एवं पूर्व सांसद डा. अजय सिंह चौटाला ने तिहाड़ जेल में मुलाकात की। इससे पहले गत दिवस दुष्यंत चौटाला भी अजय से मिलकर आए थे। माना जा रहा है कि पार्टी के मौजूदा हालात और ताजा घटनाक्रम के बारे में पिता-पुत्र के बीच बातचीत हुई होगी।

इनेलो अब खत्म : दीपेंद्र
रोहतक (निस) : कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि इनेलो अपनी करतूतों के चलते 15 साल से सत्ता से बाहर है और 3 बार हारने का रिकार्ड बना चुकी है। उन्होंने कहा कि इनलो अब खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि छात्र संघ के अप्रत्यक्ष चुनाव को वह चुनाव नहीं मानते। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोगों की भावनाओं के अनुसार सही समय पर कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी में बदलाव किया जाएगा। इसका फैसला हाईकमान करेगा। दीपेंद्र ने बृहस्पतिवार को कई निजी कार्यक्रमों में शिरकत की।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का सर छोटूराम पर ट्वीट करना सही नहीं था। महापुरूष सबके होते हैं, किसी जाति विशेष के नहीं। उन्हाेंने कहा कि केंद्र सरकार स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू कर किसानों को लाभ मिलने की बात झूठ बोल रही है। हरियाणा में किसी पार्टी गठबंधन के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस का गठबंधन प्रदेश की जनता के साथ है और राष्ट्रीय स्तर पर हाईकमान गठबंधन को लेकर जो फैसला करेगा वह मान्य होगा।

इनसो कार्यकारिणी को नहीं किया भंग : प्रदीप देशवाल
रोहतक (हप्र) : इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला द्वारा इनसो की कार्यकारिणी भंग करने की घोषणा को गलत बताते हुए कहा है कि इनसो के संविधान के अनुसार इनसो की कार्यकारिणी को भंग करने का अधिकार इनसो के संस्थापक डा. अजय सिंह चौटाला को है व उनके बाद यह अधिकार इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश अध्यक्षों को है। इनके अलावा कोई भी व्यक्ति इनसो से सम्बन्धित संगठनात्मक निर्णय नहीं ले सकता।

प्रदीप देशवाल ने तो इनसो की कार्यकारिणी भंग होने की बात को अफवाह तक बता दिया। इनसो प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि इनसो की तरफ से कोई भी कार्यकारिणी भंग नहीं की गई है।

Have something to say? Post your comment