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Haryana

तिब्बतियों और भारतीयों के बीच हजारों सालों से मैत्रिता, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक आदान-प्रदान रहा है:सत्यदेव नारायण आर्य

October 11, 2018 04:30 PM

तिब्बतियों और भारतीयों के बीच हजारों सालों से मैत्रिता, सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक आदान-प्रदान रहा है। देश और प्रदेश की सरकारों की अब भी यही मन्सा है कि यह भविष्य में भी जारी रहे ताकि भारतीय और तिब्बती लोगों के सभी प्रकार के सम्बन्ध और गहरे हो।

यह बात हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने आज यहां तिब्बती पार्लियामेंट इन एग्जाईल के चार सदस्यीय सांसद प्रतिनिधि मण्डल से बात करते हुए कही। उन्होने कहा कि देश के अन्य राज्यों की तरह वे चाहते हैं कि हरियाणा प्रदेश के साथ भी तिब्बती लोगों के साथ सम्बन्ध और मजबूत हो। इस अवसर पर सांसद प्रतिनिधि मंडल ने उन्हे ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन के सम्बन्ध में श्री आर्य ने कहा कि उनका ज्ञापन केन्द्र सरकार को भेंजा जाएगा, क्योंकि यह मामला केन्द्र सरकार के क्षेत्राधिकार का है।

सांसद प्रतिनिधि मण्डल द्वारा तिब्बतन पार्लियामेंट की तरफ सौंपे गए पांच बिन्दुओं वाले ज्ञापन में कहा गया है कि परमपावन दलाई लामा और चीनी सरकार के दूतों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने को समर्थन देने का रास्ता निकालना चाहिए। दूसरा तिब्बत का प्राकृतिक पर्यावरण बचाने के लिए चीनी सरकार को राजी करने के प्रयास के तहत चर्चा करनी चाहिए। तीसरा परमपावन दलाई लामा को तिब्बत में आमंत्रित किया जाए और तिब्बत में स्वाधीनता कायम की जानी चाहिए। चौथे बिन्दु में उन्होने कहा कि चीन की सरकार धर्म पर सख्त नियंत्रण बना रही है, जिससे तिब्बती भाषा विरासत और सांस्कृति को नुकसान हुआ है। इसलिए इन मसलों को चीन सरकार के सामने उठाया जाए। पांचवे और अंतिम बिन्दु में उन्होने कहा कि भारतीय संसद, राज्य विधानसभाओं में प्रस्ताव पारित करें कि तिब्बत से जुडे़ कार्यक्रम और अभियान शुरू किए जाएं।

प्रतिनिधि मण्डल का नेतृत्व कर रहे सांसद दावा जेरिंग ने बताया कि भारत की केन्द्र सरकार तिब्बत की जनता के लिए शैक्षिणक सुविधाएं जुटाने के साथ-साथ प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से वित्तीय सहायता भी दे रही है, जिससे लोगो के रहन-सहन का स्तर बढ़ा है। इसके साथ-साथ भारत के कई राज्यों में कई स्थानों पर तिब्बती बस्तियों, स्कूलों, मठो, तिब्बती चिकित्सा, एलोपैथिक चिकित्सालय स्थापित करने भी सुविधा दी है। उन्होने केन्द्र व राज्य सरकारों के प्रति कृतज्ञता जताते हुए कहा कि दोनो सरकारों ने विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के पुनरूत्थान, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए तिब्बती जनता के लिए काम किया है।

पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के तहत आज राज्यपाल श्री आर्य से मोतीलाल नेहरू, स्पोर्ट्स स्कूल राई के निदेशक एवं प्रिंसिपल कर्नल आर.एस. बिश्नोई, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रो0 एस.के.चहल तथा पटियाला से आये श्री जसवन्त सिंह पूरी ने भी मुलाकात की श्री पूरी ने राज्यपाल श्री आर्य को अपने द्वारा लिखित ‘राईस एण्ड डिकलाईन ऑफ द मुगल एंपायर’ नामक किताब भी भेंट की।

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