Wednesday, October 24, 2018
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Haryana

मनोहर लाल ने प्रदेश के असंगठित श्रमिकों को मनोहर सौगात देते हुए ‘हरियाणा असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ के गठन की घोषणा की

September 17, 2018 06:22 PM
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने प्रदेश के असंगठित श्रमिकों को मनोहर सौगात देते हुए ‘हरियाणा असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ के गठन की घोषणा की। यह बोर्ड असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के कल्याण के कार्य करेगा। इसके साथ ही सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत 60 वर्ष की आयु से अधिक श्रमिकों को बोर्ड की ओर से मिलने वाली 1000 रुपये की मासिक पेंशन को बढ़ाकर 2500 रुपये करने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणाएं आज करनाल में विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित राज्य स्तरीय श्रमिक दिवस समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए की। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा रखी गई 33 मांगों को भी मौके पर स्वीकृति प्रदान कर दी। 
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के संगठित और असंगठित दो क्षेत्र हैं। हरियाणा में लगभग 25 प्रतिशत श्रमिक संगठित क्षेत्र में और 75 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्र में कार्यरत हैं।उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान केवल संगठित क्षेत्र पर ही नहीं बल्कि असंगठित क्षेत्र पर भी है। इसलिए असंगठित क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के कल्याण के लिए ‘हरियाणा असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा बोर्ड’ गठित किया है। उन्होंने कहा कि हमारे बहुत से श्रमिक असंगठित क्षेत्र, विषेशकर भवन निर्माण क्षेत्र में काम करते हैं। आज प्रदेश के भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में 7 लाख 76 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत हैं, जिनमें से 5 लाख 8 हजार से अधिक सदस्य सक्रिय हैं। इनके तथा इनके परिवारों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा कई प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इस बोर्ड में पंजीकृत 60 वर्ष की आयु से अधिक श्रमिकों को बोर्ड  की ओर से 1 हजार रुपये मासिक पेंशन दी जाती है, आज से इसे बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया है। 
मुख्यमंत्री ने देश में श्रमिकों के स्वास्थ्य के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की जाने वाली एक नई योजना की जानकारी देते हुए बताया कि  23 सितंबर से केंद्र सरकार वर्ष  2014 के एसईसीसी डाटा के आधार पर गरीब परिवारों के लिए 5 लाख रुपये सालाना स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दिये जाएंगे। उन्होंने बताया कि हरियाणा में एसईसीसी डाटा के आधार पर इस समय 14 लाख गरीब परिवार हैं, जिनमें से साढ़े 8 लाख परिवारों को इस योजना का  लाभ मिलेगा। लेकिन जो परिवार किसी कारणवश  एसईसीसी डाटा में नहीं आ पाए हैं, उन श्रमिक परिवारों को सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से 5 लाख रुपये की राशि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दी जाएगी। 
उन्होंने कहा कि यह शुभ संयोग है कि विश्वकर्मा जयंती के दिन हमारे कर्मयोगी एवं ओजस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का जन्म दिवस है। ऐसे महान दिवस पर मैंने यहां पर पंचकूला में बनने वाले श्रम शक्ति भवन, ई.एस.आई. निदेशालय भवन और डिस्पैंसरी भवन का भी नींव पत्थर रखा है। उन्होंने कहा कि श्रमिक अपना पसीना बहाकर मंजिलें खड़ी करता है। कल-कारखानों में उत्पादन बढ़ाकर राष्ट्र को समृद्धि की ओर ले जाता है। प्रत्येक देश के आर्थिक विकास एवं समृद्धि में श्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि हम ‘श्रमेव-जयते’ में विश्वास करते हैं और श्रमिकों का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी के अंत्योदय के आदर्श का पालन करते हुए हम सबसे पहले उन लोगों पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं, जिन्हें जीवन की बुनियादी जरूरतों की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। राज्य सरकार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण-उत्थान के प्रति समर्पित है।
 मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए सबसे पहला कदम न्यूनतम वेतन की पुनर्निधारण प्रणाली की विसंगतियों को दूर करने का उठाया। आज हरियाणा अधिकतम न्यूनतम वेतन देने वाले राज्यों में से एक है। आज प्रदेश में अकुशल श्रमिकों का वेतन 8542 रुपये मासिक है। यानी कि उसे 329 रुपये की दिहाड़ी मिलती है। हमने चुनाव के समय 300 रुपये दैनिक वेतन देने की घोषणा की थी और उसे पूरा किया है।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों के बच्चों के लिए शिक्षा, खेलकूद में प्रोत्साहन एवं चिकित्सा के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। महिला श्रमिकों को प्रसूति के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। दुर्घटना में श्रमिकों के अंगों की हानि या मृत्यु पर वित्तीय सहायता दी जाती है। श्रमिकों को साईकिल व औजार आदि खरीदने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाती है। इनके लिए पेंशन और बीमे की भी योजनाएं है। