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Haryana

गोरखपुर में परमाणु संयंत्र बनने से काले हिरणों समेत अन्य वन्य जीवों को भी खतरा

August 10, 2018 06:01 AM

COURSTEY DAINIK BHASKAR AUG 10

गोरखपुर में परमाणु संयंत्र बनने से काले हिरणों समेत अन्य वन्य जीवों को भी खतरा, सलमान खान को एक काला हिरण मारने पर कोर्ट ने दी है सजा
गोरखपुर में परमाणु संयंत्र बनने से काले हिरणों समेत अन्य वन्य जीवों को भी खतरा, सलमान खान को एक काला हिरण मारने पर कोर्ट ने दी है सजा

भास्कर न्यूज | फतेहाबाद

 

गोरखपुर परमाणु संयंत्र स्थापित करने को लेकर एनपीसीआईएल नियमों को पूरा किए बगैर ही आगे बढ़ रहा है। संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से शुरू हुआ वन्य जीवों की सुरक्षा का मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है। न ही एनपीसीआईएल ने वन्य जीवों के संरक्षण का वादा निभाया है।
इसे लेकर अखिल भारतीय पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा आज भी अदालती लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में संयंत्र प्रबंधन अधिकारियों के लिए अभी आगे की राह आसान नहीं हुई है। इससे संबंधित तीन मामले में विभिन्न अदालतों में विचाराधीन है। लोगों का कहना है कि अभिनेता सलमान खान को कोर्ट ने एक काले हिरण की मौत पर सजा सुनाई हुई है। यहां तो संयंत्र की जमीन से 5 किलोमीटर की दूरी पर वन्य जीव संरक्षण केंद्र है। इतने नजदीक होने के कारण इस संयंत्र से सभी वन्य जीवों को भारी खतरा है। वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि एनपीसीआईएल ने जब गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू किया था, उस समय भी उन लोगों ने वन्य जीवों को नुकसान होने का मुद्दा उठाया था। इसमें कहा गया था कि अनुसूची एक के तहत वन्य जीवों की संरक्षण योजना बनाई जाए। जिस पर एनपीसीआईएल ने सहमति भी जताई थी, लेकिन उस पर आज तक कोई काम नहीं हुआ है।
परमाणु संयंत्र की जगह पर बाड़ लगाने से हो चुकी है 7 हिरणों की मौत, संयंत्र की जगह से 5 किमी की दूर है संरक्षण केंद्र
हिरणों की मौत का केस अब भी चल रहा
एनपीसीआईएल की ओर से जब अधिग्रहित जमीन पर बाड़ लगा देने की वजह से 7 हिरणों की मौत भी हुई थी, यह मामला भी काफी गर्म रहा था। इतना ही नहीं उससे संबंधित केस भी अभी चल रहा है। इस मामले में देहरादून से वन्य जीवों के विशेषज्ञों की एक टीम भी यहां आई थी। उस टीम ने वन्य जीवों संबंधित जगह का जायजा लेने के बाद निर्देश दिए थे कि यहां पर सेंचुरी बनाई जाए। संरक्षण योजना बनाई जाए, जिससे वन्य जीवों को नुकसान न हो और वह सुरक्षित रहे। इसके बाद एनपीसीआईएल ने काम तो शुरू कर दिया, लेकिन वन्य जीवों से संबंधित सेंचुरी पर काम नहीं किया।
