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हरियाणा के जींद में आयोजित ‘एक शाम अटल जी के नाम’ मुशायरा कार्यक्रम लोगों के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ गया

October 07, 2018 05:06 PM
हरियाणा के जींद में आयोजित ‘एक शाम अटल जी के नाम’ मुशायरा कार्यक्रम लोगों के मानस पटल पर अमिट छाप छोड़ गया। कार्यक्रम में शायरों ने शेरो-शायरी के माध्यम से राष्ट्रीय एकता जैसे पहलुओं को बखूबी तरीके से श्रोताओ में परोसा । बाहर से आई महिला शायरों ने अपनी दमदार आवाज के दम पर अच्छा कविता पाठ व शायरी की। भले ही कार्यक्रम उर्दू का पुट लिए हुए था फिर भी दर्शकों ने ठहाके लगाकर शायरी का मजा लिया। राजकीय महिला महाविद्यालय क ा ऑडीटोरियम कई घंटे शायरों की शायरी से गुंजायमान रहा। 
शायरों में डा0 समर याब समर ने राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाली गजल सुनाई । उन्होंने कहा -मुझे तो काशीं व मथुरा से अकीदत है,मैं जर्रे जर्रे का यों एहतराम करता हैूं- उन्होनेें  इस गजल का सार समझाते हुए  कहा कि जर्रे -जर्रे में ईश्वर का वास है, मैं  किस से नफरत करूं। 
-सारे जहां से दूर अंधेरा हो जुल्म का, उल्फत का वो चिराग जलाते रहेंगे हम-नजम खतौली की यह गजल हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के भाई चारे की मिशाल  को दर्शा रही थी। श्रोताओं ने गौर से इस नजम को सुना। 
-मरने से भी डरना कैसा-   केशव देव जाबीर की यह नजम काफी रोचक तरीके से परोशी गई । इसमें एक मजदूर का मरना दर्शाया गया था। 
 - जब मैनें किया जंग का ऐलान अलग से ,तब जाके बनी है मेरी पहचान अलग से- विजेन्द्र गाफिल की इस गजल  क ो भी दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया । 
-वो सारे खजाने उठा ले गया है,फकीरों की जो भी दूआ है ले गया है,
मैं क्यों उसके आने की उम्मीद छोड़ू वो कागज पर लिख कर पता ले गया है - नामक इस गजल को विजेन्द्र सिंह परवाज द्वारा बखूबी तरीके से गाया। 
 - हया की वादियों में शर्म के  आंगन में रहती हॅॅू,मैं उर्दू हॅू सदा तहजीब के दामन में रहती हूै- इसी प्रकार महिला शायर फलक सुल्तानपुरी की यह नजम थी, शुरीली आवाज में इस गजल को लोगों द्वारा खूब पंसद किया गया। 
-खड़े है चेहरे पे जुल्फों को डाले, अंधेरों से छन-छन के आए उजाले ,यही आरजू है उसे छू के देखें हवाओं से जो अपना दामन बचा लें-  अशोक पंकज द्वारा परोसी गई इस  गजल को भी लोगों ने खूब सराहा। 
-बारीश नूर की होती है,हर इक घर में उसका लहां,जब घर में कोई नन्ही परी तसरीफ लाती है,न मारो जालिमों अपनी उस लख्ते जिगर को तुम ,जिस लख्ते जिगर से रोशनी दो घरों में आती है।  जिसमें बेटी बचाओं का संदेश था असरफ मेवाती ने यह गली श्रोताओं को परोसी।  
-मुझको कुछ  दोस्त मेरे दगा दे गए,दुश्मनों से मैं खुद को बचाती रही- महिला शायर दानिश गजल मेरठी की गजल थी यह गजल लोगों के दिलों को छू गई। 
 -चुन चुन के तिनके लाए थे हम - राशीद अली के  द्वारा फरमाई गई गजल को लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया । 
इस शेयर और शायरी के माध्यम से हिन्दूस्तान के पूर्व वजीरेआजम स्व0 अटल बिहारी वाजपेयी को भावांजलि दी गई। 
हरियाणा उर्दू अकादमी के निर्देशक डा0 नरेन्द्र कुमार उपमन्यू ने मुशायरा कार्यक्रम में शायरों ,लेखकों ,क वियों का स्वागत करते हुए कहा कि उर्दू अकादमी के  32 साला स्थापना दिवस के उपलक्ष में यह कार्यक्रम आयोजित हुआ है। इसमें महान शख्शियत श्री अटल बिहारी वाजपेयी की याद में एक शाम अटल के नाम कार्यक्रम का आयोजन हुआ है। जिसमें उन्हे भावांजलि दी गई है। उन्होंने कहा कि श्रादों का क्रम चल रहा है,हमें अपने पूर्वजों द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए। अकादमी ने उर्दू को बढावा देने के लिए इस प्रकार के मुशायरा कार्यक्रम करवाने की पहल की है। उर्दू एक ऐसी जुबान है जिसमें विनम्रता,आपसी प्रेम का पुट है। कार्यक्र म में आए शायरों,गजल गायकों को सम्मान स्वरूप चदर व स्मृति चिन्ह दिया गया। जींद के कवियों ,लेखकों ने बाहर से आए अतिथियों को पुष्प गुच्छ व सम्मान स्वरूप पटका भेंट किया। 
इस मौके पर ग्रंथ अकादमी के प्रौ0 विरेन्द्र चौहान ने उर्दू अकादमी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में समरसता व भाईचारा बढाने की दिशा में अकादमी के प्रयास सार्थक सिद्ध हो रहे है। कवि व रचनाकार अपनी कविता व रचनाओं के माध्यम से समाज में एकरूपता को बढावा देते है। 
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