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों की मृत्यु होने पर आश्रितों को दी जाने वाली सहायता राशि एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना सरकार ने गरीब महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध करवाने की दिशा में कदम उठाया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को कहा कि अगर यहां भी किसी के घर में गैस सिलेंडर नहीं है तो संबंधित जिला अधिकारी को सूचित करे, 48 घंटे के अंदर-अंदर उन्हें गैस कनेक्शन मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में श्रमिकों तथा अन्य जरूरतमंदों को 10 रुपये में स्वच्छ, पौष्टिïक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन प्रदान करने के लिए श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा 9 जिलों में 23 कैटीनें स्थापित की जा चुकी हैं और शेष जिलों में जल्द ही शुरू कर दी जाएंगी। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य में यूनिवर्सिटी के नाम नेताओं के नाम पर रखे जाते रहे हैं। लेकिन हमाने इस परंपरा को छोड़ कर नई परंपरा प्रारंभ की और यूनिवर्सिटी के नाम समाज को दिशा दिखाने वाले और प्रेरणा देने वाले महापुरूषों के नाम पर रखे हैं। जिला पलवल में श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की। श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्घांत पर चलते हुए हमारी सरकार द्वारा मजदूरों को आगे बढऩे के अनेक अवसर प्रदान किये जा रहे हैं। हमारी सरकार ने श्रमिकों के न्यूनतम वेतनमान में 52 प्रतिशत से 73 प्रतिशत तक की वृद्घि की है। इसके अलावा, भवन एवं सन्निमार्ण कर्मकार कल्याण बोर्ड़ द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को कार्य के दौरान किसी दुर्घटना से अपंग होने पर सहायता राशि दी जाती है। पहले यह राशि अपंगता के अनुपात में 1 से 2 लाख रुपए के मध्य दी जाती थी, जिसको बढ़ाकर हमारी सरकार ने 1.5 से 3 लाख रुपये कर दिया है। इसके अतिरक्ति, पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये अपंजीकृत को 2.5 लाख रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने गैर-पंजीकृत निमार्ण श्रमिकों की प्राकृतिक मृत्यु पर दी जानी वाली सहायता राशि को भी 1 लाख बढ़ाकर से 2.5 लाख रुपये किया है तथा श्रमिकों की अपंगता पैंशन को 300 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह  किया गया है। श्रमिकों के बच्चों को पहली कक्षा से स्नातकोतर स्तर तक दी जाने वाली 3 से 16 हजार रुपये की वजीफा राशि को बढ़ाकर 8 हजार से 20 हजार रुपये के मध्य कर दी है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पंजीकृत श्रमिकों को कन्यादान राशि शादी से 3 दिन पहले ही देने का प्रावधान किया है, इसके तहत 51 हजार रुपये तथा 50 हजार रुपए अन्य कार्यों के लिए यानि कुल 1.01 लाख रुपये की सहायता राशि देने का प्रावधान है। सरकार द्वारा श्रमिकों के बच्चों को आईआईटी, एम्स व अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करने का पूरा खर्च देने की व्यवस्था की है। इसके साथ ही दसवीं के मेधावी छात्रों को उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टïता के आधार पर 51 हजार रुपये तक की सावधि (एफडी) प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने श्रमिकों के कल्याण के लिए 23 योजनाएं शुरू की है। इन सभी योजनाओं के तहत करीब 4.88 लाख श्रमिकों को करीब 420 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि दी गई है, जबकि पिछली सरकार ने उनके 7 वर्षों के दौरान मात्र 19,841 श्रमिकों को मात्र 39.61 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की थी। 
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है। उन्होंने कहा कि मजदूर की मेहनत से सरकार के खजाने में पैसा आता है, इसलिए उस खजाने से निकलने वाले पैसे पर सबसे पहला हक भी श्रमिकों का ही होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल दोनों ही श्रमिक परिवार से संबंध रखते हैं और बहुत संघर्ष कर के  आज इस ऊंचाईयों पर पहुंचे है। वे श्रमिकों के जीवन में आने वाली समस्याओं को भलि-भांति जानते हैं इसलिए उनके कल्याण के लिए हमेशा से प्रयासरत रहे हैं और इसका ही परिणाम है कि हमारी सरकार ने केवल 4 साल में श्रमिकों के कल्याण के लिए 420 करोड़ रुपये खर्च किये जबकि पिछली सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान केवल 39 करोड़ रुपये ही चर्च किये।  उन्होंने कहा कि इमारतें, सडक़ें और जितने भी इन्फ्रास्ट्रक्चर के कार्य हैं वो श्रमिक के बिना पूर्ण नहीं हो सकते, इसलिए श्रमिकों के लिए हमारे दिल में सम्मान भाव होना चाहिए। 
इस अवसर पर परिवहन मंत्री श्री कृष्ण लाल पंवार, खाद्य एव आपूर्ति राज्य मंत्री श्री कर्ण देव कंबोज, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष श्री सुभाष बराला, असंध के विधायक श्री बख्शीश सिंह विर्क, घरौंडा के विधायक श्री हरिविंद्र कल्याण सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। 
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