Tuesday, December 11, 2018
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Haryana

हुड्डा की जनक्रांति रथयात्रा पार्टी आलाकमान पर दवाब बनाने में रही असफल

September 21, 2018 03:10 PM

ईश्वर धामु(चंडीगढ़):कांग्रेस आलाकमान पर निरंतर कौशिशों के बाद भी दबाव बनाने में असफल रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने दिसम्बर में बड़ी रैली करने की घोषणा कर दी। क्योकि राजनीति में उनकी जनक्रांति रथ यात्रा कोई करिश्मा नहीं कर पाई। हालांकि भीड़ की दूष्टि से कई स्थानों पर रथयात्रा बहुत सफल रही। पर राजनैतिक पंडित इसको स्थानीय आयोजकों का प्रभाव बता रहे हैं। बताया गया है कि हुड्डा की जिन रैलियों में उम्मीद से अधिक भीड़ आई, वह स्थानीय आयोजक का प्रभाव और जनाधार था। अन्यथा हुड्डा की रथयात्रा की रैली या जनसभा में सामान्य भीड़ ही रही है। लेकिन अब आकर भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अपने आपको इन रैलियों के माध्यम से आगामी मुख्यमंत्री प्रोजक्ट करना शुरू कर दिया है। अब वें इन रैलियों में जम कर चुनावी घोषणाएं कर रहे हैं। अब वें रथयात्रा के दौरान कहते हैं कि सत्ता में आने के बाद बुढ़ापा पेंशन को बढ़ा कर तीन हजार रूपए मासिक किया जाएगा, आधे दाम पर पूरी बिजली दी जाएगी, किसी भी मिल का गन्ने का बकाया नहीं रहने दिया जाएगा, सूरजमुखी व अन्य फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित की जाएगी, बेरोजगार नौकरी के लिए नि:शुल्क आवेदन कर सकेंगे, बेरोजगारी भत्ता नौ हजार रूपए प्रति माह दिया जाएगा, मुफ्त प्लाट योजना से वंचित गरीबों को प्लाट दिए जाएंगे, अनुसूचित व पिछड़ा वर्ग के लोगों के भी कर्ज माफ़ होंगे और महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश स्तर पर पुलिस की स्पेशल सेल का गठन किया जाएगा जो अराजक तत्वों, मनचलों और अपराधियों पर शिकंजा कसने का काम करेगा। निसंदेह यें घोषणाएं लोगों को लुभाती है। परन्तु सवाल यह आता है कि वें इसके बावजूद भी पार्टी आलाकमान की ओर से उनको कोई ग्रीन संकेत नहीं मिल रहा है। उनको आलाकमान की ओर से प्रदेश की बागडोर सम्भालवाने की बात ही नहीं की जा रही है। इन्ही स्थिर राजनैतिक हालातों में उन्होने दिसम्बर में बड़ी रैली की धोषणा कर डाली। चर्चाकारों का यह भी कहना है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने अब अपना टारगेट बदल दिया है। अब वें पार्टी की प्रदेश कमान पर नहीं मुख्यमंत्री की रेस में आगे आने के प्रयास में लग गए हैं। लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि अगर वें पार्टी की कमान नहीं पा सकेंगे तो वें मुख्यमंत्री की दौड़ से भी बाहर हो जायेंगे। पर अभी तक हुड्डा राहुल गांधी की पशंद बनने में कामयाब नहीं हुए हैं। हालांकि पार्टी आलाकमान उनके सांसद बेटे दीपेन्द्र हुड्डा को पूरा सम्मान दे रही हैं। अभी भी दीपेन्द्र हुड्डा को पार्टी की विदेशी मामलों की कमेटी का सचिव बनाया गया है। परन्तु हुड्डा अपने टारगेट को पूरा करने पर काम कर रहे हैं। परन्तु राहुल गांधी की नाराजगी के चलते भूपेन्द्र सिंह हुड्डा को पार्टी में कुछ भी मिलने वाला नहीं हैं। वैसे भी आज मुख्यमंत्री की दौड़ में अशोक तंवर, रणदीप सुरजेवाला, कुमारी सैलजा, किरण चौधरी और कुलदीप बिश्रोई भी शामिल हैं। पर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर वही बैठेगा, जिसको राहुज गांधी का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

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