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दिल्ली की डोरस्टेप डिलिवरी स्कीम की सफलता की कहानी 1 दिन में 14 हजार कॉल्स, 275 मोबाइल सहायक फील्ड में

October 08, 2018 05:42 AM

COURTESY NBT OCT 8

नोएडा से लिखी जा रही है दिल्ली की डोरस्टेप डिलिवरी स्कीम की सफलता की कहानी
1 दिन में 14 हजार कॉल्स, 275 मोबाइल सहायक फील्ड में

 

एसडीएम ऑफिसों में कई-कई घंटे तक लाइनों में लगने के बाद भी सर्टिफिकेट नहीं बनने से परेशान लोगों ने जब यहां फोन किया और उन्हें बताया गया कि अगले दिन मोबाइल सहायक घर पहुंच रहा है तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। - चांदनी


बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। कुछ शिकायतें भी आती हैं लेकिन समझाने और बताने पर शांत हो जाते हैं। लोगों की परेशानी सुनकर पता लगता है कि वे लाइनों में लगने से कितना परेशान थे। - सतीश
शुरुआत में बहुत लोग तो डोरस्टेप डिलिवरी के बारे में जानने के लिए फोन कर रहे थे और कुछ को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि घर बैठे सर्टिफिकेट बन जाएंगे। अब ऐसी कॉल्स कम हुई हैं। - रोहित
कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव

के अनुभव
डोरस्टेप डिलिवरी योजना के लिए फोन करने वालों की शिकायतें की लिस्ट भी है। मोबाइल सहायक को लेकर लोग शिकायतें करते हैं कि सहायक समय पर नहीं पहुंचा। दोबारा आने के लिए कहा तो आया नहीं। इंटरनेट स्पीड कम थी और डॉक्युमेंट पूरे न होने के चलते फॉर्म नहीं भरा गया। इस बारे में अधिकारियों का कहना है कि अगर एक बार विजिट में फॉर्म फिल नहीं हो पाया तो दोबारा टाइम तय करने के लिए फिर से फोन करना होता है। सहायक को हर रोज जो एड्रेस दिए जाते हैं. उन्हें उसी पर विजिट करना होता है। वहीं लोगों का कहना है कि टाइम फिक्स होने के बाद भी सहायक नहीं पहुंचे। सुबह फोन आया लेकिन फिर दिन में कोई सहायक नहीं आया। इस तरह के फीडबैक को देखा जाता है और लोगों की हर शिकायत को दूर करने का दावा भी किया जा रहा है।• योजना शुरू हुए करीब एक महीने हो गया है पूरा, 300 फोन लाइनें हैं अब • एक शिफ्ट में होते हैं 180 कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव • एक मोबाइल सहायक को रोज 8 से 10 अपॉइन्टमेंट पूरी करनी होती हैं• शुरुआती तीन-चार तीनों में 25 से 30 हजार तक आई थी कॉल्स • अभी भी सबसे ज्यादा कॉल्स ट्रांसपोर्ट और रेवेन्यू डिपार्टमेंट के लिए
सुबह 8 बजे करते हैं कॉल : दिल्ली सरकार की इस योजना के साथ करीब 275 मोबाइल सहायक जुड़े हुए हैं। हर मोबाइल सहायक को रोजाना 8 से 10 घरों में विजिट करनी होती है। सर्विस रिक्वेस्ट के बाद मोबाइल सहायक को बताया जाता है। उसके बाद सुबह 8 बजे मोबाइल सहायक उन सभी लोगों को फोन करता है। कुछ लोगों ने जो टाइम फिक्स किया होता है, उसे रीशेड्यूल करना चाहते हैं। उसके बाद मोबाइल सहायक लोगों के घर पहुंचता है। कई केस में घर का पता गलत मिलता है या डॉक्युमेंट पूरे नहीं होते। ऐसी स्थिति में दोबारा कॉल सेंटर पर फोन कर टाइम फिक्स करना होता है।