नियमों का उल्लंघन :विनोद कड़वासरा, महासचिव, अखिल भारतीय पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा का कहना है कि एनपीसीआईएल ने संयंत्र लगाने को लेकर हर तरह स्तर के नियमों का उल्लंघन किया है। इसे लेकर अदालती कार्रवाई चल रही है। इससे यहां के वन्य जीवों और आम जनजीवन को काफी खतरा है। सरकार या तो सुरक्षा की गारंटी ले या फिर इस संयंत्र को कहीं और शिफ्ट करे, नहीं तो सरकार के खिलाफ हमारा विरोध लगातार जारी रहेगा।
गलत रिपोर्ट देने का दावा
पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक केस दायर किया हुआ है। इसमें सभा का कहना है कि जिस जमीन पर सेंचुरी बनाने के निर्देश गए थे। उस जगह पर सेंचुरी बनाने के एनपीसीआईएल को पहले उस जमीन को हरियाणा सरकार के नाम कराना था, जोकि अभी तक नहीं हो पाया है। उसके बिना वाइल्ड लाइफ विभाग से क्लीयरेंस मिल नहीं सकती। लेकिन एनपीसीआईएल ने संबंधित मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उन्हें वाइड लाइफ क्लीयरेंस मिल चुकी है, जबकि ऐसा नहीं है। जो रिपोर्ट सौंपी गई है, वह केवल प्लांट की काम शुरू करने को लेकर है, सेंचुरी की नहीं है। इस तरह से एनपीसीआईएल ने गुमराह किया है। इस मामले पर इसी महीने के आखिरी सप्ताह में सुनवाई भी होनी है।
वन्य जीवों के लिए अलग से इलाका होना चाहिए, ताकि वन्यप्राणी सुरक्षित रहे और किसानों को फसल नुकसान न हो। इसके लिए पूरे प्रबंध हों। -चंद्र मोहन सिगड़, बड़ोपल गांव।
प्लांट पूरे इलाके के लिए खतरनाक है, वन्यजीवों को तो हम तब बचा पाएंगे, जब हम खुद बचेंगे। सरकार को तुरंत इस प्लांट पर पुनर्विचार करके वायदा निभाना चाहिए। -सतपाल भादू, काजलहेड़ी गांव
हिरणों की मौत का मामला कोर्ट में पेंडिंग :बाड़ लगाने के चलते हुई 7 हिरणों की मौत के मामले में वन्य जीव संबंधी अदालत में केस किया था। इसके बाद एनपीसीआईएल, वन्य जीव विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों समेत 8 लोगों पर केस दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में प्रशासनिक अधिकारियों व वन्य विभाग के अधिकारियों को इस केस से बाहर कर दिया गया था। वहीं एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की हुई है। वहीं एनजीटी में भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर केस किया गया है, जो पेंडिंग है। इसमें कहा गया है कि संयंत्र लगने से आसपास के पर्यावरण, वन्य जीवों व फसलों को होने वाले नुकसान होगा। गोरखपुर में परमाणु संयंत्र बनने से काले हिरणों समेत अन्य वन्य जीवों को भी खतरा, सलमान खान को एक काला हिरण मारने पर कोर्ट ने दी है सजा
गोरखपुर में परमाणु संयंत्र बनने से काले हिरणों समेत अन्य वन्य जीवों को भी खतरा, सलमान खान को एक काला हिरण मारने पर कोर्ट ने दी है सजा

