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Haryana

अम्बाला:फसलों के अवशेष जलाने की समस्या से निपटने में नम्बरदार करें सहयोग-एसडीएम

October 09, 2018 04:57 PM
एसडीएम सुभाष चन्द्र सिहाग ने अम्बाला छावनी तहसील के नम्बरदारों से अनुरोध किया कि वे फसल के अवशेषों को जलाने की समस्या से निपटने में जिला प्रशासन का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि वे अपने सम्पर्क में आने वाले किसानो को यह अवशेष जलाने की बजाए इनके प्रबन्धन के लिए प्रेरित करें। उन्होंने इस मौके पर 14 अक्टूबर को हिसार में आयोजित होने वाले राज्यस्तरीय सम्मेलन के लिए नंबरदारों को अवगत कराते हुए इस कार्यक्रम का हिस्सा बनाने के लिए कहा। 
एसडीएम आज अम्बाला छावनी तहसील में नम्बरदारों की एक बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण समाज के लिए एक गंभीर समस्या है और प्रतिवर्ष धान की कटाई के समय प्रदूषण का स्तर अत्याधिक बढ़ जाता है। इससे न केवल मनुष्य बल्कि अन्य जीव-जन्तुओं को भी सांस लेने में दिक्कत होती है और कईं प्रकार की बीमारियां जन्म लेती हैं। उन्होंने कहा कि किसानो को भी फसल के अवशेष जलाने से नुकसान हो रहा है लेकिन वे जाने-अनजाने में इन अवशेषों को जला रहे हैं। पराली इत्यादि जलाने से भूमि की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है और मित्र कीट समाप्त होने से प्रति एकड फसल का उत्पादन भी कम होता है। 
उन्होंने कहा कि कृषि विभाग द्वारा पराली व फसलों के अवशेष प्रबन्धन के लिए 8 प्रकार के कृषि यंत्र 50 प्रतिशत से लेकर 80 प्रतिशत तक अनुदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। इसके अलावा जो छोटे किसान यह उपकरण खरीदने की स्थिति में नही हैं, उन्हें ऐसे उपकरण किराए पर उपलब्ध करवाने के लिए जिला में 93 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं और अब तक 45 हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन अवशेषों को मिट्टी में मिलाने से उपजाऊ शक्ति बढ़ती है और खेतों में नमी भी अधिक समय तक बनी रहती है। उन्होंने कहा कि इन अवशेषों के बंडल बनाकर इन्हें ईंट-भ_ों और फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में भी प्रयोग किया जा सकता है, जिससे किसान की आमदनी बढ़ती है। उन्होंने नम्बरदारों से आग्रह किया कि वे किसानो को जागरूक करने के साथ-साथ अपने क्षेत्र में पराली जलाने की होने वाली घटनाओं की जानकारी भी प्रशासन को दें। इस मौके पर तहसीलदार राजेश पूनिया सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
 
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