इसी महीने जुड़ेंगी 30 और सर्विसेज : योजना की शुरुआत 40 सर्विसेज के साथ हुई थी। सरकार ने इसी महीने 30 और सर्विसेज जोड़ने की तैयारी कर ली है। इस योजना से जुड़े एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अक्टूबर में 30 सर्विसेज के बाद नवंबर में 30 और सर्विसेज जोड़ दी जाएंगी। 100 सर्विसेज का टारगेट पूरा किए जाने के बाद बची हुई सर्विसेज को भी धीरे-धीरे इस स्कीम से जोड़ा जाएगा।

अभी भी सबसे ज्यादा सर्विस रिक्वेस्ट ट्रांसपोर्ट और रेवेन्यू के लिए : शुरुआत से लेकर अब तक जो ट्रेंड सामने आया है, उसमें ट्रांसपोर्ट व रेवेन्यू डिपार्टमेंट की सर्विसेज के लिए सबसे ज्यादा रिक्वेस्ट आई हैं। दरअसल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी और रेवेन्यू ऑफिसों में लोगों को बहुत परेशानी होती है और यही कारण है कि लोग इन डिपार्टमेंट की सर्विसेज के लिए सबसे ज्यादा कॉल्स कर रहे हैं।
फोकस किया जाता है। रोजाना जो भी अपडेट होते हैं, उनके बारे में इग्जेक्यूटिव को बताया जाता है, ताकि वे लोगों को सही जानकारी दे सकें। करीब 400 ऑपरेटर्स यहां पर काम करते हैं। हर दस ऑपरेटर पर एक मेंटॉर होता है और 40 ऑपरेटर्स के लिए एक टीम लीडर होता है। साथ ही कॉल सेंटर में डिपार्टमेंट का एक अधिकारी भी मौजूद रहता है। अगर इग्जेक्यूटिव किसी सवाल का जवाब नहीं दे पा रहा है तो डिपार्टमेंट अधिकारी उसके बारे में इग्जेक्यूटिव को बताता है। कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव द्वारा दिए गए सवाल ठीक है या नहीं, इसके बारे में कॉल रेकॉर्डिंग भी सुनी जाती है। जो कमियां होती हैं, उसे रेगुलर बेसिस पर दूर किया जाता है।

24 घंटे में 3 शिफ्ट में चलता है कॉल सेंटर, सबसे ज्यादा कॉल 9 से 3 के बीच में : नोएडा कॉल सेंटर तीन शिफ्ट में चलता है। सुबह 8-2, 2-10 और 10-8 की शिफ्ट होती है। 8-8 घंटे की शिफ्ट होती है। पहली दो शिफ्ट में 180-180 इग्जेक्यूटिव होते हैं। रात की शिफ्ट में 10 से 12 इग्जेक्यूटिव की ड्यूटी होती है। सबसे ज्यादा कॉल्स सुबह 9 से 3 बजे के बीच होती हैं। सुबह 9-3 के बीच में 6500-7000 कॉल्स आती हैं। 3 से 9 के बीच में 2500-3000 कॉल्स आती हैं। रात 9 से सुबह 8 के बीच में 100-120 कॉल्स तक आती हैं। यही कारण है कि रात में इग्जेक्यूटिव की संख्या कम होती है। 300 फोन लाइनें होती हैं। 180 इग्जेक्यूटिव एक साथ फोन अटेंड करते हैं। इसके अलावा 120 लाइनें वेटिंग के लिए भी होती हैं। शुरुआत में 50 लाइनें थी लेकिन अब लाइनों की संख्या बढ़ा दी गई है। वेटिंग कॉल्स भी अब खत्म हो गई हैं।

