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HC ने भीख मांगने को अपराध की कैटिगरी में लाने का प्रावधान किया रद्द

August 09, 2018 06:09 AM

COURSTEY NBT AUG 9

भीख मांगना अपराध नहीं : सबक लेगी सरकार या बढ़ेगी समस्या
HC ने भीख मांगने को अपराध की कैटिगरी में लाने का प्रावधान किया रद्द

भीख मांगने पर नहीं होगी सजा

 

बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बैगिंग ऐक्ट, 1959 के अंतर्गत दिल्ली में लागू कानून के उन सभी प्रावधानों को रद्द कर दिया है
कहा, यह असंवैधानिक• कोर्ट ने कहा, दिल्ली सरकार भीख मांगने के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों पर कानून लाने के लिए स्वतंत्र• 16 मई को पूछा था, जिस देश में सरकार नहीं दे पा रही भोजन, वहां भीख मांगना अपराध कैसे
413670

है देश में भिखारियों

की संख्या
2 भिखारी

हैं लक्षद्वीप में, देश में सबसे कम
81244

भिखारी हैं वेस्ट बंगाल में, देश में सबसे ज्यादा


2187

के आसपास है दिल्ली में भिखारियों की संख्या
Prachi.Yadav@timesgroup.com

• नई दिल्ली : हाई कोर्ट ने भीख मांगने को अपराध के दायरे से बाहर करते हुए बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बैगिंग ऐक्ट, 1959 के अंतर्गत दिल्ली में लागू कानून के उन सभी प्रावधानों को रद्द कर दिया है जो ऐसा करने को अपराध मानती और इसके लिए अभियोजन और दंड की प्रक्रिया तय करती है।

दिल्ली हाई कोर्ट की एक्टिंग चीफ जस्टिस के तौर पर अपना आखिरी फैसला सुनाते हुए जस्टिस गीता मित्तल ने दिल्ली में लागू इस एक्ट के 4 से लेकर 10 और 12 से 29 तक के प्रावधानों को असंवैधनिक बताते हुए रद्द कर दिया। इस पूरे एक्ट को रद्द करने से मना करते हुए बेंच ने कहा है कि उन प्रावधानों को ही रद्द किया जा रहा है जो भिक्षावृति यानी भीख मांगने को अपराध मानती है और इसके लिए अभियोजन और दंड तय करती है। सेक्शन 11 और 30 को हाई कोर्ट ने बरकरार रखा है। इसमें से पहली धारा भिक्षावृति के लिए मजबूर किए जाने और दूसरी जानवरों की सहायता से भीख मांगने से डील करती है। दोनों ही धाराओं में 1 से लेकर 3 साल तक की सजा का प्रावधान है।

हाई कोर्ट में केंद्र की ओर से पेश होने वाले वकील अनिल सोनी ने इस फैसले को संतोषजनक बताया। लेकिन उन्होंने इसके मिसयूज होने की आशंका भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख यही था कि इससे दिल्ली में भिखारियों की संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा, यहां ज्यादातार लोग आसपास के राज्यों से यहां आकर भीख मांगते हैं और इस फैसले के तहत ऐसे लोगों की संख्या अब और बढ़ सकती है।• प्रमुख संवाददाता, नई दिल्ली

 

दिल्ली में भीख मांगना अब अपराध नहीं माना जाएगा। हाई कोर्ट ने इसे अपराध की कैटिगरी से बाहर कर दिया है। कोर्ट का मानना है कि भीख मांगने पर सजा देने का प्रावधान असंवैधानिक है। उसे रद्द किया जाना चाहिए।

एक्टिंग चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरि शंकर की बेंच ने कहा कि इस फैसले से बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट के तहत पेंडिंग मुकदमों को रद्द किया जा सकेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार भीख के लिए मजबूर करने वाले गिरोहों पर कानून लाने के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने साफ किया कि बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट के तहत ऐसा कोई प्रावधान जो भीख मांगने को अपराध की कैटिगरी में नहीं रखता उसे रद्द करने की जरूरत नहीं है। हाई कोर्ट ने 16 मई को पूछा था कि ऐसे देश में भीख मांगना अपराध कैसे हो सकता है, जहां सरकार भोजन और नौकरियां मुहैया कराने में असमर्थ है। कोर्ट ऐसी दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। केंद्र सरकार का कहना था कि बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट में काफी संतुलन है। इस कानून के तहत भीख मांगना अपराध की कैटिगरी में है। हर्ष मंदर और कर्णिका साहनी की जनहित याचिकाओं में दिल्ली में भिखारियों के लिए मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराए जाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट को भी चुनौती दी है। केंद्र और आप सरकार ने अक्टूबर 2016 में कोर्ट को बताया था कि सामाजिक न्याय मंत्रालय ने भीख मांगने को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और भिखारियों और बेघर लोगों के पुर्नवास के लिए एक ड्राफ्ट बिल तैयार किया था। बाद में उसे ड्रॉप कर दिया गया

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