Tuesday, December 11, 2018
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Haryana

अभय चौटाला पार्टी में सर्वशक्तिमान,इनेलो की युवा इकाई और इनसो को इनेलो सुप्रीमों ने किया भंग

October 11, 2018 09:17 PM

रमेश शर्मा 

चंडीगढ़ :- हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एंव इनेलो सुप्रीमों चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने एक सख्त निर्णय लेते हुए गोहाना रैली में कई गई अनुशासनहीनता के मद्देनजर इनेलो की युवा इकाई और इनसो को भंग का दिया।इनेलो के इन दोनों युवा संगठनों के भंग होने के पश्चात हिसार से इनेलो के युवा सांसद दुष्यन्त चौटाला और उनके छोटे भाई व इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला का पार्टी संगठन में वजूद लगभग समाप्त हो गया लगता है । परन्तु इस सारे एपिसोड में नेता प्रतिपक्ष चौ. अभय सिंह चौटाला एक मजबूत और मैच्योर नेता के रूप में उभर कर सामने आए हैं। गौरतलब है कि अभय चौटाला ने पार्टी संगठन को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ जनता के हितों के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार को भी हमेशा कठघरे में खड़ा करने के प्रयास किया है।

इनेलो सुप्रीमों ने खुद गोहाना रैली में जुटी अपार भीड़ में सार्वजनिक घोषणा की थी कि 2019 के विधान सभा चुनावों में यदि जनता इनेलो को बहुमत प्रदान करती है तो हमारे मुख्यमंत्री चौ. अभय सिंह चौटाला ही होंगे। श्री चौटाला के अलावा प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा और पार्टी के सभी विधायकों ,कार्यकारिणी के सदस्यों व जननायक चौधरी देवीलाल जी की नीतियों में विश्वास रखने वाले लाखों कार्यकर्ताओं ने पिछले 14 सालों से पार्टी के विपक्ष में होते हुए भी अभय चौटाला की दिन-रात की गई अनथक मेहनत और लगन के चलते ही उनका खुल कर समर्थन किया। राजनीतिक गलियारों में सर्वत्र चर्चा है कि यदि दुष्यंत और दिग्विजय जल्दबाजी में नेता बनने की लालसा को किनारे करके समझदार बच्चों की माफिक अभय चौटाला के नक्शे कदम पर चलकर पार्टी हित में निस्वार्थ हो कर कार्य करते तो उनके दादा सबसे अधिक उनके हितों का अवश्य ध्यान रखते। क्योंकि चौधरी ओम प्रकाश चौटाला के बारे में तो उनके घोर विरोधी भी अक्सर कहते है कि कार्यकर्ता का सम्मान करना तो कोई चौटाला से सीखे परन्तु यदि किसी ने पार्टी की छवि को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की तो फिर चौटाला की डिक्शनरी में माफी नाम का लफ्ज है नहीं फिर चाहे वह उनका कितना ही नजदीकी क्यों न हो उसे अपनी गलती का खामियाजा तो भुगतना ही होगा।

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