Wednesday, September 19, 2018
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आज से चेक बोउन्सिंग कानून में हुआ परिवर्तन:हेमन्त

September 01, 2018 08:21 AM

आज शनिवार यानि  एक सितम्बर से नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881, जिसे आम आदमी चेक  बोउन्सिंग कानून के तौर पर जानता  है, मे गत माह किया गया संशोधन लागू हो जाएगा. स्थानीय निवासी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि बीती  16  अगस्त को भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा  इस संशोधित कानून के लागू होने  बाबत अधिसूचना जारी कर दी गयी है. नए संशोधनों  बारे  जानकारी देते हुए एडवोकेट हेमंत ने बताया कि अब चेक बोउन्सिंग के मूल 1881  कानून में दो नई धाराए 143 ए  और 148 जोड़ दी गयी हैं. धारा 143 ए के अंतर्गत सम्बंधित कोर्ट, जो उक्त वर्णित 1881  कानून की धारा 138 के अंतर्गत चेक बाउंस हो जाने पर दायर कंप्लेंट का ट्रायल कर रही होगी, वह विवादित चेक जारी करने वाले व्यक्ति को शिकायतकर्ता को चेक में वर्णित धनराशि की 20  प्रतिशत रकम अंतरिम मुआवजे के रूप में देने का आदेश कर सकती है. कोर्ट द्वारा ऐसा आदेश उस स्टेज पर दिया जा सकता है, जब अगर तो संक्षिप्त ट्रायल या सम्मन केस हो,जो तब जब  चेक जारी करने वाले ने अपने आपको दोषी न होने  का दावा किया हो और अन्य केस में,  तब जबकि चेक जारी करने वाले के विरूद्ध चार्ज फ्रेम हो गए हो. ऐसी  20  प्रतिशत रकम, कोर्ट के आदेश के साठ दिन में चेक जारी करने वाले व्यक्ति को शिकायतकर्ता को देनी होगी और यह समय अवधि किसी पर्याप्त कारणों पर कोर्ट द्वारा ही एक माह के समय तक और बढाई जा सकती है. अगर ट्रायल के बाद चेक जारी किये जाने वाला व्यक्ति अभियुक्त  के तौर पर  दोषमुक्त करार कर दिया जाती है, तो शिकायतकर्ता को अंतरिम मुआवजे के तौर पर प्राप्त हुए चेक की धनराशि का 20  प्रतिशत रकम चेक जारी करने वाले को सम्बंधित वित्त वर्ष में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अधिसूचित बैंक रेट की दर से ब्याज रहित वापिस लौटानी पड़ेगी. ऐसा भुगतान उसे कोर्ट के आदेश के साठ दिन के भीतर या कोर्ट द्वारा ही एक माह तक और बढाई गई समयावधि के अन्दर करना होगा. धारा 143 ए में यह भी प्रावधान है उक्त अंतरिम मुआवजा कि वसूली सी.आर.पी.सी. की धारा 421  के तहत जुर्माना वसूली करने की तर्ज़ पर  की जा सकती है. इसमें यह भी प्रावधान है कि 1881 कानून की धारा 138 के अंतर्गत दोषी पर लगाये गए जुर्माने की राशि से  या सी.आर.पी.सी की धारा 357  के अंतर्गत दोषी द्वारा  शिकायतकर्ता को दी जाने वाली मुआवजे की राशि को  से उक्त नई धारा 143 ए के तहत शिकायतकर्ता को प्राप्त हो चुकी अंतरिम मुआवजे की राशि को घटा दिया जाएगा. एडवोकेट हेमंत ने बताया कि इसी प्रकार जब ट्रायल अथवा जुडिशल मजिस्ट्रेट की कोर्ट से दोषी हुआ चेक जारी करने वाला व्यक्ति अगर अपील में ऊपरी अदालत अर्थात सेशंस कोर्ट में जाता है, तो अदालत उसे  निचली अदालत के आदेश द्वारा उस पर जुर्माने या मुआवजे के तौर पर लगायी गयी धनराशि का कम से कम 20  प्रतिशत साठ दिन या नब्बे दिन तक जमा करवाने का आदेश दे सकती है. यह राशि निचली अदालत के आदेशानुसार  अंतरिम मुआवजे के तौर कर जमा करवाई गयी रकम के अतिरिक्त होगी. चेक जारी करने वाले द्वारा  जमा करवाई गई राशि को कोर्ट कभी भी शिकायतकर्ता को अपील की सुनवाई के दौरान अदा करने  का आदेश दे सकती है. धारा 143ए की तरह अगर इस धारा 148  में भी अपीलकर्ता दोषमुक्त हो जाता है, तो शिकायतकर्ता को उसे अपने द्वारा प्राप्त हुयी धनराशि प्रचलित बैंक रेट की दर के ब्याज के साथ कोर्ट के आदेश के साठ दिन या नब्बे दिन के भीतर लौटानी पड़ेगी. हेमन्त ने कहा कि आशा है नए संशोधनों से चेक बोउन्सिंग की झूठी शिकायतों पर नकेल कसेगी.

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