रोजाना 13 से 14 हजार कॉल्स, 2000 अपॉइन्टमेंट होती हैं फिक्स : डोरस्टेप डिलिवरी ऑफ सर्विसेस योजना शुरू होने के पहले तीन से चार दिनों में तीसरे दिन कॉल सेंटर पर अभी तक सबसे ज्यादा कॉल कनेक्ट हुई हैं। तीसरे दिन 21000 से ज्यादा कॉल्स कनेक्ट हुईं थी। यह नंबर 25 से 30 हजार तक भी पहुंचा था। लेकिन अब कॉल्स की संख्या में कमी आ रही है। पहले लोगों ने इस सर्विस के बारे में पता करने के लिए काफी कॉल्स की थी और वेटिंग कॉल्स भी ज्यादा थी लेकिन अब यह नंबर कम हो रहा है। अब 13 से 14 हजार कॉल्स रोजाना आ रही है और औसतन 2000 अपाइन्टमेंट फिक्स हो रही हैं। 10 सितंबर को पहले दिन 40 ऑपरेटरों और 50 फोन लाइनों की क्षमता पर 2728 कॉल्स कनेक्ट हुईं थी और 1286 कॉल्स के जवाब दिये गये थे।

275 मोबाइल सहायक, हर रोज
Bhupender.Sharma

@timesgroup.com

 

नई दिल्ली : दिल्ली सरकार की डोरस्टेप डिलिवरी ऑफ सर्विसेज स्कीम शुरू हुए एक महीना होने जा रहा है। 10 सितंबर को यह स्कीम लॉन्च हुई थी, उस समय पहले तीन से चार दिनों में कॉल्स का आंकड़ा 30 हजार तक पहुंच गया था और वेटिंग कॉल्स की संख्या भी बढ़ गई थी। उसके बाद सरकार ने फोन लाइनों को बढ़ाने के साथ-साथ कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव की संख्या बढ़ाने के भी निर्देश दिए। अब एक महीने बाद कोई भी वेटिंग कॉल नहीं है। डोरस्टेप डिलिवरी के लिए नोएडा में कॉल सेंटर हैं, जहां पर इस योजना की सफलता की कहानी लिखी जाती है।

यंग ब्रिगेड के हाथों में है कमान : नोएडा कॉल सेंटर में डोरस्टेप स्कीम को आम लोगों तक पहुंचाने, उनको इस स्कीम के बारे में बताने, सर्विस रिक्वेस्ट नोट करने से लेकर फीडबैक तक की सारी जिम्मेदारी यंग ब्रिगेड के हाथों में हैं। कॉल सेंटर में तीन फ्लोर पर इग्जेक्यूटिव विभिन्न डिपार्टमेंट की कॉल्स को अटेंड करते हैं। 1076 पर कॉल करने के बाद आईवीआर सिस्टम से जिस डिपार्टमेंट की सर्विस के लिए रिक्वेस्ट होती है, वहां पर कॉल ट्रांसफर हो जाती है। उसके बाद कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव उस सर्विस के बारे में जरूरी डॉक्युमेंट के बारे में पूछता है और सारे डॉक्युमेंट के बारे में तसल्ली हो जाने के बाद सर्विस रिक्वेस्ट फाइनल की जाती है। मोबाइल सहायक के आने का टाइम भी फिक्स किया जाता है। कॉल सेंटर में ज्यादातर युवा हैं और वे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कॉल सेंटर में भी काम कर रहे हैं। कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव का कहना है कि डोरस्टेप योजना के लिए काम करते वक्त उन्हें भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। लोग परेशान होकर फोन करते हैं और जब उन्हें बताया जाता है कि आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है और घर पर ही मोबाइल सहायक आकर फॉर्म फिल कर देगा तो लोग बहुत खुश होते हैं। हालांकि शिकायतें भी होती हैं और कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव उनको समझाते भी हैं कि कुछ परेशानी हो सकती है लेकिन आपकी रिक्वेस्ट को जरूर अटेंड किया जाएगा। इग्जेक्यूटिव का कहना है कि सरकारी सिस्टम के बारे में उन्हें भी बहुत कुछ जानने का मौका मिला है।

कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव की ट्रेनिंग : डोरस्टेप डिलिवरी योजना के लिए कॉल सेंटर इग्जेक्यूटिव की ट्रेनिंग पर खास

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