Friday, October 19, 2018
Follow us on
Chandigarh

झप्पी पर तल्खी

July 24, 2018 08:08 PM

राहुल की झप्पी और उस पर नरेन्द्र मोदी की तल्खी पर चर्चा जारी है। लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल गांधी द्वारा नरेन्द्र मोदी को गले लगाना, यह विषय लगातार सोशल मीडिया तथा मास मीडिया दोनों में छाया हुआ है। ट्वीटर पर ‘पप्पू की झप्पी’ और ‘हगप्लोमेसी’ ‘गांधीगिरी’ मुन्नाभाई का अवतरण से लेकर ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ के संदर्भ में सुर्खियां बटोरी। इस तथ्य को लेकर कि प्रधानमंत्री अपनी मुलाकातों के दौरान लोगों को गले लगाने के लिए मशहूर हैं, तथा विदेशी दौरों पर दूसरे दूशों के राजनायकों से तथा देश में आये विदेशी राजनैतिक मेहमानों को गले लगाने में आत्मीयता तथा मुदिता का परिचय देते हैं, वहीं कांग्रेस के अध्यक्ष की प्यार भरी झप्पी उन्हें नागवार गुजरी। यहां तक कि मोदी उस झप्पी के प्रभाव से इतने तिलमिलाये हुए हैं कि अगले दिन भी उत्तर प्रदेश में शाहजाहनपुर में किसानों की रैली में भी बोल गये कि हमने तो उनसे अविश्वास प्रस्ताव के कारणों के बारे में पूछा था, पर वो तो जबरदस्ती गले पड़ गये। मीडिया में इस झप्पी ने कांग्रेस अध्यक्ष को जगह भी दिलायी तथा सुर्खियों में छाये रहे, क्योंकि प्रधानमंत्री जी की वाकपटुता तथा भाषण देने की क्षमता का मुकाबला करना, उनके बस का नहीं। कांग्रेस ने इसे मुहब्बत का आइना बताकर एक नई पहल की है। वहीं भाजपा ने इसका जम कर उपहास उड़ाया। केन्द्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने तंज कसा कि यह मुन्ना भाई की पप्पी-झप्पी नहीं बल्कि संसद है तथा सुब्रह्मण्यम स्वामी की यह जहर से भरी झप्पी हो सकती है, मोदी जी को अपनी जांच करवानी चाहिए। विभाजनकारी तथा डर फैलाने वाली राजनीति की बजाय मोहब्बत का पैगाम देने वाली राजनीति की शुरूआत चाहे यह न हो, पर अदृश्य में राहुल गांधी ने बड़े नैतिक साहस का परिचय तो दिया है। कांग्रेस मुक्त भारत का सपना देखने वाले मोदी जी के लिए यह अप्रत्याशित, इसलिए वह सकपकाये और खड़े नहीं हुए। हालांकि, कांग्रेस को इस झप्पी के राजनैतिक फायदे क्या और कितने होंगे तथा राहुल गांधी इस जोश को कितनी देर तक कायम कर पायेंगे, यह तो समय ही बतायेगा। पर नरेन्द्र मोदी तथा शाह वाली भाजपा को अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करना होगा। हालांकि इसी दौरान जब यह संसद में चल रहा था, अलवर, राजस्थान में एक अकबर नाम के युवक को भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला, क्योंकि वह गायों के झुण्ड को ढेलकर अपने घर ले जा रहा था। भीड़ तंत्र का हावी होना तथा भीड़ द्वारा स्वयं न्याय और कानून को हाथ में लेना लगातार चिंता और डर का विषय बन रहा है। आज आवश्यकता है कि लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए सब आगे आएं। सशक्त तथा सक्षम विपक्ष प्रभावी लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है। 2019 के चुनावी दंगल का बिगुल बजने से पहले पार्टियां अपनी-अपनी रणनीति के तहत चुनावी बिसात पर अपनी चालें शुरू कर रही हैं, लेकिन लगता है वास्तविक मुददे जैसे रोजगार, विकास, सुशासन सब ओट में  रहेगा। जातिगत पहचान और धर्म आधारित विभाजन वाली राजनीति चलती रहेगी। अथ श्रीमहाभारत कथा जारी रहेगी, क्योंकि न तो हमने इतिहास से कुछ सीखा है, न देश विभाजन जैसी त्रास्दी कुछ सिखा पाई है। हिन्दु-मुस्लिम बोट राजनीति राजनेताओं के लिए सत्ता प्राप्त करने का सबसे आकर्षक व सुगम तरीका है। अंत में, निदा फाजल के शब्दों में ‘आजाद न तू, आजाद न मैं, जंजीर बदलती रहती है, तस्वीर बदलती है, दीवार वही रहती है।’

डा० क कली   

 

Have something to say? Post your comment
 
More Chandigarh News
चंडीगढ़ के डीएसपी का अब अंडेमान निकोबार सहित अन्य यूटी में नहीं होगा ट्रांसफर एचसीएस सुधांशु गौतम बने डीपीआर यूटी चंडीगढ़
आदर्श पब्लिक (स्मार्ट) स्कूल में आयोजित हुई हैल्दी टिफिन प्रतियोगिता
राम बिलास शर्मा ने हरियाणा उर्दू अकादमी के डायरेक्टर डॉक्टर नरेंद्र कुमार उपमन्यु द्वारा लिखित एवं संपादित दो किताबों हरियाणा के प्रमुख तीर्थ स्थल एवं हिंदुस्तान की महान हस्तियां का चंडीगढ़ में अपने निवास पर विमोचन किया। चंडीगढ़ में आज हरियाणा उर्दू अकादमी के डायरेक्टर डॉ नरेंद्र उपमन्यु ने हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य से शिष्टाचार भेंट की सियेट ने लांच किये ग्रिप्प एक्स थ्री टायर्स
श्री राम जन्मभूमि पर भव्य राम मंदिर निर्माण हेतु केंद्र सरकार संसद में क़ानून बनाकर मार्ग प्रशस्त करे: विहिप
गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल के स्टैच्यू आफ यूनिटी के अनावरण 1 नवंबर के बाद लोग दर्शन के लिए जाये:रामबिलास शर्मा स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी के निर्माण में हरियाणा-पंजाब के किसानों का भी अमूल्य योगदान है: भूपेंद्रसिंह चुडासमा
गुजरात में सरदार वल्लभ भाई पटेल के स्टैच्यू आफ यूनिटी के अनावरण के बारे में जानकारी देते हुए गुजरात के शिक्षा मंत्री भूपेंद्रसिन्ह चूड़ास्मा