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Haryana

सोनीपत नगर निगम के पहले चुनाव अक्टूबर, 2021 तक भी करवाए जा सकते है – एडवोकेट हेमंत

September 02, 2018 04:03 PM

चंडीगढ़ :- गत 26 जुलाई 2018  को हरियाणा सरकार के शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने एक गजट नोटीफीकेशन जारी कर सोनीपत नगर निगम की स्थापना बाबत संशोधित अधिसूचना जारी की जिसके अनुसार इससे पूर्व 3-6 जुलाई, 2015 को  जारी अधिसूचित सीमा से सात गाँव तो पूर्ण रूप से बाहर कर दिए हैं एवं आठ गांवों का कुछ भाग अर्थात उन्हें आंशिक रूप से बाहर निकाल दिया है. हालाकि इस कवायद में सरकार ने छह अन्य गाँवो का कुछ भाग उक्त नगर निगम की सीमा में जोड़ भी दिया है. पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने इस सम्बन्ध में बताया हरियाणा सरकार ने ताज़ा अधिसूचना   हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 3(3) का प्रयोग कर  किया है हालाकि इससे पूर्व प्रदेश के  किसी नगर निगम में ऐसा जोड़-तोड़ नहीं किया गया है और खासतौर पर सर्वप्रथम नगर निगम स्थापना की मूल अधिसूचना के तीन वर्ष बाद तो कतई नहीं. एडवोकेट हेमंत ने बताया  कि अब ये देखने लायक होगा कि क्या इस ताज़ा कवायद के बाद नई अधिसूचित सोनीपत नगर निगम की आबादी तीन लाख की सीमा को छू पाती  है अथवा नहीं क्योंकि प्रदेश में किसी नगर निगम बनाने या कायम रखने के लिए वहां की आबादी तीन लाख होना  अनिवार्य  है. ज्ञात रहे  कि तत्कालीन सोनीपत नगर परिषद को मोजूदा खट्टर सरकार ने जुलाई, 2015 के पहले सप्ताह में  नगर निगम के रूप में अपग्रेड कर इस बाबत आधिकारिक अधिसूचना राजकीय गजट में जारी  की थी. तब से इस निगम में शामिल किये गए अढाई दर्जन से अधिक गांवों में से अधिकाँश गाँव इसके भीतर आने को तैयार नहीं थे एवं पिछले तीन वर्ष से वो इसका पुरजोर विरोध कर रहे थे. एडवोकेट  हेमंत ने बताया कि उक्त अधिनियम की धारा 4(4) के तहत किसी भी नगर निगम स्थापित करने के तीन वर्ष तीन महीने के भीतर वहां पहले चुनाव करवाना वर्तमान कानूनी प्रावधानों  के अंतर्गत आवश्यक है एवं इस कारण से सोनीपत नगर निगम के चुनाव  अक्टूबर,2018 के पहले सप्ताह तक चुनाव संपन्न  हो जाने चाहिए जो वर्तमान  स्थिति में असंभव है.  इस सवा तीन वर्ष की अवधि की पृष्ठभूमि के सम्बन्ध में हेमंत  ने बताया कि मूल अधिनियम में यह अवधि मात्र छह माह थी परन्तु जब तत्कालीन हूडा सरकार ने अपने कार्यकाल में जून, 2008 में गुडगाँव (अब गुरुग्राम) नगर परिषद् को नगर निगम घोषित किया और चूँकि वहां  छह माह में चुनाव संपन्न नहीं हो सके तो उसने  इस  धारा में समय समय पर संशोधन करते हुए पहले  इस अवधि को एक  वर्ष, फिर दो वर्ष, फिर तीन वर्ष कर दिया परन्तु जब अम्बाला सहित राज्य के सात नगर निगमों जिन्हें मार्च, 2010 में अधिसूचित किया गया चूँकि इस सबके पहले चुनाव जो मार्च, 2013 तक हो जाने चाहिए थे परन्तु वे नहीं हो पाए  तो इस अवधि को उक्त अधिनियम में एक और संशोधन कर  तीन वर्ष तीन महीने कर किया गया जिसके बाद जून, 2013 में यह चुनाव संपन्न हुए. बहरहाल, आज तक राज्य सरकार प्रदेश के इन सात नगर निगमों में जहाँ चुनाव होने लंबित है, उनमे से केवल हिसार, रोहतक, यमुनानगर, करनाल  एवं  पानीपत नगर निगमों की ही फाइनल वार्डबंदी पूर्ण होकर अधिसूचित हो चुकी है. अम्बाला और पंचकुला में अभी वार्डबंदी की कवायद आरम्भ भी नहीं हुई है और यही हाल प्रदेश की स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के गृह जिले सोनीपत का है. बहरहाल, हेमंत ने कहा  कि इसे के चलते सत्तारूढ़ खट्टर सरकार आगामी 7 सितम्बर से आरम्भ होने वाले विधानसभा सत्र में सोनीपत नगर निगम के  पहले चुनाव करवाने की उक्त अवधि को वर्तमान तीन वर्ष तीन महीने से बढाकर साढे तीन या चार वर्ष तक करने के लिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम,1994 में उपयुक्त संशोधन करने बाबत विधेयक ला सकती है. हालाकि एडवोकेट हेमंत ने बताया  कि अगर ऐसा नहीं भी किया जाता तो भी चूँकि सोनीपत नगर निगम की स्थापना की संशोधित  अधिसूचना इसी वर्ष 26 जुलाई,2018 को जारी हुयी  है एवं यह निगम की मूल स्थापना अधिसूचना का कोई शुद्धि-पत्र नहीं अपितु तकनीकी रूप से नगर निगम स्थापना बाबत  नई अधिसूचना है  अत: उक्त ह.न.नि. अधिनियम, 1994  की धारा4(4) के तहत इसके पहले आम चुनाव इस तिथि के तीन वर्ष तीन महीने के समय तक अर्थात अक्टूबर, 2021 तक भी करवाए  जा सकते है. ऐसा करना एक प्रकार से अनैतिक तो कहा जा सकता है परन्तु यह मोजूदा कानून के अंतर्गत अवैध नहीं होगा. 

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