भास्कर न्यूज | फतेहाबाद

 

गोरखपुर परमाणु संयंत्र स्थापित करने को लेकर एनपीसीआईएल नियमों को पूरा किए बगैर ही आगे बढ़ रहा है। संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया से शुरू हुआ वन्य जीवों की सुरक्षा का मुद्दा अभी हल नहीं हुआ है। न ही एनपीसीआईएल ने वन्य जीवों के संरक्षण का वादा निभाया है।
इसे लेकर अखिल भारतीय पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा आज भी अदालती लड़ाई लड़ रहा है। ऐसे में संयंत्र प्रबंधन अधिकारियों के लिए अभी आगे की राह आसान नहीं हुई है। इससे संबंधित तीन मामले में विभिन्न अदालतों में विचाराधीन है। लोगों का कहना है कि अभिनेता सलमान खान को कोर्ट ने एक काले हिरण की मौत पर सजा सुनाई हुई है। यहां तो संयंत्र की जमीन से 5 किलोमीटर की दूरी पर वन्य जीव संरक्षण केंद्र है। इतने नजदीक होने के कारण इस संयंत्र से सभी वन्य जीवों को भारी खतरा है। वन्य जीव प्रेमियों का कहना है कि एनपीसीआईएल ने जब गोरखपुर परमाणु संयंत्र के लिए जमीन अधिग्रहण का काम शुरू किया था, उस समय भी उन लोगों ने वन्य जीवों को नुकसान होने का मुद्दा उठाया था। इसमें कहा गया था कि अनुसूची एक के तहत वन्य जीवों की संरक्षण योजना बनाई जाए। जिस पर एनपीसीआईएल ने सहमति भी जताई थी, लेकिन उस पर आज तक कोई काम नहीं हुआ है।
परमाणु संयंत्र की जगह पर बाड़ लगाने से हो चुकी है 7 हिरणों की मौत, संयंत्र की जगह से 5 किमी की दूर है संरक्षण केंद्र
हिरणों की मौत का केस अब भी चल रहा
एनपीसीआईएल की ओर से जब अधिग्रहित जमीन पर बाड़ लगा देने की वजह से 7 हिरणों की मौत भी हुई थी, यह मामला भी काफी गर्म रहा था। इतना ही नहीं उससे संबंधित केस भी अभी चल रहा है। इस मामले में देहरादून से वन्य जीवों के विशेषज्ञों की एक टीम भी यहां आई थी। उस टीम ने वन्य जीवों संबंधित जगह का जायजा लेने के बाद निर्देश दिए थे कि यहां पर सेंचुरी बनाई जाए। संरक्षण योजना बनाई जाए, जिससे वन्य जीवों को नुकसान न हो और वह सुरक्षित रहे। इसके बाद एनपीसीआईएल ने काम तो शुरू कर दिया, लेकिन वन्य जीवों से संबंधित सेंचुरी पर काम नहीं किया।
नियमों का उल्लंघन :विनोद कड़वासरा, महासचिव, अखिल भारतीय पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा का कहना है कि एनपीसीआईएल ने संयंत्र लगाने को लेकर हर तरह स्तर के नियमों का उल्लंघन किया है। इसे लेकर अदालती कार्रवाई चल रही है। इससे यहां के वन्य जीवों और आम जनजीवन को काफी खतरा है। सरकार या तो सुरक्षा की गारंटी ले या फिर इस संयंत्र को कहीं और शिफ्ट करे, नहीं तो सरकार के खिलाफ हमारा विरोध लगातार जारी रहेगा।
गलत रिपोर्ट देने का दावा
पर्यावरण एवं जीव रक्षा बिश्नोई सभा ने दिल्ली हाईकोर्ट में भी एक केस दायर किया हुआ है। इसमें सभा का कहना है कि जिस जमीन पर सेंचुरी बनाने के निर्देश गए थे। उस जगह पर सेंचुरी बनाने के एनपीसीआईएल को पहले उस जमीन को हरियाणा सरकार के नाम कराना था, जोकि अभी तक नहीं हो पाया है। उसके बिना वाइल्ड लाइफ विभाग से क्लीयरेंस मिल नहीं सकती। लेकिन एनपीसीआईएल ने संबंधित मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट में बताया है कि उन्हें वाइड लाइफ क्लीयरेंस मिल चुकी है, जबकि ऐसा नहीं है। जो रिपोर्ट सौंपी गई है, वह केवल प्लांट की काम शुरू करने को लेकर है, सेंचुरी की नहीं है। इस तरह से एनपीसीआईएल ने गुमराह किया है। इस मामले पर इसी महीने के आखिरी सप्ताह में सुनवाई भी होनी है।
वन्य जीवों के लिए अलग से इलाका होना चाहिए, ताकि वन्यप्राणी सुरक्षित रहे और किसानों को फसल नुकसान न हो। इसके लिए पूरे प्रबंध हों। -चंद्र मोहन सिगड़, बड़ोपल गांव।
प्लांट पूरे इलाके के लिए खतरनाक है, वन्यजीवों को तो हम तब बचा पाएंगे, जब हम खुद बचेंगे। सरकार को तुरंत इस प्लांट पर पुनर्विचार करके वायदा निभाना चाहिए। -सतपाल भादू, काजलहेड़ी गांव
हिरणों की मौत का मामला कोर्ट में पेंडिंग :बाड़ लगाने के चलते हुई 7 हिरणों की मौत के मामले में वन्य जीव संबंधी अदालत में केस किया था। इसके बाद एनपीसीआईएल, वन्य जीव विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों समेत 8 लोगों पर केस दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में प्रशासनिक अधिकारियों व वन्य विभाग के अधिकारियों को इस केस से बाहर कर दिया गया था। वहीं एनपीसीआईएल के अधिकारियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की हुई है। वहीं एनजीटी में भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर केस किया गया है, जो पेंडिंग है। इसमें कहा गया है कि संयंत्र लगने से आसपास के पर्यावरण, वन्य जीवों व फसलों को होने वाले नुकसान होगा।

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