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अम्बाला एसिड पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के मुताबिक मुआवजा राशि मिलनी चाहिए - एडवोकेट हेमंत

October 10, 2018 09:09 PM

चंडीगढ़ - अम्बाला की एसिड पीड़िता को सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के मुताबिक मुआवजा राशि मिलनी चाहिए। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत ने हरियाणा सरकार से यह मांग करते हुए कहा है कि गत 5 सितम्बर 2018 को माननीय सुप्रीम कोर्ट के तीन सदस्यीय पीठ ने निपुण सक्सेना बनाम भारत सरकार नामक केस में आदेश दिया है कि भारत के सभी राज्यों में एसिड हमले के शिकार पीडितो को मुआवजा राशि राष्ट्रीय विधिक सेवा अथॉरिटी ( नालसा) द्वारा बनायीं गयी पीड़ित मुआवजा स्कीम, 2018 के अनुसार दी जाए। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि दो अक्टूबर, 2018 से यह नई मुआवजा स्कीम लागू हो जानी चाहिए। हेमंत ने कहा की चूँकि अम्बाला शहर की घटना 4 अक्टूबर को हुई इसलिए सुप्रीम कोर्ट के 5 सितम्बर 2018 के आदेश इस केस पर पूर्णतया लागू होते हैं। हेमंत ने बताया कि नालसा की मुआवजा स्कीम के अनुसार अगर एसिड पीड़ित के शरीर पर एसिड अटैक से हुए क्षति 20 प्रतिशत से कम है तो न्यूनतम तीन लाख रुपये एवं अधिकतम चार लाख रुपये, अगर क्षति 50 फीसदी से कम है तो न्यूनतम तीन लाख रुपये एवं अधिकतम पांच  लाख रुपये, अगर क्षति 50 प्रतिशत से अधिक है तो न्यूनतम पांच  लाख रुपये एवं अधिकतम आठ  लाख रुपये दिए जाने चाहिए। इसके अलावा अगर पीड़ित का चेहरा क्षतिग्रस्त हो गया है, तो न्यूनतम सात  लाख रुपये एवं अधिकतम आठ  लाख रुपये दिए जाने चाहिए।गौरतलब है कि 4 अक्टूबर को अम्बाला शहर के सेक्टर 7 में शाम को ऑफिस से घर लौट रही एक महिला पर बीच सड़क मोटर बाइक सवार युवको द्वारा एसिड फेंका गया जिससे उस महिला का चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलस गया और अभी तक पीड़िता चंडीगढ़ के हस्पताल में उपचाराधीन है एवं प्राप्त जानकारी के अनुसार वो 30 से  40 प्रतिशत तक झुलस गयी है। इसी बीच जिला विधिक सेवा अथॉरिटी (डी.एल.एस.ए.), अम्बाला की और से ऐसे मामलो में मिलने वाली  एक लाख रुपये में  से 25 हज़ार की राशि तो पीड़ित महिला के परिजनों को घटना के अगले दिन ही दे गई थी एवं शेष  75 हज़ार रुपये गत दिवस  प्रदान  कर  दिए गए।  एडवोकेट हेमंत ने इस विषय में बताया कि हालाकि हरियाणा सरकार ने 3 अप्रैल 2013 को दंड प्रक्रिया धारा, 1973 की धारा 357-ए के तहत हरियाणा पीड़ित मुआवजा स्कीम,2013 अधिसूचित एवं लागू की थी जिसमे एसिड हमले के पीड़ित व्यक्ति को अगर उसकी आयु 40 वर्ष या उससे कम है तो एक लाख रुपये, अगर चालीस वर्ष और साठ वर्ष के बीच हो तो पचास हज़ार रुपये और अगर साठ वर्ष से ऊपर हो तो पच्चीस हज़ार रूपये देने का प्रावधान था। इसके तीन माह बाद 18 जुलाई  2013 को सुप्रीम कोर्ट ने लक्ष्मी बनाम भारत सरकार नामक केस में यह स्पष्ट आदेश दे दिया की एसिड फेंके जाने के शिकार पीड़ित को कम से कम तीन लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए। कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को इस बाबत अपने नियमों और मुआवजा स्कीमों में उपयुक्त संशोधन करने को भी कहा। इसके दो वर्ष पश्चात अर्थात 28 अगस्त 2015 को हरियाणा सरकार ने  अपनी वर्ष 2013 की मुआवजा स्कीम में संशोधन कर एसिड अटैक के शिकार पीड़ित को दी जाने वाली मुआवजा राशि को तीन लाख रूपये कर दिया। इसमें पीड़ित की आयु का कोई पैमाना नहीं है।इन तीन लाख रुपये में से में एक लाख तो घटना के 15 दिनों के भीतर एवं शेष दो लाख अगले दो महीनो में देने का प्रावधान है। एडवोकेट हेमंत के अनुसार यह मुआवजा राशि पीड़िता को आई.पी.सी. की धारा 326 ए के तहत मिलने वाले जुर्माने की राशि से अतिरिक्त होगी।एडवोकेट हेमंत ने अम्बाला के जिला प्रशासन और जिला एवं सत्र न्यायधीश  से गुहार कि है वो सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेशों के अनुसार  एसिड पीड़िता को मुआवजा राशि दिलवाने में सहयोग प्रदान करे।

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